नोबेल पुरुस्कार को लेकर ट्रंप की बेचैनी फिर सामने आई, 8 युद्ध रुकवाने का किया दावा, बोले- पुरस्कार नहीं मिला तो कमेटी पर उठेंगे सवाल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार पर एक बार फिर अपनी दावेदारी जताई है। पुरस्कार की घोषणा 9 अक्टूबर को होनी है और इससे एक दिन पहले ट्रम्प ने कहा कि अगर उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया गया तो इससे नोबेल समिति की बदनामी होगी। ट्रम्प ने दावा किया कि उन्होंने 8 युद्ध रुकवाए और दुनिया को तबाह होने से बचाया। उन्होंने 2009 में बराक ओबामा को मिले नोबेल शांति पुरस्कार पर भी सवाल उठाया और अपनी तुलना पूर्व राष्ट्रपति से की। ट्रम्प पिछले कई वर्षों से नोबेल शांति पुरस्कार का जिक्र करते रहे हैं और 2018 से अलग-अलग मौकों पर अपनी दावेदारी सामने रखते रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार पर अपनी दावेदारी जताई है। 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा 9 अक्टूबर को होनी है। इससे एक दिन पहले ट्रम्प ने कहा कि अगर उन्हें यह पुरस्कार नहीं दिया गया तो नोबेल समिति की ही बदनामी होगी। ट्रम्प ने अपनी दावेदारी के समर्थन में कहा कि उन्होंने 8 युद्ध रुकवाए और दुनिया को तबाह होने से बचाया। उन्होंने इसे अपनी तारीफ नहीं बल्कि तथ्य बताया। नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर ट्रम्प की यह मांग नई नहीं है। वह 2018 से अलग-अलग मौकों पर इस पुरस्कार का जिक्र करते रहे हैं।
ट्रम्प बोले- पुरस्कार नहीं मिला तो कमेटी की होगी बदनामी
ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने 8 युद्धों को रुकवाने में भूमिका निभाई और दुनिया को तबाह होने से बचाया। उन्होंने कहा कि शायद किसी भी राष्ट्रपति ने इतने युद्धों को सुलझाने का काम नहीं किया। उन्होंने अपनी दावेदारी को लेकर कहा कि वह अपनी तारीफ नहीं कर रहे हैं, बल्कि सिर्फ तथ्य बता रहे हैं। ट्रम्प का कहना है कि उनके काम को देखते हुए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए उनकी दावेदारी मजबूत है।
ओबामा को मिले नोबेल पर भी उठाया सवाल
ट्रम्प ने अपनी दावेदारी के साथ पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को 2009 में मिले नोबेल शांति पुरस्कार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ओबामा को सिर्फ 8 महीने में पुरस्कार मिल गया, जबकि उनके मुताबिक उन्होंने ऐसा कोई काम नहीं किया था। हालांकि, नॉर्वे की नोबेल समिति ने ओबामा को यह पुरस्कार दूसरे देशों के साथ बातचीत और कूटनीति को मजबूत करने तथा परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया के प्रयासों के लिए दिया था। ओबामा को उनके राष्ट्रपति कार्यकाल की शुरुआत में ही पुरस्कार दिए जाने का फैसला उस समय भी चर्चा का विषय बना था।
2018 से नोबेल पुरस्कार पर दावा कर रहे हैं ट्रम्प
नोबेल शांति पुरस्कार का जिक्र ट्रम्प कई साल से करते रहे हैं। अक्टूबर 2018 में उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा था कि शायद उन्हें यह पुरस्कार कभी नहीं मिलेगा, भले ही वह कोरिया और सीरिया में शांति कायम करने की कोशिश कर रहे हों। फरवरी 2019 में ट्रम्प ने अपनी दावेदारी को और स्पष्ट किया। उन्होंने कहा था कि जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि वह कभी यह पुरस्कार जीत पाएंगे। इसी साल एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर ट्रम्प ने कहा था कि अगर पुरस्कार निष्पक्ष तरीके से दिया जाए तो उन्हें लगता है कि उन्हें कई चीजों के लिए नोबेल पुरस्कार मिल सकता है। 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी उन्होंने ओबामा से अपनी तुलना करते हुए कहा था कि अगर ओबामा को यह पुरस्कार मिल सकता है तो उन्हें भी मिलना चाहिए।
मारिया मचाडो ने ट्रम्प को दिया था अपना नोबेल मेडल
ट्रम्प की नोबेल दावेदारी का एक दिलचस्प घटनाक्रम वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो से भी जुड़ा है। मचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए उनके काम के लिए दिया गया था। बाद में मचाडो ने व्हाइट हाउस में ट्रम्प से मुलाकात की और उन्हें अपना नोबेल मेडल सौंप दिया। हालांकि, इससे नोबेल शांति पुरस्कार ट्रम्प के नाम नहीं हुआ। पुरस्कार की विजेता मचाडो ही रहीं। नोबेल समिति के नियमों के मुताबिक पुरस्कार को किसी दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर या साझा नहीं किया जा सकता। इसलिए मचाडो की ओर से मेडल दिए जाने के बावजूद ट्रम्प नोबेल शांति पुरस्कार के विजेता नहीं बने।
ट्रम्प के अलावा पोप लियो समेत कई नाम चर्चा में
2026 के नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर ट्रम्प के अलावा पोप लियो, इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट, इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस और फिलिस्तीनी क्षेत्रों के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष रैपोर्टियर फ्रांसेस्का अल्बानीज के नाम भी चर्चा में हैं। पोप लियो युद्ध और हिंसा के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहे हैं। वहीं ICC और ICJ अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध, मानवाधिकार और देशों के बीच विवादों से जुड़े मामलों पर काम करते हैं। फ्रांसेस्का अल्बानीज गाजा और फिलिस्तीनी क्षेत्रों में मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाती रही हैं। हालांकि, इनमें से किसी को नोबेल समिति का आधिकारिक फाइनलिस्ट नहीं कहा जा सकता। समिति नामांकन की पूरी सूची 50 साल तक सार्वजनिक नहीं करती। इसलिए पुरस्कार की घोषणा से पहले सामने आने वाले नाम केवल संभावित दावेदारों या चर्चाओं तक सीमित हैं।
9 अक्टूबर को होगी नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा
2026 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा 9 अक्टूबर को होनी है। इससे पहले ट्रम्प ने एक बार फिर अपने कामों का हवाला देते हुए पुरस्कार पर दावा किया है। ट्रम्प का कहना है कि 8 युद्ध रुकवाने में उनकी भूमिका और दुनिया को बड़े संघर्षों से बचाने के प्रयास उन्हें पुरस्कार का मजबूत दावेदार बनाते हैं। अब निगाहें नोबेल समिति की घोषणा पर हैं कि इस साल शांति पुरस्कार किसके नाम जाता है।
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