मोहर्रम से पहले प्रतापगढ़ के कुंडा में बड़ा एक्शन, राजा भैया के पिता उदय प्रताप सिंह समेत 13 लोग नजरबंद, 12 साल पुराने विवाद से जुड़ा मामला
प्रतापगढ़ के कुंडा में मोहर्रम से पहले प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते हुए राजा भैया के पिता उदय प्रताप सिंह समेत 13 लोगों को नजरबंद कर दिया। आखिर 12 साल पुराने विवाद का इस कार्रवाई से क्या संबंध है? पढ़िए शेखपुर आशिक गांव की पूरी कहानी, जहां हर साल मोहर्रम के दौरान प्रशासन हाई अलर्ट पर रहता है।
प्रतापगढ़ के कुंडा क्षेत्र में मोहर्रम शुरू होने से पहले एक बार फिर प्रशासन और स्थानीय राजनीति के बीच हलचल तेज हो गई है। जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कुंडा विधायक राजा भैया के पिता राजा उदय प्रताप सिंह समेत 13 लोगों को पुलिस ने नजरबंद कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है। गुरुवार सुबह भारी पुलिस बल राजा उदय प्रताप सिंह के भदरी स्थित आवास पहुंचा और नोटिस चस्पा कर उन्हें पुलिस निगरानी में रहने के निर्देश दिए गए। प्रशासन के आदेश के अनुसार सभी 13 लोगों को गुरुवार सुबह 5 बजे से शुक्रवार रात 9 बजे तक नजरबंद रखा जाएगा। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब कुंडा का शेखपुर आशिक गांव मोहर्रम के दौरान प्रदेश के सबसे संवेदनशील इलाकों में गिना जाता है। पिछले एक दशक से अधिक समय से यहां मोहर्रम के अवसर पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की जाती रही है।
एक भंडारे ने कैसे बदल दी पूरे गांव की तस्वीर
शेखपुर आशिक गांव का विवाद किसी राजनीतिक बयान या चुनावी रंजिश से नहीं, बल्कि एक धार्मिक आयोजन से जुड़ा है। गांव में स्थित हनुमान मंदिर में राजा उदय प्रताप सिंह हर साल मोहर्रम के दिन हनुमान पाठ और भंडारे का आयोजन कराते हैं। वर्षों तक यह आयोजन और मोहर्रम का जुलूस साथ-साथ निकलता रहा, लेकिन वर्ष 2015 में हालात अचानक बदल गए। उस वर्ष मोहर्रम के ताजिए और मंदिर परिसर में आयोजित भंडारे को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। आरोप लगा कि मंदिर पर लगे धार्मिक झंडे और भंडारे को लेकर आपत्ति जताई गई, जिसके बाद ताजिया जुलूस आगे नहीं बढ़ सका। मामला इतना बढ़ गया कि प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। कई दिनों तक तनाव की स्थिति बनी रही और अंततः तत्कालीन जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में अगले दिन ताजिए को दफन कराया गया। इसी घटना के बाद प्रशासन ने इस क्षेत्र को अति संवेदनशील श्रेणी में रखना शुरू कर दिया।
बंदर की मौत से शुरू हुई थी मंदिर की कहानी
गांव के बुजुर्गों के मुताबिक वर्ष 2012 में सड़क किनारे एक बंदर की मौत हो गई थी। स्थानीय लोगों ने इसे धार्मिक आस्था से जोड़ते हुए उसी स्थान पर हनुमान मंदिर का निर्माण कराया। बाद में यहां नियमित पूजा-पाठ शुरू हुआ और राजा उदय प्रताप सिंह ने मंदिर परिसर में हनुमान पाठ और भंडारे का आयोजन शुरू कराया। संयोग ऐसा रहा कि यह आयोजन हर साल मोहर्रम के दिन ही पड़ता रहा। वर्ष 2013 और 2014 में दोनों समुदायों के कार्यक्रम बिना किसी विवाद के संपन्न हुए, लेकिन 2015 की घटना के बाद प्रशासन को हर साल विशेष सतर्कता बरतनी पड़ रही है।
सातवीं बार नजरबंद किए गए राजा उदय प्रताप सिंह
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार इस बार राजा उदय प्रताप सिंह को सातवीं बार नजरबंद किया गया है। वर्ष 2016 में जिला प्रशासन ने भंडारे की अनुमति नहीं दी थी, जिसके बाद मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा था। अदालत ने जिलाधिकारी को अपने विवेक से निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। तब से लेकर अब तक मोहर्रम के दौरान प्रशासन एहतियाती कदम उठाते हुए उन्हें नजरबंद करता रहा है। प्रशासन का मानना है कि इससे किसी भी संभावित विवाद की आशंका को पहले ही नियंत्रित किया जा सकता है।
शेखपुर आशिक बना सुरक्षा का किला
इस बार प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई जोखिम नहीं लिया है। पूरे मोहर्रम रूट को चार सेक्टरों में बांटा गया है। एक क्षेत्राधिकारी के नेतृत्व में छह इंस्पेक्टर, 30 उपनिरीक्षक, 40 हेड कांस्टेबल, 80 कांस्टेबल, 30 महिला पुलिसकर्मी, तीन फायर टेंडर और पीएसी की एक प्लाटून तैनात की गई है। प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार पांडेय ने बताया कि नजरबंद किए गए सभी लोगों के घरों पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पूरे क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है।
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