सोशल मीडिया से शुरू हुई कहानी… कैसे संदिग्ध हैंडलर तक पहुंचा अबु बकर, पिता ने खोला राज
Abu Bakar Ansari Case: वाराणसी में ATS की पूछताछ के बाद डॉक्टर आरिफ अंसारी ने बेटे का पक्ष रखा। सोशल मीडिया पर संदिग्ध गतिविधियों के कारण जांच हुई। बेटे को मुंबई बुलाया गया है। पिता ने ब्रेनवॉश की आशंका जताई और कहा कि एजेंसियों पर पूरा भरोसा है।
Varanasi News: वाराणसी के आदमपुर थाना क्षेत्र के पठानी टोला इलाके में एक मामले ने सबका ध्यान खींचा है। यहां रहने वाले डॉक्टर आरिफ अंसारी के घर मंगलवार को उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र ATS की टीम, IB अधिकारियों के साथ पहुंची। टीम ने उनके 19 वर्षीय बेटे अबु बकर अंसारी से संदिग्ध आतंकी कनेक्शन को लेकर करीब 8 घंटे तक पूछताछ की। इस घटना के बाद अब डॉक्टर आरिफ अंसारी पहली बार सामने आए हैं और उन्होंने पूरे मामले पर विस्तार से अपनी बात रखी है।
सोशल मीडिया गतिविधियों से शुरू हुई जांच
डॉक्टर आरिफ अंसारी के अनुसार, उनका बेटा सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय था। इसी दौरान उसने कुछ संदिग्ध हैंडल के पोस्ट लाइक किए और उनसे चैट भी की। इसी आधार पर जांच एजेंसियां उनके घर पहुंचीं। उन्होंने बताया कि पूछताछ केवल उनके बेटे से की गई और परिवार के अन्य किसी सदस्य से कोई सवाल नहीं किया गया।
मोबाइल और लैपटॉप जब्त, मुंबई बुलाया गया
पूछताछ के बाद एजेंसियां अबु बकर के दो मोबाइल फोन और एक लैपटॉप अपने साथ ले गईं। डॉक्टर अंसारी ने बताया कि उनके बेटे को आगे की पूछताछ के लिए 22 अप्रैल को मुंबई बुलाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पूछताछ के दौरान एजेंसियों का व्यवहार पूरी तरह पेशेवर और सहयोगात्मक था।
ब्रेनवॉश और डिप्रेशन की आशंका
डॉक्टर अंसारी ने बताया कि उनका बेटा इस समय NEET परीक्षा की तैयारी कर रहा है और पिछले कुछ महीनों से मानसिक तनाव और डिप्रेशन में था। नवंबर से फरवरी के बीच वह काफी परेशान रहा और दवाइयां भी ले रहा था। इसी दौरान वह सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रिय हो गया, जिससे गलत लोगों के संपर्क में आने की आशंका है। उन्होंने ब्रेनवॉश की संभावना भी जताई और बताया कि 4 मार्च के बाद से उसने सोशल मीडिया छोड़ दिया था।
धार्मिक कट्टरता से जुड़ाव से इनकार
डॉक्टर अंसारी ने साफ कहा कि उनका बेटा किसी भी तरह की धार्मिक कट्टरता से जुड़ा नहीं है। वह नमाज जरूर पढ़ता है, लेकिन उसका नजरिया संतुलित है। उन्होंने बताया कि बच्चों को मदरसे में नहीं पढ़ाया गया और उनकी पढ़ाई शहर के अच्छे कॉन्वेंट स्कूलों में हुई है।
अकेलापन बना बड़ी वजह, एजेंसियों पर भरोसा
डॉक्टर अंसारी ने माना कि उनके बेटे का कोई खास दोस्त नहीं है और वह अपनी बात किसी से साझा नहीं करता। उन्होंने कहा कि कम्युनिकेशन गैप और अकेलापन इस स्थिति की बड़ी वजह बना। उन्होंने जांच एजेंसियों पर पूरा भरोसा जताया और सरकार से अपील की कि बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।
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