युद्ध का असर अब बेडरूम तक… कंडोम के दाम बढ़ने की चेतावनी, जानिए कितना होगा महंगा

ईरान से जुड़े तनाव का असर अब भारत में कंडोम की कीमतों पर भी दिख सकता है। कच्चे माल की कमी और सप्लाई चेन में रुकावट के कारण उत्पादन महंगा हो रहा है। इससे आने वाले समय में कीमतें बढ़ने की आशंका है, जिसका सामाजिक असर भी पड़ सकता है।

Apr 1, 2026 - 12:28
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युद्ध का असर अब बेडरूम तक… कंडोम के दाम बढ़ने की चेतावनी, जानिए कितना होगा महंगा

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध का असर अब सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं रहा है। इसका असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की चीजों तक पहुंचने लगा है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में भारत में कंडोम की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसकी मुख्य वजह पेट्रोकेमिकल सप्लाई चेन में आई रुकावट बताई जा रही है, जिससे कच्चे माल की कमी हो गई है और उत्पादन लागत बढ़ने लगी है।

8000 करोड़ की इंडस्ट्री पर दबाव
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कंडोम इंडस्ट्री करीब 8,000 करोड़ रुपये की है और यहां हर साल 400 करोड़ से ज्यादा यूनिट्स का उत्पादन होता है। लेकिन अब कच्चे माल की कमी के कारण इस बड़े सेक्टर पर दबाव बढ़ रहा है। अगर यह स्थिति जारी रहती है, तो आने वाले समय में कंडोम की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है।

कच्चे माल की कमी बनी बड़ी वजह
कंडोम बनाने के लिए सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया जैसे जरूरी कच्चे माल की जरूरत होती है। सिलिकॉन ऑयल का इस्तेमाल लुब्रिकेंट के रूप में किया जाता है, जबकि अमोनिया लेटेक्स को सुरक्षित रखने में मदद करता है। युद्ध और सप्लाई में रुकावट के कारण सिलिकॉन ऑयल की उपलब्धता घट गई है। वहीं अमोनिया की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की आशंका है। इसके अलावा पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले पीवीसी और एल्युमिनियम फॉयल भी महंगे हो रहे हैं।

कंपनियों के सामने बढ़ी चुनौती
देश की बड़ी कंपनियां जैसे HLL Lifecare, Mankind Pharma और Cupid Limited इस समय इस संकट से जूझ रही हैं। कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल की कमी और महंगाई के कारण उत्पादन और समय पर सप्लाई करना मुश्किल होता जा रहा है। लॉजिस्टिक्स की दिक्कतों ने समस्या को और बढ़ा दिया है।

आगे और बढ़ सकती है समस्या
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार जरूरी सेक्टरों को प्राथमिकता देते हुए पेट्रोकेमिकल संसाधनों का आवंटन कम कर सकती है। इससे इस इंडस्ट्री को मिलने वाली सप्लाई और घट सकती है, जिससे कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

सामाजिक असर भी संभव
यह सिर्फ एक उद्योग की समस्या नहीं है, बल्कि इसका सामाजिक असर भी हो सकता है। भारत में कंडोम का इस्तेमाल परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण के लिए बहुत जरूरी माना जाता है। अगर कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका इस्तेमाल कम हो सकता है, जिससे समाज पर भी असर पड़ सकता है।

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Ashwani Tiwari अश्वनी तिवारी, UP News Network में सब-एडिटर हैं। राजनीति, क्राइम, स्पोर्ट्स, ज्योतिष और धार्मिक विषयों से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से काम करते हैं। मीडिया जगत में 3 वर्ष का अनुभव है। रिपोर्टिंग, स्पेशल स्टोरीज़ और स्पेशल खरी-खोटी जैसे कार्यक्रमों पर काम किया है। कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वीडियो एंकरिंग का भी अनुभव है। SumanTV, Hyderabad (डिजिटल प्लेटफॉर्म) के साथ कार्य कर चुके हैं और ZEE News व India Watch जैसे प्रतिष्ठित न्यूज़ संस्थानों में इंटर्नशिप का अनुभव हासिल किया है। पिछले 1 साल से यूपी न्यूज़ नेटवर्क (डिजिटल) से जुड़ा हुआ हूं और उत्तर प्रदेश से जुड़ी अहम खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रहे हैं। एमजेएमसी की पढ़ाई कर चुके अश्वनी तिवारी की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, ज़मीनी मुद्दों और दर्शकों तक सटीक जानकारी पहुंचाने वाली पत्रकारिता से है। मेरी जन्मस्थली वाराणसी है, जबकि कार्य के दौरान मैं कई शहरों में रहकर पत्रकारिता कर चुका हूं।