जिंदा शख्स को 14 साल से सरकारी रिकॉर्ड में दिखाया गया मृत, पेंशन ले रहा है फिर भी लड़ा रहा पहचान की जंग

Uttar Pradesh News: बस्ती जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां इशहाक अली नाम के व्यक्ति को 14 साल से सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाया गया है, जबकि वह जीवित हैं और पेंशन ले रहे हैं। उनकी जमीन भी हड़प ली गई। मामला प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार से जुड़ा है।

Apr 17, 2026 - 13:11
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जिंदा शख्स को 14 साल से सरकारी रिकॉर्ड में दिखाया गया मृत, पेंशन ले रहा है फिर भी लड़ा रहा पहचान की जंग

Basti News: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिला से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में पिछले 14 वर्षों से मृत घोषित कर दिया गया है, जबकि हकीकत में वह आज भी जीवित हैं और बैंक से पेंशन भी प्राप्त कर रहे हैं। पीड़ित बुजुर्ग लगातार अपने जीवित होने का सबूत लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला है। यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।

2012 में कागजों में दर्ज हुई मौत
यह पूरा मामला लालगंज थाना क्षेत्र के बानपुर गांव से जुड़ा है। पीड़ित इशहाक अली पुत्र फुल्लूर, संतकबीर नगर के नाथनगर सीएचसी में स्वीपर के पद पर कार्यरत थे। आरोप है कि 2 दिसंबर 2012 को तत्कालीन राजस्व निरीक्षक ललित कुमार मिश्रा ने पद का दुरुपयोग करते हुए कागजों में उनकी मौत दर्ज कर दी। इसी फर्जी रिकॉर्ड के आधार पर उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि गाटा संख्या 892 को एक महिला के नाम दर्ज कर दिया गया। यह पूरा खेल बिना सही जांच के किया गया, जिससे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही सामने आई।

सात साल तक चलता रहा वेतन
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि 2012 से 2019 के बीच राजस्व विभाग में इशहाक अली को मृत दिखाया गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग उन्हें नियमित वेतन देता रहा। यह बड़ा सवाल खड़ा करता है कि क्या विभागों के बीच कोई समन्वय नहीं था। अगर कर्मचारी मृत था तो वेतन किसे दिया जा रहा था और अगर जीवित था तो मृत्यु रिकॉर्ड कैसे दर्ज हुआ। इस विरोधाभास ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

जमीन पर कब्जा और पहचान के लिए संघर्ष
इशहाक अली आज भी जीवित हैं और उनके पास पेंशन पेमेंट ऑर्डर, बैंक स्टेटमेंट और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं। इसके बावजूद तहसील रिकॉर्ड में उन्हें मृत दिखाकर उनकी जमीन पर कब्जा बरकरार है। पीड़ित का कहना है कि वह वर्षों से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। उनका आरोप है कि भ्रष्ट तंत्र अपनी गलती सुधारने के बजाय मामले को दबाने में लगा हुआ है।

डीएम कार्यालय पहुंचे बुजुर्ग, कफन ओढ़कर जताया विरोध
न्याय की मांग को लेकर पीड़ित बुजुर्ग कफन ओढ़कर और माला पहनकर डीएम कार्यालय बस्ती पहुंचे, जहां उन्होंने विरोध जताया। यह दृश्य देखकर लोग हैरान रह गए। बुजुर्ग ने कहा कि उन्हें हर दिन अपने जिंदा होने का सबूत देना पड़ता है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड उन्हें मृत दिखा रहा है।

प्रशासन ने जांच के दिए आदेश
मामले पर एसडीएम शत्रुघ्न पाठक ने कहा कि शिकायत मिली है और जांच की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और पीड़ित को न्याय दिलाया जाएगा।

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Ashwani Tiwari अश्वनी तिवारी, UP News Network में सब-एडिटर हैं। राजनीति, क्राइम, स्पोर्ट्स, ज्योतिष और धार्मिक विषयों से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से काम करते हैं। मीडिया जगत में 3 वर्ष का अनुभव है। रिपोर्टिंग, स्पेशल स्टोरीज़ और स्पेशल खरी-खोटी जैसे कार्यक्रमों पर काम किया है। कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वीडियो एंकरिंग का भी अनुभव है। SumanTV, Hyderabad (डिजिटल प्लेटफॉर्म) के साथ कार्य कर चुके हैं और ZEE News व India Watch जैसे प्रतिष्ठित न्यूज़ संस्थानों में इंटर्नशिप का अनुभव हासिल किया है। पिछले 1 साल से यूपी न्यूज़ नेटवर्क (डिजिटल) से जुड़ा हुआ हूं और उत्तर प्रदेश से जुड़ी अहम खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रहे हैं। एमजेएमसी की पढ़ाई कर चुके अश्वनी तिवारी की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, ज़मीनी मुद्दों और दर्शकों तक सटीक जानकारी पहुंचाने वाली पत्रकारिता से है। मेरी जन्मस्थली वाराणसी है, जबकि कार्य के दौरान मैं कई शहरों में रहकर पत्रकारिता कर चुका हूं।