पापा, मेरा चेहरा मत देखना... ट्रेनी वकील प्रियांशु के आखिरी 1000 शब्द, सुसाइड नोट में बयां की पिता के टॉर्चर की कहानी
Kanpur Advocate Priyanshu Srivastava: कानपुर में 23 वर्षीय प्रशिक्षु वकील ने सुसाइड नोट लिखकर आत्महत्या कर ली। नोट में उसने बचपन से मानसिक दबाव और पिता द्वारा अपमान का आरोप लगाया। युवक ने अपने दर्दनाक अनुभव साझा किए और माता-पिता से बच्चों पर सीमित दबाव रखने की अपील की।
Kanpur News: उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक बेहद दुखद और चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां 23 वर्षीय प्रशिक्षु अधिवक्ता प्रियांशु श्रीवास्तव ने सुसाइड नोट लिखकर आत्महत्या कर ली। यह घटना 23 अप्रैल दोपहर करीब 12:05 बजे की बताई जा रही है। युवक ने अपने सुसाइड नोट में साफ लिखा कि वह पूरी होश-ओ-हवास में यह कदम उठा रहा है। उसने अपने जीवन के कई दर्दनाक अनुभव साझा किए, जिसमें बचपन से लेकर अब तक मानसिक उत्पीड़न और पारिवारिक दबाव का जिक्र है। इस घटना ने न केवल परिवार बल्कि पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
सुसाइड नोट में लिखी पूरी कहानी
प्रियांशु श्रीवास्तव ने अपने सुसाइड नोट में खुद को कानपुर के बर्रा-8 स्थित वरुण विहार का निवासी बताया। उसने लिखा कि उसने 2025 में लॉ की पढ़ाई पूरी की थी और वह एक प्रशिक्षु अधिवक्ता था। हालांकि, समय की कमी के कारण वह उत्तर प्रदेश बार काउंसिल, प्रयागराज से पंजीकरण नहीं करा सका था।
बचपन से झेल रहा था मानसिक दबाव
युवक ने अपने बचपन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि करीब 5-6 साल की उम्र से ही उसे मानसिक यातनाएं झेलनी पड़ीं। एक घटना का जिक्र करते हुए उसने लिखा कि आम का जूस पीने पर उसे निर्वस्त्र कर घर से बाहर भगा दिया गया था। उसने कहा कि सख्ती जरूरी है, लेकिन इतनी नहीं कि बच्चे घुटन महसूस करने लगें।
पढ़ाई और जीवन में लगातार दबाव
सुसाइड नोट में उसने लिखा कि पढ़ाई के नाम पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाला गया। हर समय शक की नजर से देखना और हर दो मिनट का हिसाब लेना भी मानसिक टॉर्चर था। उसने बताया कि 9वीं कक्षा में उसे अपनी पसंद के खिलाफ विषय चुनने के लिए मजबूर किया गया, जिससे उसके नंबर भी प्रभावित हुए।
अपमान और तानों से टूट गया युवक
प्रियांशु ने लिखा कि बचपन में छोटी गलती के लिए आज तक उसे ताने दिए जाते रहे। उसने ट्यूशन पढ़ाकर और ऑनलाइन काम करके अपने खर्च खुद उठाए, घर का खर्च भी दिया, फिर भी उसे अपमानित किया जाता रहा। उसने आरोप लगाया कि पिता उसे अपशब्द कहकर सबके सामने बेइज्जत करते थे।
आखिरी शब्दों में झलकता दर्द
युवक ने लिखा कि वह अपने पिता के साथ कचहरी के काम में सहयोग करता था, लेकिन हर समय उसे धमकियां और अपमान मिलता था। उसने लिखा “मैं हार गया, पापा जीत गए।” उसने यह भी कहा कि उसकी लाश को उसके पिता छू भी न पाएं।
पुलिस जांच और समाज के लिए संदेश
यह घटना समाज के लिए एक बड़ा संदेश छोड़ गई है। युवक ने सभी माता-पिता से अपील की कि बच्चों पर उतना ही दबाव डालें जितना वे सह सकें। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और पूरे घटनाक्रम को समझने की कोशिश कर रही है।
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