पैरा एशियन गेम्स सिलेक्शन में भ्रष्टाचार का आरोप, पैरा शूटर्स बोले- मेडल पर मिलने वाले इनाम का 20 फीसदी कमीशन मांगा, इनकार करने पर टीम से बाहर किया
पैरा एशियन गेम्स के लिए भारतीय दल के चयन को लेकर विवाद बढ़ गया है। एशिया रैंकिंग में नंबर-1 और नंबर-3 पिस्टल शूटर्स आकाश और संदीप कुमार ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। खिलाड़ियों का दावा है कि उनसे मेडल जीतने पर सरकार से मिलने वाली इनामी राशि का 20% कमीशन मांगा गया और कथित मांग स्वीकार नहीं करने के बाद चयन में उनके साथ भेदभाव हुआ। शूटर्स ने क्वालिफाइंग स्कोर में हेरफेर, चयन समिति में बदलाव और इंटरनेशनल कोटा के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए हैं। PCI अध्यक्ष देवेंद्र झाझरिया ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष बताया है। वहीं, खेल मंत्रालय ने खिलाड़ियों की शिकायतों पर गौर करने की बात कही है, लेकिन मौजूदा टीम में बदलाव से इनकार किया है।
पैरा एशियन गेम्स के लिए भारतीय दल के चयन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। एशिया रैंकिंग में नंबर-1 और नंबर-3 पिस्टल शूटर्स आकाश और संदीप कुमार ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। खिलाड़ियों का दावा है कि उनसे कहा गया कि अगर प्रतियोगिता में मेडल जीतते हैं और सरकार की ओर से इनाम मिलता है, तो उसका 20% कमीशन देना होगा। खिलाड़ियों ने इस कथित मांग से इनकार करने के बाद चयन प्रक्रिया में उनके साथ भेदभाव होने का आरोप लगाया है। शूटर्स ने पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया और शूटिंग टेक्निकल कमेटी से जुड़े अधिकारियों पर कमीशन मांगने का आरोप लगाने के साथ क्वालिफाइंग स्कोर में हेरफेर और चयन समिति में बदलाव के भी दावे किए हैं। उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण के महानिदेशक से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। वहीं, PCI अध्यक्ष देवेंद्र झाझरिया ने आरोपों को खारिज करते हुए चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष बताया है। खेल मंत्रालय ने भी खिलाड़ियों की शिकायतों पर गौर करने की बात कही है।
मेडल जीतने पर इनाम से हिस्सा लेने का आरोप
पैरा शूटर्स आकाश और संदीप कुमार का आरोप है कि अधिकारियों की ओर से उनसे 20% कमीशन की मांग की गई। खिलाड़ियों के मुताबिक उनसे कहा गया कि अगर पैरा एशियन गेम्स में मेडल मिलता है और सरकार की ओर से पुरस्कार राशि दी जाती है, तो उसका एक हिस्सा अधिकारियों को देना होगा। खिलाड़ियों ने दावा किया कि इस कथित मांग में पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया के अधिकारी और शूटिंग टेक्निकल कमेटी से जुड़े सदस्य शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मांग स्वीकार नहीं करने के बाद चयन प्रक्रिया में उनके साथ भेदभाव किया गया।
क्वालिफाइंग स्कोर और चयन समिति में बदलाव पर भी सवाल
शूटर्स ने सिर्फ कमीशन की कथित मांग तक आरोप सीमित नहीं रखे। उन्होंने क्वालिफाइंग स्कोर में हेरफेर किए जाने और चयन समिति में बदलाव का भी दावा किया है। खिलाड़ियों ने कहा कि चयन प्रक्रिया में रैंकिंग और प्रदर्शन के बजाय दूसरे आधारों को महत्व दिया गया। इसी को लेकर उन्होंने SAI महानिदेशक से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
15 इंटरनेशनल कोटा में से 2 का इस्तेमाल नहीं हुआ
खिलाड़ियों ने भारत को मिले इंटरनेशनल कोटा को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि भारत को मिले 15 अंतरराष्ट्रीय कोटा स्थानों में से दो का इस्तेमाल नहीं किया गया। आरोप है कि रैंकिंग में अगले स्थान पर रहने वाले खिलाड़ियों ने कथित वित्तीय मांगों को मानने से इनकार किया, जिसके बाद इन कोटा स्थानों को सरेंडर कर दिया गया। खिलाड़ियों ने वाइल्ड कार्ड और कोटा के आवंटन में भी रैंकिंग तथा प्रदर्शन के बजाय वित्तीय आधार पर फैसला किए जाने का आरोप लगाया है।
एशिया नंबर-3 शूटर संदीप के चयन पर सवाल
P4 50 मीटर फ्री पिस्टल SH1 में एशिया रैंकिंग में तीसरे नंबर पर मौजूद संदीप कुमार ने अपने चयन नहीं होने पर सवाल उठाया है। उनका दावा है कि उन्हें और आकाश को पीछे छोड़कर एशिया रैंकिंग में 14वें नंबर के रुद्राक्ष खंडेलवाल को टीम में जगह दी गई। संदीप ने इसे चयन नियमों का उल्लंघन और अपने साथ भेदभाव बताया है। उनका कहना है कि रैंकिंग और प्रदर्शन को देखते हुए चयन प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
PCI अध्यक्ष बोले- चयन 100% निष्पक्ष, सभी आरोप खारिज
पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और दो बार के पैरालंपिक जैवलिन थ्रो गोल्ड मेडलिस्ट देवेंद्र झाझरिया ने खिलाड़ियों के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि टीम का चयन तय मानकों के आधार पर हुआ है और किसी खिलाड़ी के साथ भेदभाव नहीं किया गया। झाझरिया ने संदीप कुमार के उस आरोप को भी गलत बताया, जिसमें उन्होंने किसी कोच से जुड़े खिलाड़ी के पक्ष में उन्हें टीम से बाहर किए जाने की बात कही थी।
खेल मंत्रालय बोला- शिकायतों पर गौर होगा, अभी टीम में बदलाव नहीं
खेल मंत्रालय के एक सूत्र के मुताबिक, पैरा शूटर्स की वास्तविक शिकायतों पर गौर किया जाएगा। हालांकि, पैरा एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम का चयन अंतिम रूप से हो चुका है और इस स्तर पर टीम में बदलाव नहीं किया जा सकता। खिलाड़ियों ने कहा है कि अगर उनकी शिकायतों का समाधान नहीं हुआ तो वे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट का रुख कर सकते हैं। उन्होंने कोर्ट की निगरानी में मामले की जांच की मांग करने की भी बात कही है।
पैरा साइक्लिंग के चयन पर भी विवाद
पैरा शूटिंग के अलावा पैरा साइक्लिंग में भी भारतीय दल के चयन को लेकर विवाद सामने आया है। नेशनल फेडरेशन ने एशियन पैरा गेम्स के लिए 7 खिलाड़ियों के नाम भेजे थे, लेकिन खेल मंत्रालय ने इनमें से सिर्फ अरशद शेख के नाम को मंजूरी दी। बाहर किए गए खिलाड़ियों प्रशांत अरकल, पवन कुमार कोम्मोजी, समीर, वासानी बाबूभाई, श्रुति विनायक नकाडे और लीशा दास के गुरुवार को SAI मुख्यालय पर प्रदर्शन करने की तैयारी की खबर है।
प्रशांत बोले- लेह में तैयारी कर रहे थे, नाम हटने की जानकारी नहीं थी
रोड साइक्लिस्ट प्रशांत अरकल ने कहा कि वह एशियन पैरा गेम्स की तैयारी के लिए लेह में थे और उन्हें जानकारी नहीं थी कि उनका नाम अंतिम सूची से हटा दिया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि क्वालिफिकेशन हासिल करने के लिए खिलाड़ियों ने अपनी जेब से पैसे खर्च किए हैं। ऐसे में अंतिम सूची से नाम हटाए जाने को लेकर खिलाड़ियों में नाराजगी है।
SAI का जवाब- कोटा मिलना चयन की गारंटी नहीं
SAI के मुताबिक, अरशद शेख ही तय चयन मानकों को पूरा करते हैं। उन्होंने इस साल एशियन पैरा रोड चैंपियनशिप में 9 खिलाड़ियों के बीच चौथा स्थान हासिल किया था। ट्रैक चैंपियनशिप के 1 किलोमीटर टाइम ट्रायल में वे 8 खिलाड़ियों में पांचवें स्थान पर रहे थे। SAI के एक अधिकारी के मुताबिक, किसी प्रतियोगिता में कोटा हासिल करना अपने आप टीम में चयन की गारंटी नहीं देता। चयन के लिए खिलाड़ियों को निर्धारित प्रदर्शन मानकों को पूरा करना होता है।
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