भारत में स्टारलिंक की एंट्री रोक रहे बड़े बिजनेसमैन, सोशल मीडिया पर  एलन मस्क ने किया दावा, अब सरकार ने आरोपों पर दी सफाई 

एलन मस्क के भारत में स्टारलिंक की एंट्री को लेकर लगाए गए आरोपों पर केंद्र सरकार ने सफाई दी है। मस्क ने आरोप लगाया था कि कुछ भारतीय बिजनेसमैन अपने एकाधिकार को बनाए रखने के लिए स्टारलिंक को भारत में आने से रोक रहे हैं। सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विसेज के लिए बनाए गए नियम सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू होते हैं। सरकार के मुताबिक स्टारलिंक समेत संबंधित कंपनियां फिलहाल सुरक्षा समीक्षा की प्रक्रिया में हैं और जांच पूरी होने के बाद स्पेक्ट्रम आवंटन की अगली प्रक्रिया में आगे बढ़ सकती हैं। इस बीच स्टारलिंक ने भारत में 20 गेटवे साइट्स तैयार की हैं और रिलायंस जियो तथा भारती एयरटेल के साथ शुरुआती समझौते किए हैं।

Oct 8, 2026 - 16:41
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भारत में स्टारलिंक की एंट्री रोक रहे बड़े बिजनेसमैन, सोशल मीडिया पर  एलन मस्क ने किया दावा, अब सरकार ने आरोपों पर दी सफाई 

एलन मस्क के भारत में स्टारलिंक को लेकर लगाए गए आरोपों पर केंद्र सरकार ने सफाई दी है। सरकार ने उन दावों को खारिज किया है, जिनमें मस्क ने कहा था कि कुछ भारतीय बिजनेसमैन अपने एकाधिकार को बनाए रखने के लिए स्टारलिंक को भारत में आने से रोक रहे हैं। सरकार के मुताबिक सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विसेज के लिए बनाए गए नियम सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू होते हैं और इनमें किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि स्टारलिंक समेत सैटेलाइट इंटरनेट से जुड़ी कंपनियां फिलहाल एक जैसी रेगुलेटरी प्रक्रिया से गुजर रही हैं। ऐसे में किसी एक कंपनी को रोकने या किसी दूसरी कंपनी को फायदा पहुंचाने का सवाल नहीं है।

मस्क ने भारतीय बिजनेसमैनों पर लगाया था स्टारलिंक रोकने का आरोप
एलन मस्क ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट कर भारत के कुछ बड़े बिजनेसमैनों पर स्टारलिंक की एंट्री रोकने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया कि कुछ कारोबारी भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा नहीं आने देना चाहते, ताकि उनका एकाधिकार बना रहे। मस्क ने किसी कंपनी या उद्योगपति का नाम नहीं लिया। हालांकि, उनके बयान के बाद भारत के टेलीकॉम सेक्टर में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई। मस्क ने यह भी कहा कि स्टारलिंक को रोकना भारत के लोगों के खिलाफ अपराध है।

सरकार बोली- सभी कंपनियों के लिए नियम एक जैसे
केंद्र सरकार ने मस्क के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विसेज के लिए तय नियम सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू होते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि नियमों का इस्तेमाल किसी कंपनी के साथ भेदभाव करने के लिए नहीं किया जा रहा है। सरकार के मुताबिक स्टारलिंक समेत इस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के लिए सुरक्षा और नियामकीय प्रक्रिया तय है। फिलहाल तीनों कंपनियों की सुरक्षा समीक्षा चल रही है। किसी कंपनी की सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद वह स्पेक्ट्रम आवंटन की अगली प्रक्रिया के लिए आगे बढ़ सकती है।

एक ही रेगुलेटरी चरण में तीनों कंपनियां
सरकार की सफाई के मुताबिक फिलहाल स्टारलिंक समेत तीनों सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनियां रेगुलेटरी प्रक्रिया के एक ही चरण में हैं। सुरक्षा समीक्षा पूरी होने के बाद कंपनियां स्पेक्ट्रम आवंटन की मांग कर सकेंगी। इससे सरकार का तर्क है कि स्टारलिंक को अलग से रोके जाने या किसी दूसरी कंपनी को नियमों में विशेष छूट दिए जाने का आरोप सही नहीं है। सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के लिए सुरक्षा, डेटा और नेटवर्क से जुड़ी शर्तों को पूरा करना सभी कंपनियों के लिए जरूरी है।

स्टारलिंक ने देशभर में 20 गेटवे साइट्स बनाई
भारत में अपनी संभावित सेवा शुरू करने की तैयारी के तहत स्टारलिंक ने देशभर में 20 गेटवे साइट्स बनाई हैं। ये जमीन पर बने ऐसे स्टेशन हैं, जो अंतरिक्ष में मौजूद स्टारलिंक सैटेलाइट्स को जमीन के मुख्य इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ते हैं। इन गेटवे साइट्स पर सैकड़ों एंटीना लगाए गए हैं। इनके जरिए सैटेलाइट से मिलने वाले इंटरनेट सिग्नल को जमीन पर मौजूद नेटवर्क तक पहुंचाया जाता है और यूजर्स तक इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था तैयार होती है।

जियो और एयरटेल के साथ डील, तीन राज्यों में भी समझौता
भारत में नेटवर्क और सेवाओं का विस्तार करने के लिए स्टारलिंक ने रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के साथ शुरुआती सहमति पत्र यानी MoU साइन किए हैं। इन समझौतों के जरिए कंपनी भारत में अपने सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। स्टारलिंक ने महाराष्ट्र, गुजरात और मेघालय सरकारों के साथ भी लेटर ऑफ इंटेंट साइन किए हैं। इन समझौतों का मकसद संबंधित राज्यों में संभावित सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर सहयोग और तैयारी को आगे बढ़ाना है।

5 सवालों में समझिए स्टारलिंक से जुड़ी जरूरी बातें

सवाल 1: स्टारलिंक क्या है और यह खास क्यों है?
स्टारलिंक स्पेसएक्स का सैटेलाइट इंटरनेट प्रोजेक्ट है। इसमें पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद सैटेलाइट्स के नेटवर्क के जरिए इंटरनेट सेवा दी जाती है। इसकी खासियत यह है कि यह उन इलाकों में भी इंटरनेट पहुंचाने में मदद कर सकता है, जहां फाइबर या सामान्य मोबाइल नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है। गांवों, पहाड़ी इलाकों और दूर-दराज के क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता ज्यादा हो सकती है। कम दूरी वाली कक्षा में सैटेलाइट्स होने की वजह से सामान्य जियोस्टेशनरी सैटेलाइट इंटरनेट की तुलना में कम लेटेंसी हासिल करना संभव होता है।

सवाल 2: स्टारलिंक को भारत में लाइसेंस मिलने में इतना वक्त क्यों लगा?
स्टारलिंक 2022 से भारत में सेवा शुरू करने की कोशिश कर रही थी। प्रक्रिया में सुरक्षा और नियामकीय शर्तें अहम मुद्दा रही हैं। सरकार ने डेटा सिक्योरिटी और जरूरत पड़ने पर कम्युनिकेशन इंटरसेप्शन जैसी शर्तों पर जोर दिया था। कंपनी की ओर से इन शर्तों को पूरा करने की प्रक्रिया के बाद अब भारत में उसकी सेवा शुरू होने की दिशा में आगे की रेगुलेटरी प्रक्रिया चल रही है।

सवाल 3: आम लोगों को स्टारलिंक से क्या फायदा हो सकता है?
स्टारलिंक की सबसे बड़ी उपयोगिता उन इलाकों में हो सकती है जहां अभी तेज इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित है। गांवों और दूर-दराज के क्षेत्रों में बेहतर इंटरनेट मिलने से ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन और डिजिटल बिजनेस जैसी सेवाओं को फायदा मिल सकता है। इसके अलावा सैटेलाइट इंटरनेट के आने से भारत के ब्रॉडबैंड और टेलीकॉम बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। इससे आने वाले समय में ग्राहकों के लिए इंटरनेट सेवाओं और प्लान्स के विकल्प भी बढ़ सकते हैं।

सवाल 4: भारत स्टारलिंक और एलन मस्क के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
भारत दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट बाजारों में शामिल है। बड़ी आबादी और तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के कारण भारत सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों के लिए बड़ा बाजार है। स्टारलिंक के लिए भारत में लाइसेंस मिलना इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे कंपनी को एशिया के एक बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार में अपनी सेवाओं का विस्तार करने का मौका मिलेगा।

सवाल 5: सैटेलाइट से इंटरनेट यूजर तक कैसे पहुंचेगा?
स्टारलिंक का नेटवर्क अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स और जमीन पर लगे गेटवे स्टेशनों के जरिए काम करता है। यूजर के घर या निर्धारित स्थान पर लगी डिश सैटेलाइट से सिग्नल प्राप्त करती है। इसके बाद यह कनेक्शन राउटर के जरिए डिवाइस तक इंटरनेट पहुंचाता है। स्टारलिंक किट में डिश, वाई-फाई राउटर, पावर सप्लाई केबल और माउंटिंग ट्राइपॉड शामिल होते हैं। बेहतर कनेक्शन के लिए डिश को खुले आसमान की ओर ऐसी जगह रखना जरूरी होता है जहां सैटेलाइट सिग्नल में रुकावट कम हो। कंपनी का ऐप iOS और Android दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, जिसका इस्तेमाल सेटअप और कनेक्शन की निगरानी के लिए किया जा सकता है।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content