मां का कटा हाथ लेकर इंसाफ मांगने पहुंचा ITBP कमांडो, कार्रवाई नहीं हुई तो 50 हथियारबंद जवानों ने घेरा कमिश्नरेट, जानिए क्या है पूरा मामला...
कानपुर में एक परिवार के इलाज से शुरू हुई कहानी अब सवालों के बड़े घेरे में है। मां का कटा हाथ, इंसाफ के लिए बेटे की लड़ाई और फिर पुलिस कमिश्नरेट तक पहुंचे ITBP के हथियारबंद जवान। आखिर अस्पताल में ऐसा क्या हुआ कि इलाज के बाद महिला का हाथ काटना पड़ा, शिकायत के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई और क्यों 50 हथियारबंद जवानों ने घेरा कमिश्नरेट, जानिए पूरा मामला...
कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में उस समय अचानक तनावपूर्ण माहौल बन गया, जब ITBP (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) के 40 से 50 हथियारबंद जवान एक साथ परिसर पहुंच गए। वर्दी में मौजूद जवानों को देखकर पुलिस महकमे में हलचल मच गई। करीब एक घंटे तक कमिश्नरेट परिसर में तनाव की स्थिति बनी रही। बाद में पुलिस अधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग और ITBP अफसरों के बीच लंबी बातचीत के बाद मामला शांत हुआ। पूरा विवाद एक ITBP कमांडो की मां के इलाज और कथित मेडिकल लापरवाही से जुड़ा है। जवानों का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही के कारण कमांडो की मां का हाथ काटना पड़ा, लेकिन शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। इसी नाराजगी ने मामले को बड़ा रूप दे दिया।
मां के इलाज के बाद बिगड़ा मामला
फतेहपुर जिले के खागा हथगाम निवासी विकास सिंह ITBP की 32वीं बटालियन में महाराजपुर स्थित कैंप में तैनात हैं। विकास के मुताबिक उनकी 56 वर्षीय मां निर्मला देवी को सांस लेने में दिक्कत, कब्ज और कमजोरी की शिकायत थी। शुरुआत में उनका इलाज ITBP के अस्पताल में कराया गया। 13 मई को तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया। विकास अपनी मां को लेकर एम्बुलेंस से निकले, लेकिन रास्ते में जाम लगने के कारण वह उन्हें कानपुर के टाटमिल चौराहा स्थित कृष्णा हॉस्पिटल ले गए। आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मां के हाथ में कैनुला लगाने और इंजेक्शन देने के बाद गंभीर संक्रमण हो गया। विकास का दावा है कि कुछ ही घंटों में हाथ काला पड़ने लगा और सूजन तेजी से बढ़ गई। मामला बिगड़ने पर अगले दिन उन्हें दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन संक्रमण इतना फैल चुका था कि डॉक्टरों को हाथ काटना पड़ा।
‘मेरे सामने मां का हाथ काटा गया’
विकास सिंह ने कहा कि मां को बचाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन आखिरकार उनका हाथ काटना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर शुरुआती इलाज में लापरवाही नहीं हुई होती, तो यह स्थिति नहीं बनती। विकास ने कहा कि मेरी मां ने इन्हीं हाथों से मुझे बचपन से पाला। सेना में रहने के बावजूद अगर मैं अपनी मां को इंसाफ नहीं दिला पाया, तो यह मेरे लिए सबसे बड़ा दर्द है।
पहले शिकायत, फिर बढ़ा दबाव
19 मई को विकास सिंह अपनी मां का कटा हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस कमिश्नर ने मामला मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को जांच के लिए भेज दिया। जांच समिति बनाई गई, लेकिन शुरुआती रिपोर्ट में कोई स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आया। यहीं से नाराजगी बढ़ गई। जिसके बाद कार्रवाई में देरी और जांच रिपोर्ट से असंतुष्ट ITBP के जवान और अधिकारी पुलिस कमिश्नरेट पहुंचे। बड़ी संख्या में जवानों की मौजूदगी से माहौल गंभीर हो गया। हालांकि बाद में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जवान तय प्रक्रिया के तहत अपनी बात रखने आए थे। ITBP अधिकारियों ने आरोप लगाया कि संबंधित अस्पताल के खिलाफ पहले भी इलाज में लापरवाही के आरोप लगते रहे हैं।
अस्पताल पर पहले भी उठे सवाल?
ITBP के एक अधिकारी ने दावा किया कि इलाज के दौरान एक महिला कांस्टेबल और एक इंस्पेक्टर की मौत को लेकर भी सवाल उठ चुके हैं। इसी वजह से जवान अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
दोबारा जांच के दिए आदेश
CMO हरिदत्त नेमी ने बताया कि मामले की दोबारा जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की टीम बनाई गई है। अब पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और ITBP प्रतिनिधियों की संयुक्त टीम पूरे मामले की जांच करेगी। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। एडिशनल पुलिस कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) विपिन ताडा ने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और रिपोर्ट के आधार पर उचित कदम उठाए जाएंगे।
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