ग्रेटर नोएडा में बनने वाला 13 प्लेटफॉर्म वाला मेगा टर्मिनल, ISBT और मेट्रो से बदल जाएगी यात्रियों की जिंदगी
दिल्ली-एनसीआर में बोड़ाकी को नई दिल्ली और आनंद विहार टर्मिनल का विकल्प बनाने की योजना को अंतिम रूप दिया गया है। 138 एकड़ में 13 प्लेटफॉर्म और मल्टीमॉडल ट्रांजिट हब के साथ जेवर एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
दिल्ली-एनसीआर के परिवहन ढांचे में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। रेल मंत्रालय और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बोड़ाकी को नई दिल्ली और आनंद विहार टर्मिनल का विकल्प बनाने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है। इस महात्वाकांक्षी परियोजना में पहले से अधिक जमीन अधिगृहीत की जाएगी। रेल बोर्ड और उत्तर प्रदेश सरकार की उच्च स्तरीय बैठक में योजना को व्यापक रूप दिया गया। अब बोड़ाकी उत्तर भारत का प्रमुख ट्रांजिट हब बनकर उभरेगा, जहां यात्री सुविधाओं के विस्तार के साथ 100 से अधिक ट्रेनें संचालित की जा सकेंगी।
परियोजना का विस्तार और भूमि अधिग्रहण
शुरू में केवल 39 एकड़ जमीन पर कार्य होने वाला था, लेकिन अब इसे 138 एकड़ में बढ़ा दिया गया है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बताया कि संशोधित योजना के तहत 13 प्लेटफॉर्म और लगभग 63 यार्ड लाइनें बनाई जाएंगी। इस परियोजना से आसपास के सात गांवों—चमरावली, बोड़ाकी, दादरी, तिलपता करनवास, पाली, पल्ला और चमरावली रामगढ़—की जमीन अधिगृहीत की जाएगी। करीब एक हजार किसान प्रभावित होंगे। प्रभावित किसानों को मुआवजा और 6 प्रतिशत विकसित भूखंड देने का विकल्प भी दिया जाएगा। इसके लिए प्राधिकरण लगभग 250 एकड़ अतिरिक्त जमीन खरीदेगा।
मल्टीमॉडल ट्रांजिट हब के रूप में बोड़ाकी
बोड़ाकी केवल रेलवे स्टेशन नहीं होगा। यह एक इंटीग्रेटेड मल्टीमॉडल ट्रांजिट हब (MMTH) बनेगा। यहाँ यात्रियों को तीन तरह की सुविधाएं मिलेंगी—रेलवे टर्मिनल, इंटरस्टेट बस टर्मिनल (ISBT), और नोएडा मेट्रो की एक्सटेंशन। यात्रियों के लिए यह सुविधा एक ही परिसर में उपलब्ध होगी।
जेवर एयरपोर्ट और औद्योगिक निवेश को मिलेगा बूस्ट
बोड़ाकी टर्मिनल को जेवर एयरपोर्ट और यमुना सिटी से सीधे जोड़ा जाएगा। इससे गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के यात्रियों को दिल्ली जाने की आवश्यकता नहीं होगी। फेज-1 के तहत 358 एकड़ में 1700 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। लॉजिस्टिक हब विकसित होने से भविष्य में भारी औद्योगिक और वाणिज्यिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
आनंद विहार का दबाव कम होगा
बोड़ाकी सैटेलाइट टर्मिनल के रूप में आनंद विहार टर्मिनल का बोझ कम करेगा। 105 मीटर चौड़ी सड़क और लॉजिस्टिक हब से जुड़ने के बाद यह क्षेत्र उत्तर भारत का एक प्रमुख कमर्शियल और ट्रांसपोर्ट सेंटर बन जाएगा।
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