जब भूख लगे तो खुद को ही खा जाते हैं ये 6 जीव… जानें प्रकृति की हैरान कर देने वाली सच्चाई
प्रकृति में कई जीव ऐसे हैं जो भूख या खतरे की स्थिति में अपने ही शरीर के हिस्सों को खा लेते हैं। इसे विज्ञान में ऑटोफैगी कहा जाता है।
प्रकृति जितनी सुंदर और अद्भुत है, उतनी ही कठोर और रहस्यमयी भी है। जंगल, समुद्र और धरती पर रहने वाले कई जीव ऐसे होते हैं जो कठिन परिस्थितियों में ऐसे व्यवहार करते हैं, जिनके बारे में सुनकर इंसान हैरान रह जाता है। कभी भूख तो कभी जान का खतरा उन्हें ऐसे कदम उठाने पर मजबूर कर देता है, जिनकी कल्पना करना भी मुश्किल है। विज्ञान की भाषा में इस प्रक्रिया को ऑटोफैगी कहा जाता है। इसका मतलब होता है खुद के शरीर के हिस्सों को ही खा लेना। यह व्यवहार कई जीवों में देखा जाता है और अक्सर यह उनकी जीवित रहने की रणनीति का हिस्सा होता है।
तनाव में खुद को नुकसान पहुंचाता है ऑक्टोपस
समुद्र का बेहद बुद्धिमान जीव माना जाने वाला ऑक्टोपस भी कभी-कभी इस अजीब व्यवहार का शिकार हो जाता है। सामान्य परिस्थितियों में यह बहुत चतुर और शांत जीव होता है, लेकिन जब यह बहुत ज्यादा तनाव में आ जाता है तो इसका व्यवहार बदल जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार अधिक तनाव के कारण इसका दिमाग जैसे शॉर्ट सर्किट हो जाता है और घबराहट में यह अपनी ही भुजाओं को चबाने लगता है। हालांकि इसकी खासियत यह है कि इसकी कटी हुई भुजाएं समय के साथ दोबारा उग आती हैं।
घायल अंग को ही खा जाता है समुद्री तारा
समुद्री तारा यानी सी स्टार भी अपनी अनोखी क्षमता के लिए जाना जाता है। यह जीव अपने टूटे हुए अंगों को दोबारा विकसित कर सकता है। लेकिन जब इसका कोई हिस्सा चोटिल हो जाता है, तो यह उसे बेकार नहीं जाने देता। अपनी ऊर्जा बचाने और पोषक तत्वों को वापस पाने के लिए यह अपने ही घायल अंग को खा जाता है। इस तरह यह अपने शरीर की ऊर्जा को बचाकर जीवित रहने की कोशिश करता है।
घोंघा खा जाता है अपना ही कवच
घोंघा भी ऐसा जीव है जो जरूरत पड़ने पर खुद के शरीर का हिस्सा खा सकता है। घोंघे का खोल कैल्शियम का एक महत्वपूर्ण स्रोत होता है। अगर उसे बाहर से पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिलता, तो वह अपने ही खोल को धीरे-धीरे खुरचकर खाने लगता है। यह तरीका उसके शरीर में कैल्शियम की कमी को पूरा करने में मदद करता है।
चूहों में भी दिखता है यह व्यवहार
चूहे सामाजिक और संवेदनशील जीव माने जाते हैं। लेकिन अगर उन्हें लंबे समय तक भूखा रखा जाए या बहुत छोटी जगह में कैद कर दिया जाए, तो उनका मानसिक संतुलन बिगड़ सकता है। ऐसी स्थिति में कई बार चूहे अपनी ही पूंछ या पंजों को कुतरने लगते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार यह व्यवहार भूख के साथ-साथ तनाव और अकेलेपन का भी परिणाम होता है।
समुद्री खीरा और स्टिक कीट की अनोखी रणनीति
समुद्री खीरा एक ऐसा जीव है जो अपने दुश्मनों से बचने के लिए अनोखा तरीका अपनाता है। खतरा महसूस होने पर यह अपने पेट के अंदरूनी अंगों को बाहर निकालकर फेंक देता है। शिकारी उन अंगों में उलझ जाता है और तब तक समुद्री खीरा वहां से भाग निकलता है। हैरानी की बात यह है कि कई बार यह बाद में अपने ही फेंके हुए अंगों को खा भी लेता है। इसी तरह स्टिक कीट भी खुद को बचाने के लिए अपना पैर शरीर से अलग कर देता है। अगर उसे लंबे समय तक भोजन नहीं मिलता तो वह अपने गिरे हुए पैर को खाकर भूख भी मिटा लेता है।
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