'पहली रोटी गाय को... लेकिन वोट उसके नाम पर नहीं', मुजफ्फरनगर में शंकराचार्य ने उठाए गौरक्षा और मतदान पर सवाल, बोले- दान की तरह सोच-समझकर दें वोट
रविवार को गविष्ठि यात्रा के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि हिंदू पहली रोटी गाय को देता है, लेकिन वोट उसके नाम पर नहीं देता। इसके साथ ही शंकराचार्य ने गौरक्षा, मतदान और गौधाम निर्माण पर विस्तार से अपनी बात रखी। वहीं गौ रक्षा के मुद्दे को लेकर मौजूदा सरकार पर भी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सवाल उठाए।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपनी 81 दिवसीय गविष्ठि यात्रा के दौरान रविवार को सहारनपुर और मुजफ्फरनगर के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाओं को संबोधित करते हुए गौरक्षा, मतदान और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में सदियों से पहली रोटी गाय को देने की परंपरा चली आ रही है, लेकिन जब मतदान की बात आती है तो गौमाता कभी प्राथमिकता नहीं बन पाती। यही कारण है कि गौ संरक्षण का मुद्दा केवल भावनाओं तक सीमित रह गया और नीतियों में उसका अपेक्षित स्थान नहीं बन सका।
'मतदान के समय गाय को दें प्राथमिकता'
शंकराचार्य ने कहा कि हर हिंदू परिवार में सबसे पहले गाय को रोटी खिलाने की परंपरा इस बात का प्रमाण है कि समाज गाय को सर्वोच्च सम्मान देता है। लेकिन उन्होंने कहा कि जिस गाय को प्रतिदिन पहली रोटी दी जाती है, उसी के भविष्य का निर्णय करने वाले वोट में उसे कभी प्राथमिकता नहीं मिली। उनके अनुसार पिछले 70 वर्षों में लोगों ने जाति, बिरादरी, सड़क, बिजली और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर मतदान किया, लेकिन गौ संरक्षण को मतदान का आधार नहीं बनाया।
'गविष्ठि यात्रा का उद्देश्य भ्रम दूर करना'
शंकराचार्य ने कहा कि आज हर राजनीतिक दल स्वयं को गौभक्त बताता है और विरोधियों पर गौविरोधी होने का आरोप लगाता है। ऐसे माहौल में आम जनता के लिए वास्तविक स्थिति समझना कठिन हो गया है। उन्होंने कहा कि गविष्ठि यात्रा का उद्देश्य समाज के सामने यह स्पष्ट करना है कि वास्तव में गौ संरक्षण के पक्ष में कौन खड़ा है और कौन नहीं। उन्होंने कहा कि यह धर्मयुद्ध किसी व्यक्ति या दल के खिलाफ नहीं, बल्कि गौमाता के सम्मान और संरक्षण के लिए जनजागरण का अभियान है। जब समाज इस विषय पर स्पष्ट निर्णय लेगा, तभी गौ संरक्षण को लेकर ठोस बदलाव संभव होगा।
'वादा करके निभाने में विफल रहने वालों की जवाबदेही अधिक'
शंकराचार्य ने कहा कि जो सरकारें कभी गौरक्षा का दावा किए बिना सत्ता में आईं, उनकी जिम्मेदारी अलग है, लेकिन जो स्वयं को गौभक्त बताकर सत्ता में आईं और उसके बाद भी गौहत्या रोकने में सफल नहीं हुईं, उनकी नैतिक जिम्मेदारी अधिक है। उन्होंने कहा कि किसी भी वादे को पूरा न करना केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि धार्मिक और नैतिक दृष्टि से भी गंभीर विषय है। उन्होंने मतदाताओं से अपील करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति एक बार झूठे वादे का शिकार होता है तो वह परिस्थितियों का परिणाम हो सकता है, लेकिन उसी वादे पर दोबारा विश्वास कर उसी आधार पर मतदान करना मतदाता की भी जिम्मेदारी बन जाती है।
'दान की तरह वोट भी सोच-समझकर दें'
सभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने दान का उदाहरण देते हुए कहा कि योग्य व्यक्ति को दिया गया दान पुण्य का कारण बनता है, जबकि अयोग्य व्यक्ति को दिया गया दान विपरीत परिणाम भी दे सकता है। उन्होंने कहा कि यही सिद्धांत मतदान पर भी लागू होता है। उन्होंने कहा कि यदि वोट गौ संरक्षण और समाजहित के लिए दिया जाता है तो वह पुण्य का कार्य है, लेकिन यदि उसी वोट के परिणामस्वरूप गौहत्या जैसी गतिविधियां जारी रहती हैं तो उसकी नैतिक जिम्मेदारी मतदाता पर भी आती है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने कर्मों की जिम्मेदारी स्वयं उठानी होती है।
'हर विधानसभा में बने गौधाम'
शंकराचार्य ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में गौधाम स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने कहा कि यह गौधाम किसी व्यावसायिक डेयरी की तरह नहीं, बल्कि गौसेवा, संरक्षण और आध्यात्मिक आशीर्वाद के केंद्र होने चाहिए। उन्होंने कहा कि वहां गौमाताओं की सेवा निस्वार्थ भाव से की जाए, जिससे समाज में गौ संरक्षण के प्रति जागरूकता और श्रद्धा दोनों का विस्तार हो।
रविवार को इन विधानसभा क्षेत्रों में पहुंची गविष्ठि यात्रा
रविवार को गविष्ठि यात्रा की शुरुआत सहारनपुर जिले की देवबंद विधानसभा से हुई। इसके बाद यात्रा मुजफ्फरनगर की चरथावल, बुढ़ाना और खतौली विधानसभा से गुजरते हुए शाम को सदर विधानसभा पहुंची, जहां शंकराचार्य का रात्रि विश्राम हुआ। यात्रा के दौरान प्रत्येक स्थान पर गौ संरक्षण, गौ संवर्धन और गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित किए जाने की मांग को लेकर जनसभाएं आयोजित की गईं। यात्रा मार्ग में विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। सोमवार को गविष्ठि यात्रा के पुरकाजी विधानसभा पहुंचने का कार्यक्रम निर्धारित है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
