क्या है सी-प्राइम कैपिटल? जिसके नाम पर हुआ 800 करोड़ का क्रिप्टो स्कैम, STF ने मास्टरमाइंड को दबोचा
उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने क्रिप्टो और विदेशी निवेश के नाम पर 800 करोड़ की ठगी करने वाले गिरोह के सरगना को गिरफ्तार किया। आरोपी फर्जी कंपनी चलाकर सोशल मीडिया से लोगों को फंसाता था। हजारों फर्जी आईडी और एजेंटों के जरिए देशभर में यह बड़ा नेटवर्क चल रहा था।
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने एक बड़े साइबर और वित्तीय धोखाधड़ी गिरोह के मुख्य सरगना को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह क्रिप्टो करेंसी और विदेशी मुद्रा निवेश के नाम पर हजारों लोगों से करीब 700 से 800 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका था। आरोपी की पहचान हरियाणा के यमुनानगर निवासी जतींद्र राम के रूप में हुई है, जो पहले से ही गाजियाबाद में दर्ज एक मामले में वांछित था। एसटीएफ ने उसे दिल्ली रोड स्थित एक रेस्टोरेंट से पकड़ा। आरोपी फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनी चलाकर लोगों को मोटे मुनाफे का लालच देकर फंसाता था।
फर्जी कंपनी और ठगी का तरीका
एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि आरोपी सी-प्राइम कैपिटल नाम की फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनी चला रहा था। यह गिरोह सोशल मीडिया, सेमिनार और छोटी-छोटी मीटिंग्स के जरिए लोगों को जल्दी अमीर बनने का सपना दिखाकर फंसाता था। निवेशकों को एक प्रतिबंधित MT-5 ऐप पर आईडी दी जाती थी, जिसमें नकली मुनाफा दिखाकर उनका भरोसा जीता जाता था।
शुरुआत में मुनाफा देकर बनाते थे भरोसा
गिरोह की सबसे बड़ी चाल यह थी कि शुरुआत में कुछ लोगों को सच में थोड़ा मुनाफा दिया जाता था। इससे लोग इसे असली निवेश समझ लेते थे। इसके बाद वही लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को भी जोड़ते थे। धीरे-धीरे हजारों लोग इस जाल में फंसते चले गए और मोटा निवेश करते रहे।
देशभर में फैला नेटवर्क और करोड़ों की ठगी
जांच में पता चला है कि इस पूरे नेटवर्क में लगभग 30,000 फर्जी आईडी बनाई गई थीं। देशभर में करीब 3,500 एजेंट सक्रिय थे, जो नए लोगों को जोड़ने का काम करते थे। गिरोह कैश में पैसे लेता था और उसे क्रिप्टो करेंसी में बदलकर दुबई और मॉरिशस के बैंक खातों में भेज देता था। वहां से यह पैसा लोकल करेंसी में बदलकर संपत्तियां खरीदने में इस्तेमाल किया जाता था।
फर्जी कंपनियां और मनी लॉन्ड्रिंग का खेल
भारत में पैसों को वैध दिखाने के लिए कई फर्जी फर्म और शेल कंपनियां भी बनाई गई थीं। एसटीएफ के अनुसार यह पूरा मामला सिर्फ धोखाधड़ी ही नहीं बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी मुद्रा नियमों के उल्लंघन से भी जुड़ा है। इस मामले में अब PMLA और FEMA के तहत भी कार्रवाई की तैयारी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य एजेंसियों को भी जानकारी दे दी गई है।
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