संभावना या अनुमान से दोषी करार नहीं किया जा सकता… रेप केस में 11 साल जेल काटने के बाद हाईकोर्ट ने किया बरी
Uttar Pradesh News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार और मौत के मामले में 11 साल जेल काट रहे निर्मल कुमार को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि केवल संदेह या अनुमान के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। डीएनए टेस्ट न होना जांच की गंभीर चूक है।
Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसला सुनाते हुए 11 साल जेल में रहने वाले निर्मल कुमार को बरी कर दिया। यह मामला नाबालिग किशोरी के साथ बलात्कार और उसकी मौत से जुड़ा था। आरोपी 2010 से जेल में बंद था। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि केवल संदेह या अनुमान के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
फैजाबाद सत्र अदालत का फैसला रद्द
20 सितंबर 2010 को फैजाबाद जिले में पड़ोसी निर्मल कुमार पर नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार का आरोप लगा था। तीन दिन बाद पीड़िता की मौत हो गई। पीड़िता के पिता ने निर्मल कुमार के खिलाफ FIR दर्ज कराई। सत्र अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। निर्मल कुमार ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है।
जांच एजेंसी की चूक पर कोर्ट ने दी टिप्पणी
कोर्ट ने टिप्पणी में कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट में पीड़िता के योनि स्वाब पर मानव वीर्य जरूर पाया गया, लेकिन यह साबित नहीं हुआ कि यह निर्मल कुमार का ही था। डीएनए टेस्ट या वैज्ञानिक मिलान न होने को कोर्ट ने जांच एजेंसी की गंभीर चूक बताया।
संदेह के आधार पर जेल में रखना गलत
हाईकोर्ट ने कहा कि बिना ठोस और वैज्ञानिक सबूत के किसी व्यक्ति को 11 साल तक जेल में रखना न्यायोचित नहीं है। केवल अनुमान और संदेह के आधार पर किसी को दोषी मानना कानून के अनुसार गलत है। इसके आधार पर खंडपीठ ने निर्मल कुमार की रिहाई का आदेश दे दिया।
न्यायिक निर्णय का महत्व
यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया में ठोस सबूतों की अहमियत को दर्शाता है। कोर्ट ने यह संदेश दिया कि कानून केवल संदेह के आधार पर लोगों की आजीवन आज़ादी नहीं छीनेगा और जांच एजेंसियों की गलतियों को गंभीरता से देखा जाएगा।
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