पूजा और यज्ञ के दौरान बीच में उठना क्यों माना जाता है गलत, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ
जानिए सनातन धर्म में पूजा या यज्ञ के दौरान स्थान छोड़ना क्यों गलत माना जाता है और उचित अनुष्ठानों के बारे में विशेषज्ञों का क्या मत है।
सनातन धर्म में पूजा, व्रत और यज्ञ को बहुत ही पवित्र माना जाता है और इन्हें करने के लिए कुछ विशेष नियम बनाए गए हैं। अक्सर देखा जाता है कि लोग पूजा या यज्ञ के दौरान आहुति देते समय बीच में उठकर इधर-उधर चले जाते हैं या किसी अन्य काम में लग जाते हैं। लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करना सही नहीं माना जाता। प्रसिद्ध ज्योतिषी डॉ. बसवराज गुरुजी ने इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया है कि पूजा के दौरान अनुशासन और एकाग्रता बनाए रखना बेहद जरूरी है, तभी पूजा का पूरा फल मिलता है।
पूजा के दौरान स्थान न छोड़ना है जरूरी
डॉ. बसवराज गुरुजी के अनुसार यदि कोई व्यक्ति दृढ़ संकल्प के साथ पूजा, व्रत या यज्ञ कर रहा है, तो उसे बीच में पूजा स्थल नहीं छोड़ना चाहिए। चाहे समस्या कितनी भी कठिन क्यों न हो, पूजा पूरी होने तक उसी स्थान पर बने रहना जरूरी होता है। अगर व्यक्ति बीच में उठकर चला जाता है, तो पूजा अधूरी मानी जाती है और उसका पूरा फल नहीं मिलता।
फोन या अन्य कारणों से उठना गलत
गुरुजी ने बताया कि कई लोग पूजा के दौरान फोन कॉल आने पर या किसी वीआईपी के आने पर उठकर बात करने लगते हैं। यह आदत पूजा की पवित्रता को भंग कर देती है। खासतौर पर होम और यज्ञ जैसे कार्यों में यह और भी ज्यादा गलत माना जाता है, क्योंकि इसमें लगातार एकाग्रता और समर्पण जरूरी होता है।
हर तरह के होम में लागू होता है नियम
उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे गणपति होम, मृत्युंजय होम, सत्यनारायण होम, सुदर्शन होम, नवग्रह होम या आयुष होम हो, हर स्थिति में यह नियम लागू होता है। भले ही पुजारी कुछ समय का विराम दे, लेकिन होम करने वाले व्यक्ति को यज्ञशाला से बाहर नहीं जाना चाहिए। ऐसा करने से संकल्प टूट जाता है और पूजा की पवित्रता खत्म हो जाती है।
रामायण से जुड़ा उदाहरण
गुरुजी ने रामायण का उदाहरण देते हुए बताया कि सीता देवी की कथा में भी यह बात सामने आती है। कहा जाता है कि वाल्मीकि आश्रम में उपवास के दौरान जब वे बीच में उठकर थोड़ी दूर चली गई थीं, तो उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इससे यह सीख मिलती है कि पूजा या उपवास में अनुशासन और धैर्य बहुत जरूरी है।
जरूरत पड़ने पर क्या करें
गुरुजी ने यह भी कहा कि अगर किसी कारण से पूजा करने वाला व्यक्ति बीच में उठने को मजबूर हो जाए, तो उसे शुरू से पूजा में शामिल किसी दूसरे व्यक्ति को ही पूजा पूरी करने की जिम्मेदारी देनी चाहिए। बीच में किसी नए व्यक्ति को बैठाना उचित नहीं माना जाता।
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