गोल्ड लोन में बढ़ा डिफॉल्ट का खतरा, ज्यादा कर्ज लेने वालों पर बढ़ा जोखिम
भारत में स्वर्ण ऋण बाजार में उच्च मूल्य वाले ऋणकर्ताओं के बीच डिफ़ॉल्ट दरें बढ़ रही हैं। रिपोर्ट में बढ़ते जोखिम, ऋण वृद्धि और सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रभाव पर प्रकाश डाला गया है।
भारत के गोल्ड लोन बाजार में एक नई चिंता सामने आई है। ट्रांसयूनियन CIBIL की रिपोर्ट के अनुसार, बड़े और कई लोन लेने वाले उधारकर्ताओं के बीच डिफॉल्ट रेट तेजी से बढ़ रहा है। यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि कई लोग अपनी क्षमता से ज्यादा कर्ज ले रहे हैं। इससे क्रेडिट रिस्क बढ़ता जा रहा है। हालांकि, लोन देने वाले संस्थानों को भरोसा होता है कि जरूरत पड़ने पर वे गिरवी रखे सोने की नीलामी कर अपनी रकम वसूल कर लेंगे, लेकिन फिर भी जोखिम बढ़ता जा रहा है।
ज्यादा लोन लेने वालों में डिफॉल्ट ज्यादा
रिपोर्ट के मुताबिक, जिन उधारकर्ताओं पर 2.5 लाख रुपये से ज्यादा का कर्ज है, उनमें डिफॉल्ट रेट 1.5 फीसदी दर्ज किया गया, जो कम कर्ज वालों की तुलना में लगभग 2.2 गुना ज्यादा है। वहीं, जिन लोगों ने पांच से ज्यादा लोन ले रखे हैं, उनमें यह दर 1.9 फीसदी तक पहुंच गई है। 2025 की पहली छमाही के आंकड़ों के आधार पर औसत डिफॉल्ट रेट 1.1 फीसदी रहा। लगभग 48 फीसदी ऐसे उधारकर्ता हैं, जिन पर औसतन 2.5 लाख रुपये से ज्यादा का गोल्ड लोन बकाया है। इनमें से 46 फीसदी लोगों के पास पांच से ज्यादा लोन हैं।
गोल्ड लोन बाजार में तेजी और कारण
भारत में गोल्ड लोन बाजार तेजी से बढ़ रहा है और यह हाउसिंग लोन के बाद दूसरा सबसे बड़ा रिटेल लोन बाजार बन चुका है। दिसंबर के अंत तक यह कुल रिटेल क्रेडिट का 11 फीसदी हिस्सा बन गया, जो मार्च 2022 में 5.9 फीसदी था। Crif High Mark के अनुसार, कुल गोल्ड लोन बाजार 16.2 लाख करोड़ रुपये का हो गया है, जबकि हाउसिंग लोन 43 लाख करोड़ रुपये के हैं। इस बढ़ोतरी के पीछे छोटे कारोबारियों की मांग और सोने की कीमतों में आई तेजी को मुख्य कारण माना जा रहा है।
कीमतों में गिरावट से बढ़ी सतर्कता
हालांकि, सोने की कीमतों में गिरावट के बाद लेंडर्स सतर्क हो गए हैं। फरवरी में ईरान युद्ध के बाद मार्च में सोने की कीमतों में करीब 15 फीसदी गिरावट आई। इसके बावजूद लेंडर्स के पास सुरक्षा के लिए पर्याप्त मार्जिन है, क्योंकि वे 75 फीसदी के बजाय 60-65 फीसदी लोन-टू-वैल्यू रेशियो पर लोन देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अब सिर्फ सोने की कीमत नहीं, बल्कि उधारकर्ता की कुल कर्ज स्थिति और भुगतान क्षमता को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
बढ़ता कर्ज और भविष्य की चुनौती
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जिन लोगों का पहले से खराब क्रेडिट इतिहास रहा है, उनके लिए गोल्ड लोन आखिरी विकल्प बनता जा रहा है। ऐसे लोगों के क्रेडिट सिस्टम से बाहर होने की संभावना 1.6 गुना ज्यादा होती है। अप्रैल 2022 से अब तक गोल्ड लोन की वैल्यू 5.1 गुना बढ़ गई है, जबकि औसत लोन राशि 90,000 रुपये से बढ़कर 1.96 लाख रुपये हो गई है। यह साफ संकेत है कि गोल्ड लोन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी बढ़ता जा रहा है।
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