भारत में दो साल के भीतर उड़ेंगे स्वदेशी यात्री विमान, 1600 विमानों के ऑर्डर के बीच मोदी सरकार की बड़ी तैयारी, छोटे शहरों तक बढ़ेगी हवाई कनेक्टिविटी
भारत में जल्द ही स्वदेशी यात्री विमान उड़ान भर सकते हैं। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा है कि अगले दो वर्षों के भीतर मेड इन इंडिया सिविलियन एयरक्राफ्ट तैयार होने की उम्मीद है। भारतीय एयरलाइंस के पास 1,600 से ज्यादा विमानों के ऑर्डर हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 100 अरब डॉलर है। सरकार अगले 10 वर्षों में 100 से ज्यादा नए एयरपोर्ट बनाने की संभावना भी जता रही है। भारत में एयरक्राफ्ट कंपोनेंट और सर्विस से जुड़े कारोबार को बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
भारत के एविएशन सेक्टर को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा एलान किया है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दो वर्षों के भीतर भारत में निर्मित स्वदेशी यात्री विमान उड़ान भरने लगेंगे। सरकार का फोकस देश में यात्री विमानों के निर्माण के लिए जरूरी मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने पर है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने दिल्ली में इंडियन फाउंडेशन फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट के एक सिंपोजियम में भारतीय विमानन क्षेत्र के भविष्य को लेकर यह बात कही। उन्होंने कहा कि अगले दो वर्षों के भीतर देश के पास मेड इन इंडिया सिविलियन एयरक्राफ्ट होंगे। उनके मुताबिक स्वदेशी यात्री विमानों का निर्माण ज्वाइंट वेंचर के जरिए संभव होगा। हालांकि, मंत्री ने इस प्रस्तावित विमान के मॉडल, निर्माण में शामिल कंपनियों या इसकी उत्पादन क्षमता को लेकर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की। फिलहाल सरकार की ओर से यह संकेत दिया गया है कि देश में यात्री विमान निर्माण के लिए एक व्यापक औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है।
भारतीय एयरलाइंस के पास 1600 से ज्यादा विमानों के ऑर्डर
भारत में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय विमानन बाजार के विस्तार के बीच एयरलाइंस कंपनियों की ओर से बड़े पैमाने पर विमानों के ऑर्डर दिए गए हैं। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक भारतीय एयरलाइंस कंपनियों के पास 1,600 से ज्यादा विमानों के ऑर्डर हैं। इन ऑर्डर की अनुमानित कीमत करीब 100 अरब डॉलर बताई गई है। यह मांग भारत में तेजी से बढ़ते हवाई यातायात और घरेलू विमानन बाजार की स्थिति को भी दर्शाती है। मौजूदा समय में भारतीय घरेलू एयरलाइंस के पास करीब 850 विमानों का बेड़ा है।
विमान निर्माण के लिए मजबूत इकोसिस्टम पर जोर
राममोहन नायडू ने भारत में विमान निर्माण के लिए बेहतर मटेरियल और सक्षम लोगों को शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार इसके लिए बेहतर नीतियां तैयार कर सकती है। सरकार की कोशिश विमानन क्षेत्र में केवल एयरलाइंस और एयरपोर्ट के विस्तार तक सीमित न रहकर विमान निर्माण और उससे जुड़े उद्योगों को भी बढ़ावा देने की है। भारत में विमान के कंपोनेंट, मेंटेनेंस और दूसरी विमानन सेवाओं से जुड़े क्षेत्र पहले से तेजी से विस्तार कर रहे हैं। ऐसे में सरकार घरेलू विमान निर्माण को इसी बढ़ते इकोसिस्टम से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।
अगले 10 साल में 100 से ज्यादा नए एयरपोर्ट
केंद्रीय मंत्री ने भारत में एयरपोर्ट नेटवर्क के विस्तार को लेकर भी बड़ा अनुमान साझा किया। उनके मुताबिक आने वाले 10 वर्षों में देश में 100 से ज्यादा नए एयरपोर्ट बनने की संभावना है। फिलहाल देश में 164 एयरपोर्ट हैं। हवाई यात्रा की बढ़ती मांग और छोटे शहरों को एयर कनेक्टिविटी से जोड़ने की जरूरत को देखते हुए आने वाले वर्षों में एयरपोर्ट की संख्या में और बढ़ोतरी की उम्मीद है।
भारत से बढ़ेगा एयरक्राफ्ट कंपोनेंट और सर्विस का कारोबार
भारत में एयरक्राफ्ट निर्माण से जुड़े कंपोनेंट और सर्विस का कारोबार भी बढ़ने की संभावना है। नायडू के मुताबिक फिलहाल बोइंग और एयरबस जैसी विमान निर्माता कंपनियां अपने कंपोनेंट और सर्विस से जुड़े काम भारत को देती हैं, जिनकी कीमत करीब 4 अरब डॉलर है। सरकार का अनुमान है कि इस दशक में भारत से जुड़े कंपोनेंट और सर्विस का यह कारोबार बढ़कर करीब 10 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे विमानन क्षेत्र के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और सप्लाई चेन से जुड़े उद्योगों को भी फायदा मिलने की संभावना है।
भारत तेजी से बढ़ते घरेलू एविएशन बाजार में शामिल
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते घरेलू एविएशन बाजारों में शामिल है। यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ एयरलाइंस कंपनियां लगातार अपने बेड़े का विस्तार कर रही हैं। इसी वजह से आने वाले वर्षों में विमानों की मांग और एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। नागरिक उड्डयन मंत्री के मुताबिक भारत एविएशन के साथ-साथ डिफेंस प्रोजेक्ट के हब के रूप में भी उभर रहा है। ऐसे में सिविल एविएशन और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े अनुभव का इस्तेमाल देश में विमान निर्माण की क्षमता विकसित करने में किया जा सकता है।
मेड इन इंडिया विमान से बदल सकता है एविएशन सेक्टर
अगर भारत अगले दो वर्षों में स्वदेशी यात्री विमान के निर्माण और उड़ान की दिशा में आगे बढ़ता है तो यह देश के एविएशन सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव होगा। अभी भारत में एयरलाइंस के विमानों का बड़ा हिस्सा विदेशी विमान निर्माताओं से आता है। घरेलू स्तर पर यात्री विमान निर्माण शुरू होने से विमानन क्षेत्र में मैन्युफैक्चरिंग, कंपोनेंट, इंजीनियरिंग, रोजगार और सप्लाई चेन से जुड़े नए अवसर पैदा हो सकते हैं। सरकार की योजना एयरपोर्ट और एयरलाइंस के विस्तार के साथ विमान निर्माण का इकोसिस्टम तैयार करने की है। आने वाले वर्षों में इस दिशा में होने वाली प्रगति से यह तय होगा कि भारत अपने तेजी से बढ़ते एविएशन बाजार को किस हद तक घरेलू विमान निर्माण क्षमता में बदल पाता है।
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