कानपुर किडनी कांड: साउथ अफ्रीकी महिला से ढाई करोड़ वसूले, फ्लाइट से आते-जाते थे डॉक्टर… बड़ा खुलासा
Kanpur News: कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने दो ओटी तकनीशियन को गिरफ्तार कर नेटवर्क की परतें खोलीं। नोएडा का डॉक्टर रोहित मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जो देश-विदेश तक फैले इस अवैध कारोबार को चला रहा था।
Uttar Pradesh News: कानपुर में सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट को लेकर हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। गुरुवार को पुलिस ने इस मामले में दो ओटी तकनीशियन को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आई जानकारी ने पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को चौंका दिया है। बताया जा रहा है कि इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड नोएडा का डॉ. रोहित है, जिसने देश के कई शहरों और विदेशों तक अपना नेटवर्क फैला रखा था। यह गिरोह बेहद संगठित और हाई-टेक तरीके से काम करता था।
फ्लाइट से आते थे डॉक्टर, सीक्रेट मिशन की तरह होता था ऑपरेशन
पुलिस जांच में सामने आया कि इस गिरोह का काम करने का तरीका किसी सीक्रेट मिशन जैसा था। दिल्ली से यूरोलॉजिस्ट और विशेषज्ञ डॉक्टर फ्लाइट से कानपुर आते थे और ट्रांसप्लांट के बाद उसी रात लौट जाते थे। पकड़े गए तकनीशियनों ने बताया कि उन्हें हर ऑपरेशन के लिए 35 से 50 हजार रुपये दिए जाते थे।
विदेशी मरीजों से करोड़ों की वसूली, पहचान भी रहती थी गुप्त
जांच में यह भी सामने आया कि डोनर और रिसीवर को एक-दूसरे की जानकारी तक नहीं होती थी। सबसे चौंकाने वाला मामला साउथ अफ्रीका की महिला ‘अरेबिका’ का है, जिसका ट्रांसप्लांट कराने के लिए करीब ढाई करोड़ रुपये लिए गए। डीसीपी कासिम आबिदी के अनुसार, गिरोह ने स्थानीय ही नहीं बल्कि विदेशी मरीजों के भी अवैध ट्रांसप्लांट किए।
कई राज्यों में फैला नेटवर्क, एजेंटों के जरिए चलता था खेल
गिरोह का नेटवर्क दिल्ली, नोएडा, मेरठ, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और मुंबई तक फैला हुआ था। हर शहर में एजेंट काम करते थे। कानपुर और आसपास की जिम्मेदारी शिवम अग्रवाल उर्फ शिवम काड़ा संभालता था। शहर के छह बड़े अस्पताल भी इस अवैध पैनल का हिस्सा बताए जा रहे हैं।
ड्राइवर से बना रैकेट का हिस्सा, लालच में जुड़ा शिवम
शिवम अग्रवाल जालौन का रहने वाला है और 15 साल पहले कानपुर आया था। पहले वह एंबुलेंस चलाता था, लेकिन अमीर बनने के लालच में इस रैकेट से जुड़ गया। स्थानीय लोग उसे ‘डॉक्टर साहब’ कहकर बुलाते थे।
छात्र की शिकायत से खुला राज, अब बड़े नामों पर नजर
इस रैकेट का खुलासा बिहार के छात्र आयुष की शिकायत से हुआ। एमबीए कर रहे आयुष ने फीस के लिए किडनी बेचने का फैसला किया, लेकिन उसे तय रकम से बहुत कम, सिर्फ 6 लाख रुपये मिले। इसके बाद उसने पुलिस में शिकायत की। अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अस्पतालों और डॉक्टरों की जांच कर रही है और जल्द बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
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