तेल कीमतों और विदेशी बिकवाली से शेयर बाजार में गिरावट, निवेशकों को भारी नुकसान
तेल की बढ़ती कीमतों, वित्तीय और आर्थिक रूप से अस्थिर निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली और वैश्विक तनाव के चलते सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 1% की गिरावट के साथ भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही। निवेशकों को करीब ₹4 लाख करोड़ का नुकसान हुआ।
मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही और प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ खुले। पिछले तीन दिनों की तेजी के बाद बाजार में अचानक आई इस गिरावट ने निवेशकों को झटका दिया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में करीब 1% तक की गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और वैश्विक तनाव जैसे कारणों से बाजार पर दबाव बना हुआ है। शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों को करीब 4 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जिससे बाजार में चिंता का माहौल बन गया है।
शुरुआती कारोबार में बड़ी गिरावट
मंगलवार सुबह सेंसेक्स 1.05% गिरकर 73,326.61 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 0.9% गिरकर 22,771.75 पर आ गया। केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी करीब 1% नीचे रहे। कुछ ही सेकंड में बीएसई में लिस्टेड कंपनियों की कुल वैल्यू 4.24 लाख करोड़ रुपये घट गई, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
इन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट
इस गिरावट के दौरान IndiGo, Zomato की पेरेंट कंपनी Eternal, Mahindra & Mahindra, State Bank of India, Axis Bank और Asian Paints जैसे बड़े शेयरों में 2-3% की गिरावट देखी गई। हालांकि Bajaj Finance, Tech Mahindra, HCL Tech और ITC जैसे कुछ शेयर मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में रहे, लेकिन उनका असर बाजार को संभालने में काफी नहीं रहा।
सेक्टोरल इंडेक्स का हाल
NSE के सेक्टोरल इंडेक्स में Nifty Auto को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ और यह 2% से ज्यादा गिर गया। Nifty PSU Bank इंडेक्स में 1.9% की गिरावट आई, जबकि Nifty Metal में 0.7% की बढ़त दर्ज की गई। India Vix में 2% का उछाल आया, जो बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का संकेत देता है। NSE पर 1,105 शेयर गिरे, जबकि 1,398 शेयरों में बढ़त और 82 में कोई बदलाव नहीं हुआ।
गिरावट के पीछे प्रमुख कारण
बाजार में गिरावट के पीछे कई बड़े कारण सामने आए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई नई धमकियों और इजराइल-ईरान तनाव से वैश्विक चिंता बढ़ी है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें $110 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे महंगाई और लागत बढ़ने की आशंका है। साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। विदेशी निवेशक लगातार 24 दिनों से बिकवाली कर रहे हैं और सोमवार को ही उन्होंने 8,167 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके अलावा पिछले तीन दिनों की तेजी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली भी गिरावट का कारण बनी।
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