UP में गोवध पर सबसे सख्त कानून, पिछले 9 साल में 36 हजार गिरफ्तार और 83 करोड़ की संपत्ति हुई जब्त, जानिए गोतस्करों की नींद उड़ाने वाले योगी मॉडल की पूरी सच्चाई...
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार का गोवध निवारण कानून देश के सबसे सख्त कानूनों में माना जा रहा है। 10 साल तक की जेल, लाखों का जुर्माना और 83 करोड़ की संपत्ति जब्त होने तक की कार्रवाई की गई है। जानिए पूरा मामला...
उत्तर प्रदेश में गोसंरक्षण और गोवंश सुरक्षा को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में काफी सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने इसके लिए ऐसा कानूनी और प्रशासनिक ढांचा तैयार किया है, जिसे देश के सबसे कड़े कानूनों में माना जा रहा है। 11 जून 2020 को लागू हुआ ‘उत्तर प्रदेश गो-वध निवारण (संशोधन) अध्यादेश 2020’ इसी दिशा में बड़ा कदम माना जाता है। दरअसल, एक समय ऐसा था जब प्रदेश में गोतस्करी, अवैध गो-कटान और गोवंश की खराब हालत को लेकर लगातार सवाल उठते थे। खासकर सीमावर्ती जिलों और पश्चिमी यूपी में गोतस्करी के नेटवर्क सक्रिय होने की बातें सामने आती थीं। लेकिन 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार बनने के बाद गोरक्षा को सरकार ने अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया। इसके बाद कानून को और सख्त किया गया, ताकि गोवध और गोतस्करी में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई हो सके।
अब गोवध पर 10 साल तक की जेल
यूपी में गोवध निवारण कानून पहली बार 1955 में लागू हुआ था, लेकिन वर्षों तक इसकी कमजोर व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही के चलते गोवध और गोतस्करी पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी। योगी सरकार ने 2020 में इस कानून में बड़ा संशोधन किया। नए कानून के तहत गोवध करने या उसका प्रयास करने पर 3 साल से लेकर 10 साल तक की कठोर सजा और 3 लाख से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि आरोपी दोबारा उसी अपराध में पकड़ा जाता है, तो सजा और भी ज्यादा कठोर हो सकती है।
गोवंश को भूखा रखना भी अपराध
सरकार ने पहली बार गोवंश के प्रति क्रूरता को भी गंभीर अपराध की श्रेणी में शामिल किया। यदि कोई व्यक्ति गायों को भोजन-पानी नहीं देता, उन्हें घायल करता है या ऐसी स्थिति में छोड़ता है जिससे उनकी जान को खतरा हो, तो उसके खिलाफ 1 से 7 साल तक की जेल और 1 से 3 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। यानी कानून केवल गोवध रोकने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गोवंश के संरक्षण और देखभाल को भी कानूनी सुरक्षा दी गई।
गोतस्करी में इस्तेमाल वाहन भी होंगे जब्त
कानून के तहत गोवंश के अवैध परिवहन में इस्तेमाल वाहनों की जब्ती का प्रावधान भी किया गया है। यदि वाहन मालिक यह साबित नहीं कर पाता कि अपराध उसकी जानकारी के बिना हुआ, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा फरार आरोपियों की तस्वीरें सार्वजनिक स्थानों पर लगाने और मामलों को गैर-जमानती बनाने जैसी सख्त व्यवस्थाएं भी लागू की गईं, ताकि आरोपी आसानी से बच न सकें।
9 साल में 36 हजार गिरफ्तार, 83 करोड़ की संपत्ति जब्त
योगी सरकार ने केवल कानून बनाने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई भी की। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2017 से 2025 के बीच गोवध और गोतस्करी से जुड़े मामलों में करीब 36 हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 13,793 आरोपियों पर गुंडा एक्ट और 14,305 मामलों में गैंगस्टर एक्ट लगाया गया। इतना ही नहीं, 178 आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) तक लगाया गया। सरकार ने आर्थिक चोट पहुंचाने की रणनीति अपनाते हुए 83 करोड़ 32 लाख रुपये से ज्यादा की संपत्तियां भी जब्त कीं। योगी सरकार इन आंकड़ों को अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का सबसे बड़ा उदाहरण बता रही है।
देश के सबसे कठोर कानूनों में गिना जा रहा यूपी मॉडल
गोरक्षा को लेकर यूपी सरकार का यह मॉडल अब देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। समर्थकों का कहना है कि सख्त कानून और लगातार कार्रवाई से गोतस्करी पर लगाम लगी है, जबकि आलोचक इसे लेकर अलग-अलग राय रखते हैं। लेकिन इतना तय है कि उत्तर प्रदेश में अब गोवध और गोतस्करी से जुड़े मामलों में कार्रवाई पहले से कहीं ज्यादा तेज और कठोर हो चुकी है।
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