76 साल में इस बार सबसे ज्यादा खौल रहा समुद्र, बाढ़-सूखा और बीमारियों की आशंका, 4.5 लाख अतिरिक्त मौतों का अनुमान, सुपर-डुपर अल नीनो से बढ़ा खतरा

प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र का तापमान सामान्य से 3.4°C ज्यादा पहुंचने के बाद दुनिया बेहद ताकतवर अल नीनो के दौर का सामना कर रही है। इसकी तीव्रता को देखते हुए इसे सुपर-डुपर अल नीनो कहा जा रहा है। इसका असर दुनिया के कई हिस्सों में तापमान और बारिश के पैटर्न पर पड़ सकता है। दिसंबर में इसके चरम पर पहुंचने की आशंका है और विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने फरवरी 2027 तक इसके बने रहने की करीब 100% संभावना जताई है। इससे कहीं सूखा तो कहीं भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति बन सकती है।

Oct 8, 2026 - 17:17
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76 साल में इस बार सबसे ज्यादा खौल रहा समुद्र, बाढ़-सूखा और बीमारियों की आशंका, 4.5 लाख अतिरिक्त मौतों का अनुमान, सुपर-डुपर अल नीनो से बढ़ा खतरा

दुनिया इस समय बेहद ताकतवर अल नीनो के दौर से गुजर रही है। प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र का तापमान सामान्य से 3.4°C ज्यादा पहुंच गया है। इसे 1950 के बाद का सबसे ताकतवर अल नीनो बताया जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों ने इसकी तीव्रता को देखते हुए इसे सुपर-डुपर अल नीनो नाम दिया है। इसका असर सिर्फ समुद्र तक सीमित नहीं रहेगा। तापमान बढ़ने, बारिश के पैटर्न में बदलाव और मौसम के चरम हालात से दुनिया के कई हिस्सों में कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ की स्थिति बन सकती है। गर्मी बढ़ने से हीट स्ट्रोक और दूसरी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। शिकागो यूनिवर्सिटी की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के शोधकर्ताओं के अनुमान के मुताबिक, जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच दुनियाभर में करीब 4.51 लाख अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं।

दिसंबर में चरम पर पहुंच सकता है अल नीनो
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक इस साल अल नीनो दिसंबर में अपने चरम पर पहुंच सकता है। इसके बाद भी इसका प्रभाव कई महीनों तक बना रहने की आशंका है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के मुताबिक अक्टूबर से दिसंबर के दौरान इसका असर उत्तरी गोलार्ध में 2027 के वसंत तक देखा जा सकता है। WMO ने फरवरी 2027 तक अल नीनो के बने रहने की करीब 100% संभावना जताई है। इसके कारण दुनिया के कई हिस्सों में सामान्य से ज्यादा तापमान रहने और बारिश के सामान्य पैटर्न में बदलाव की आशंका है।

कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ का खतरा
अल नीनो के दौरान समुद्र के तापमान में बदलाव का असर वायुमंडलीय परिस्थितियों पर भी पड़ता है। इससे कुछ क्षेत्रों में बारिश कम हो सकती है, जबकि दूसरे इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश होने की स्थिति बन सकती है। कम बारिश वाले क्षेत्रों में पानी की कमी और सूखे का खतरा बढ़ सकता है। वहीं भारी बारिश वाले इलाकों में अचानक बाढ़, जलभराव और उससे जुड़ी दूसरी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। ज्यादा तापमान के कारण हीट स्ट्रोक और गर्मी से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ने की आशंका है।

भारत में कम बारिश और सूखे का खतरा
अल नीनो का असर भारत के मौसम पर भी दिखाई दे रहा है। 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से 13% कम बारिश के साथ खत्म हुआ। इसे 2001 के बाद भारत का चौथा सबसे सूखा मानसून बताया गया है। मानसून के दूसरे हिस्से में अल नीनो का प्रभाव भी देखा गया। कम बारिश का सीधा असर खेती, जल भंडार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यदि अल नीनो का प्रभाव आगे भी बना रहता है, तो आने वाले महीनों में तापमान और बारिश के पैटर्न पर नजर रखना जरूरी होगा।

यूरोप में भी दिखा गर्मी का असर
अल नीनो से जुड़े वैश्विक तापमान बढ़ने का असर यूरोप के कई हिस्सों में भी देखने को मिला है। फ्रांस, स्पेन और ब्रिटेन में इस साल कई जगह रिकॉर्ड गर्मी दर्ज की गई। कम बारिश का असर नदियों पर भी पड़ा। डेन्यूब, राइन और टेम्स जैसी यूरोप की प्रमुख नदियों का जलस्तर कई जगह काफी नीचे चला गया। इससे जल परिवहन, कृषि और पानी की उपलब्धता जैसी व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ सकता है।

अल नीनो सिर्फ प्रशांत महासागर में ही क्यों बनता है?
अल नीनो को समझने के लिए प्रशांत महासागर की सामान्य स्थिति को समझना जरूरी है। आमतौर पर प्रशांत महासागर में हवाएं पूर्व से पश्चिम की ओर चलती हैं। ये गर्म पानी को इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरफ धकेलती हैं। इसी दौरान दक्षिण अमेरिका के तट के पास समुद्र की गहराई से ठंडा पानी ऊपर आता रहता है। अल नीनो के दौरान ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। इसके चलते पश्चिमी प्रशांत में जमा गर्म पानी पूर्व की ओर फैलने लगता है। इससे प्रशांत महासागर का मध्य और पूर्वी हिस्सा असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। यही समुद्री तापमान और हवाओं में होने वाला खास बदलाव अल नीनो कहलाता है। दूसरे महासागरों में भी तापमान में उतार-चढ़ाव होता है, लेकिन प्रशांत महासागर में हवाओं, समुद्री धाराओं और गर्म-ठंडे पानी के इस खास संयोजन के कारण इसे अल नीनो की घटना माना जाता है।

दुनिया के मौसम पर पड़ सकता है लंबा असर
अल नीनो का प्रभाव किसी एक देश या महाद्वीप तक सीमित नहीं रहता। समुद्र के तापमान में बड़ा बदलाव होने पर वायुमंडलीय परिसंचरण प्रभावित होता है, जिससे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तापमान और बारिश के पैटर्न बदल सकते हैं। मौजूदा अल नीनो की तीव्रता को देखते हुए आने वाले महीनों में गर्मी, सूखा, भारी बारिश और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों पर नजर रखनी होगी। वैज्ञानिकों के अनुमान में अतिरिक्त मौतों का आंकड़ा भी इसी बढ़ते मौसम और स्वास्थ्य जोखिम की गंभीरता को दर्शाता है।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content