लखनऊ के SGPGI में रोबोटिक एंडोक्राइन सर्जरी की बड़ी उपलब्धि, 200 सफल ऑपरेशन पूरे
एसजीपीजीआई लखनऊ ने 200 रोबोटिक एंडोक्राइन सर्जरी का मील का पत्थर हासिल किया। एक जटिल थायरॉइड मामले का सफलतापूर्वक इलाज किया गया।
लखनऊ स्थित SGPGI में एंडोक्राइन सर्जरी के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की गई है। यहां के एंडोक्राइन सर्जरी विभाग के प्रोफेसर Dr. Gyan Chand ने 200 रोबोटिक एंडोक्राइन सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी कर ली हैं। यह उपलब्धि आधुनिक और न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। हाल ही में उनकी टीम ने एक जटिल सर्जरी को भी सफलतापूर्वक अंजाम दिया, जिससे इस तकनीक की सफलता और भरोसे को और मजबूती मिली है।
जटिल केस को किया सफलतापूर्वक ऑपरेट
इस उपलब्धि के तहत हाल ही में हरदोई के एक 25 वर्षीय युवक का ऑपरेशन किया गया, जो पेशे से जूनियर इंजीनियर है। मरीज को पिछले 18 वर्षों से गर्दन के सामने सूजन की समस्या थी, जो धीरे-धीरे बढ़ रही थी। वह हाइपोथायरॉइडिज्म से भी पीड़ित था और रोजाना थायरोनॉर्म 62.5 माइक्रोग्राम दवा ले रहा था।
जांच में सामने आई गंभीर स्थिति
डॉक्टरों की जांच में पाया गया कि मरीज की थायरॉयड ग्रंथि काफी बढ़ चुकी थी और उसकी निचली सीमा छूने पर महसूस नहीं हो रही थी। इससे रेट्रोस्टर्नल विस्तार की आशंका जताई गई। अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन में बड़ा मल्टीनोड्यूलर गॉइटर, रेट्रोस्टर्नल विस्तार और लिम्फोसाइटिक थायरॉयडाइटिस की पुष्टि हुई। FNAC रिपोर्ट भी बेथेस्डा II श्रेणी में आई।
रोबोटिक सर्जरी से मिला बेहतर परिणाम
इतनी जटिल स्थिति में आमतौर पर सर्जरी चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन डॉक्टरों ने रोबोटिक टोटल थायरॉयडेक्टॉमी (BABA एप्रोच) के जरिए ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के दौरान थायरॉयड के दोनों लोब काफी बड़े पाए गए और दाहिना हिस्सा मेडियास्टिनम तक फैला हुआ था। इसके बावजूद महत्वपूर्ण नसों और पैराथायरॉयड ग्रंथियों को सुरक्षित रखा गया। निकाले गए थायरॉयड का कुल वजन 149 ग्राम था।
ऑपरेशन के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ
सर्जरी के बाद मरीज की हालत पूरी तरह स्थिर रही। उसकी आवाज सामान्य रही और शरीर में कैल्शियम का स्तर भी सामान्य पाया गया। यह इस बात का संकेत है कि सर्जरी पूरी तरह सफल रही।
नई तकनीक से बढ़ रही उम्मीदें
इस उपलब्धि से यह साफ हो गया है कि रोबोटिक सर्जरी तकनीक जटिल मामलों में भी सुरक्षित और प्रभावी साबित हो रही है। इससे भविष्य में मरीजों को कम दर्द, जल्दी रिकवरी और बेहतर इलाज मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
(रिपोर्टः संदीप शुक्ला, लखनऊ)
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