अमेठी में जनता कर रही इंतजार और कुर्सी पर पैर रखकर आराम करते दिखे एडीओ पंचायत! वायरल फोटो ने खड़े किए कई सवाल

अमेठी के शाहगढ़ ब्लॉक में एडीओ पंचायत की एक कथित कार्यालय समय की वायरल तस्वीर ने सरकारी कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दावा है कि अधिकारी आराम कर रहे थे जबकि ग्रामीण अपनी समस्याओं के समाधान के लिए इंतजार कर रहे थे। आखिर वायरल फोटो में कितना सच है और प्रशासन क्या कार्रवाई करेगा?

Jun 20, 2026 - 11:07
Jun 20, 2026 - 11:08
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अमेठी में जनता कर रही इंतजार और कुर्सी पर पैर रखकर आराम करते दिखे एडीओ पंचायत! वायरल फोटो ने खड़े किए कई सवाल

सरकारी दफ्तरों में जनता अपनी समस्याओं का समाधान कराने की उम्मीद लेकर पहुंचती है, लेकिन जब जिम्मेदार अधिकारी ही कार्यालय समय में काम छोड़ आराम फरमाते नजर आएं तो सवाल उठना स्वाभाविक है। अमेठी के शाहगढ़ विकास खंड से सामने आई एक वायरल तस्वीर ने सरकारी कार्यशैली और जवाबदेही पर नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही तस्वीर में अमेठी के शाहगढ़ ब्लॉक में तैनात एडीओ पंचायत मनोज चौधरी अपने कार्यालय की कुर्सी पर पैर रखकर आराम करते दिखाई दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह तस्वीर कार्यालय समय की है। तस्वीर सामने आने के बाद स्थानीय लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई है कि जिस समय अधिकारी आराम कर रहे थे, उसी दौरान कई ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर कार्यालय पहुंचे थे और उन्हें इंतजार करना पड़ा।

वायरल तस्वीर बनी चर्चा का विषय
वायरल तस्वीर ने केवल एक अधिकारी की कार्यशैली पर सवाल नहीं उठाए हैं, बल्कि पूरे सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली को लेकर भी बहस छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि पंचायत विभाग गांवों के विकास और आम लोगों की समस्याओं के समाधान से सीधे जुड़ा हुआ विभाग है। ऐसे में यदि जिम्मेदार अधिकारी कार्यालय समय में इस तरह नजर आते हैं तो इसका सीधा असर आम जनता के भरोसे पर पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे कार्यालय समय में पूरी गंभीरता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें। उनका आरोप है कि अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा आखिरकार आम नागरिकों को ही भुगतना पड़ता है।

सोशल मीडिया पर उठी कार्रवाई की मांग
तस्वीर वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग शुरू कर दी है। कई लोगों का कहना है कि यदि तस्वीर कार्यालय समय की है तो इसकी जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि उस समय कार्यालय में क्या स्थिति थी और क्या वास्तव में फरियादी अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। लोगों का मानना है कि सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों की गंभीरता से जांच होना जरूरी है, ताकि जनता का विश्वास बना रहे।

सामने नहीं आया अधिकारी का पक्ष 
हालांकि, वायरल तस्वीर की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। इस मामले पर एडीओ पंचायत मनोज चौधरी का पक्ष भी सामने नहीं आ सका। फिलहाल यह तस्वीर शाहगढ़ ब्लॉक की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा का विषय बनी हुई है।

रिपोर्ट- बृजेश मिश्रा 

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