ईरान-इजरायल तनाव का असर बाजार पर, प्लास्टिक से लेकर जूते-चप्पल तक महंगे होने के आसार
ईरान-इजराइल संघर्ष का असर भारत में प्लास्टिक उद्योग और खाद्य एवं खाद्य एवं बिक्री (एफएमसीजी) क्षेत्र पर पड़ रहा है। कच्चे माल की बढ़ती लागत से दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।
ईरान-इजराइल युद्ध का असर अब सिर्फ गैस सप्लाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था और उद्योगों पर भी साफ दिखने लगा है। खासकर एफएमसीजी उद्योग और छोटे निर्माताओं पर इसका बड़ा असर पड़ा है। कच्चे माल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी होने के कारण कई कंपनियां अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने को मजबूर हो रही हैं। इस स्थिति ने छोटे कारोबारियों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
सप्लाई चेन में आई बड़ी रुकावट
एक रिपोर्ट के अनुसार केरल में कई प्लास्टिक प्रोसेसिंग यूनिट्स को कच्चा माल मिलना मुश्किल हो गया है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण प्लास्टिक दाना महंगा हो गया है। छोटे कारोबारियों के लिए यह बड़ी समस्या बन गई है। पूंजी की कमी और बढ़ती लागत के कारण कई यूनिट्स ने उत्पादन रोक दिया है, जिससे सप्लाई चेन पर भी असर पड़ा है।
1000 से ज्यादा यूनिट्स पर संकट
केरल प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अनुसार, राज्य में 1000 से अधिक छोटी और मध्यम प्लास्टिक यूनिट्स हैं। इनमें से करीब 20-25% यूनिट्स फिलहाल बंद पड़ी हैं। इन यूनिट्स में बोतल, पैकेजिंग सामग्री, जूते-चप्पल के सोल जैसे कई जरूरी उत्पाद बनाए जाते हैं, जो रोजमर्रा के जीवन में उपयोग होते हैं।
कच्चे माल के दाम में भारी बढ़ोतरी
बताया जा रहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने के कारण रॉ मैटेरियल की कीमतों में तेजी आई है। 1 से 11 मार्च के बीच पॉलिमर की कीमतों में पांच बार बढ़ोतरी हुई है। कुल मिलाकर कच्चे माल की कीमत लगभग 59% तक बढ़ चुकी है। इसके चलते प्लास्टिक से जुड़े सभी उत्पाद महंगे हो गए हैं।
उत्पादों की कीमत में 50% तक बढ़ोतरी
जो यूनिट्स अभी भी चल रही हैं, उन्होंने बढ़ती लागत को देखते हुए अपने उत्पादों के दाम लगभग 50% तक बढ़ा दिए हैं। इसका असर पैकेजिंग इंडस्ट्री, एफएमसीजी कंपनियों और अन्य उद्योगों पर साफ दिखाई दे रहा है।
पैकेजिंग लागत बढ़ने से कंपनियां चिंतित
केरल के आयुर्वेदिक उत्पाद निर्माता भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। पैकेजिंग लागत में 25 से 50% तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। कई कंपनियां फिलहाल अपने उत्पादों के दाम नहीं बढ़ा रही हैं, लेकिन उनका कहना है कि लंबे समय तक ऐसा करना संभव नहीं है। आने वाले समय में उन्हें 15 से 25% तक कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं।
जूते-चप्पल उद्योग पर भी असर
प्लास्टिक दाने की कमी का असर जूते-चप्पल उद्योग पर भी पड़ा है। पॉलीएथिलीन से बनने वाले सोल की लागत बढ़ने के कारण निर्माता परेशान हैं। उनका कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो उन्हें कीमतों में 30 से 40% तक बढ़ोतरी करनी पड़ेगी।
पुराने स्टॉक से चल रहा काम, आगे बढ़ सकती है परेशानी
फिलहाल जिन कंपनियों के पास पुराना स्टॉक है, वे उसी से काम चला रही हैं। लेकिन उनका कहना है कि यह स्टॉक ज्यादा समय तक नहीं चलेगा। आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है और कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
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