फ्रांस के बड़े साहित्यिक पुरस्कार की रेस से बाहर हुई किताब, AI से किताब लिखने का आरोप, कनाडाई लेखक बोले- 2019 में AI था ही नहीं
कनाडाई लेखक थेलीसन ओरेलियन की किताब इट वॉज ईदर दैट ऑर डाई को फ्रांस के प्रतिष्ठित प्रिक्स गोनकोर्ट की दौड़ से बाहर कर दिया गया है। लेखक पर किताब में AI की मदद लेने का आरोप लगा, जिसे उन्होंने खारिज किया है। लेखक का कहना है कि उन्होंने 2017 में किताब पर काम शुरू किया और 2019 में पहला ड्राफ्ट तैयार कर लिया था। वहीं गोनकोर्ट अकादमी का कहना है कि पत्रकारों और शोधकर्ताओं की जांच में किताब के बड़े हिस्से में AI के इस्तेमाल के संकेत मिले हैं। तीन अलग-अलग AI डिटेक्शन टूल्स की जांच, विशेषज्ञों की राय और लेखक की सफाई ने इस विवाद को और चर्चा में ला दिया है।
किताब लिखने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के इस्तेमाल को लेकर साहित्य की दुनिया में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कनाडाई लेखक थेलीसन ओरेलियन की किताब इट वॉज ईदर दैट ऑर डाई को फ्रांस के प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कार प्रिक्स गोनकोर्ट की दौड़ से बाहर कर दिया गया है। आरोप है कि किताब लिखने में AI की मदद ली गई थी। हालांकि लेखक ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने इस किताब पर काम 2017 में शुरू किया था और 2019 में इसका पहला ड्राफ्ट तैयार हो गया था। उनका तर्क है कि उस समय आज की तरह आम लोगों के लिए AI लेखन टूल उपलब्ध नहीं थे। लेकिन गोनकोर्ट अकादमी ने लेखक की दलील को स्वीकार नहीं किया। अकादमी का कहना है कि शोधकर्ताओं और पत्रकारों की जांच में किताब के बड़े हिस्से में AI की मदद लिए जाने के संकेत मिले हैं। अकादमी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह AI से तैयार कंटेंट को साहित्यिक पुरस्कार के जरिए मान्यता नहीं देना चाहती।
सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ पूरा विवाद
ओरेलियन की किताब को लेकर विवाद की शुरुआत एक छोटे और गुमनाम सोशल मीडिया अकाउंट से हुई। इस अकाउंट पर किताब में AI के संभावित इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए थे। बाद में फ्रांस के अखबार ले फिगारो के लेखक सैमुअल फिटूसी ने बताया कि वही इस अकाउंट को चला रहे थे। फिटूसी के मुताबिक, कुछ यूजर्स ने उनसे ओरेलियन की किताब की जांच करने के लिए कहा था। इसके बाद उन्होंने किताब के कुछ हिस्सों को पैंग्राम नाम के AI डिटेक्शन टूल से जांचा। उनका कहना था कि इसका उद्देश्य लेखक को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना नहीं था, बल्कि साहित्य में AI के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर बहस शुरू करना था। यहीं से मामला सोशल मीडिया की चर्चा से निकलकर फ्रांस के साहित्यिक जगत और फिर गोनकोर्ट पुरस्कार तक पहुंच गया।
तीन AI डिटेक्शन टूल्स में अलग-अलग नतीजे
किताब की जांच केवल एक AI डिटेक्शन टूल से नहीं की गई। रिपोर्ट के मुताबिक तीन अलग-अलग टूल्स के जरिए किताब में AI के संभावित इस्तेमाल का आकलन किया गया। पैंग्राम टूल ने किताब के करीब 95 फीसदी हिस्से में AI के इस्तेमाल की संभावना जताई। GPTZero ने करीब 87 फीसदी हिस्से को AI से तैयार होने की संभावना वाला बताया। वहीं विंस्टन की जांच में अलग-अलग हिस्सों में इंसानी लेखन की संभावना 12 से 66 फीसदी के बीच बताई गई। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद सवाल उठा कि क्या AI डिटेक्टर के नतीजों को किसी लेखक के खिलाफ निर्णायक सबूत माना जा सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों ने इस मामले में सावधानी बरतने की बात कही है। AI डिटेक्शन टूल्स यह निश्चित तौर पर साबित नहीं करते कि किसी टेक्स्ट को AI ने ही लिखा है। फ्रांस के AI रिसर्चर थियरी पोइबो के मुताबिक किताब में AI इस्तेमाल होने की संभावना दिखाई देती है, लेकिन केवल इन जांचों के आधार पर इसे पूरी तरह निश्चित नहीं कहा जा सकता।
लेखक बोले- किताब पर 2017 से काम कर रहा था
आरोप सामने आने के बाद थेलीसन ओरेलियन ने AI से किताब लिखने की बात से इनकार किया। लेखक के मुताबिक उन्होंने इस किताब पर 2017 में काम शुरू किया था और 2019 में इसका पहला ड्राफ्ट पूरा कर लिया था। ओरेलियन ने इस तथ्य को अपनी सफाई का अहम आधार बनाया है। उनका कहना है कि जिस समय किताब का पहला ड्राफ्ट तैयार हुआ, उस समय आज की तरह आम लोगों के लिए AI आधारित लेखन टूल उपलब्ध नहीं थे। हालांकि गोनकोर्ट अकादमी ने उनके इस तर्क को निर्णायक नहीं माना। विवाद का केंद्र यह है कि किताब का अंतिम रूप कब तैयार हुआ और उसके अलग-अलग हिस्सों में लेखन प्रक्रिया के दौरान AI का इस्तेमाल हुआ या नहीं।
गोनकोर्ट ने AI कंटेंट को लेकर लिया फैसला
प्रिक्स गोनकोर्ट फ्रांस के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कारों में गिना जाता है। इस पुरस्कार की दौड़ से किसी चर्चित किताब का बाहर होना अपने आप में बड़ी खबर है। गोनकोर्ट अकादमी ने कहा कि साहित्यिक पुरस्कार का उद्देश्य लेखक की रचनात्मकता और साहित्यिक योगदान को मान्यता देना है। अकादमी ने AI से तैयार सामग्री को किसी भी रूप में बढ़ावा देने से दूरी बनाने का फैसला किया। यही वजह है कि ओरेलियन की किताब को लेकर विवाद सिर्फ एक लेखक और एक पुरस्कार तक सीमित नहीं रह गया है। इसने साहित्य में AI की भूमिका, लेखक की मौलिकता और AI डिटेक्शन टूल्स की विश्वसनीयता पर भी बहस शुरू कर दी है।
किताब की कहानी ने पहले ही खींचा था ध्यान
AI विवाद से पहले ओरेलियन की किताब फ्रांस में काफी चर्चा में आ चुकी थी। किताब की कहानी एक हाईस्कूल शिक्षक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो हैती में गैंग से बचकर निकलता है। इसके बाद वह डेरियन गैप के खतरनाक रास्ते से गुजरता है। डेरियन गैप पनामा और कोलंबिया के बीच स्थित घने जंगलों, पहाड़ियों और दलदली इलाकों वाला क्षेत्र है। कहानी में शिक्षक इस रास्ते को पार करके अमेरिका पहुंचता है और फिर कनाडा चला जाता है। किताब को पाठकों और आलोचकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी। कुछ ही हफ्तों में इसकी 54 हजार से ज्यादा प्रतियां बिकने की बात सामने आई। इसे कई साहित्यिक पुरस्कारों के लिए भी नामांकित किया गया था।
पुरस्कारों की चर्चा के बीच फ्रांस पहुंचे थे लेखक
ओरेलियन इस महीने अपनी किताब के प्रचार के लिए फ्रांस पहुंचे थे। वहां उन्हें कई टीवी कार्यक्रमों में बुलाया गया और उनकी किताब को लेकर साहित्यिक जगत में चर्चा हो रही थी। प्रिक्स गोनकोर्ट के अलावा भी उनकी किताब कई बड़े साहित्यिक पुरस्कारों की दौड़ में शामिल थी। ऐसे समय में AI इस्तेमाल का आरोप सामने आने से किताब की साहित्यिक सफलता के साथ-साथ लेखक की लेखन प्रक्रिया भी चर्चा का केंद्र बन गई। अब विवाद इस बात पर है कि AI डिटेक्शन टूल्स के नतीजों को कितना विश्वसनीय माना जाए और साहित्यिक संस्थाएं AI की मदद से तैयार या संपादित सामग्री के लिए किस तरह के नियम तय करें।
2010 के भूकंप ने बदल दी ओरेलियन की जिंदगी
थेलीसन ओरेलियन की किताब की कहानी जितनी चर्चा में है, उनकी निजी जिंदगी की कहानी भी उतनी ही संघर्षपूर्ण रही है। 38 वर्षीय ओरेलियन का जन्म हैती के गोनाइव्स शहर में हुआ था। उनके पिता अकाउंटेंट और मां दर्जी थीं। 2010 में हैती में आए विनाशकारी भूकंप के बाद उनका परिवार भी प्रभावित हुआ। भूकंप में दो लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और ओरेलियन का घर भी तबाह हो गया था। इसके बाद उन्होंने हैती छोड़ दिया और डोमिनिकन रिपब्लिक चले गए। वहां से उन्होंने कनाडा जाने के लिए वीजा के लिए आवेदन किया, लेकिन उनकी पहली अर्जी खारिज हो गई।
एक अधिकारी की मदद से कनाडा पहुंचने का रास्ता खुला
वीजा आवेदन खारिज होने के बाद उनकी स्थिति आसान नहीं थी। रिपोर्ट के मुताबिक, क्यूबेक की एक कांसुलर अधिकारी ने उनकी परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें 30 दिन का समय दिया, ताकि वह यह साबित कर सकें कि कनाडा में उनके परिवार के लोग उनका खर्च उठा सकते हैं। ओरेलियन के अंकल ने जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए। इसके बाद उनके लिए कनाडा जाने का रास्ता खुल गया। बाद में यही प्रवासी अनुभव उनकी साहित्यिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बना। उनकी नई किताब में हैती से निकलने, खतरनाक रास्तों से गुजरने और उत्तरी अमेरिका पहुंचने की कहानी को केंद्र में रखा गया है।
AI और साहित्य के बीच नई बहस
ओरेलियन की किताब को लेकर उठा विवाद साहित्य की दुनिया के सामने एक बड़ा सवाल छोड़ता है। अगर किसी किताब के लेखन में AI की मदद ली गई हो तो क्या उसे पूरी तरह मानवीय रचना माना जा सकता है? और अगर AI डिटेक्शन टूल किसी किताब में AI के इस्तेमाल की संभावना बताता है, तो क्या उसे लेखक के खिलाफ अंतिम सबूत माना जा सकता है? इस मामले में अभी दोनों पक्षों के दावे अलग हैं। लेखक AI के इस्तेमाल से इनकार कर रहे हैं, जबकि गोनकोर्ट अकादमी और जांच से जुड़े लोगों ने किताब में AI की संभावित भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञ खुद भी AI डिटेक्शन टूल्स को 100 फीसदी निर्णायक नहीं मानते। यही वजह है कि ओरेलियन की किताब का विवाद अब सिर्फ एक पुरस्कार से बाहर किए जाने की कहानी नहीं रह गया है। यह सवाल साहित्य, लेखक की मौलिकता और तेजी से विकसित होती AI तकनीक के बीच बदलते रिश्ते को लेकर एक बड़ी बहस में बदल गया है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
