कांग्रेस बोली- ज्ञानेश कुमार को PM बना देना चाहिए, पद्म भूषण छोटी चीज, BJP अध्यक्ष के बयान पर विपक्ष का पलटवार
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण दिए जाने की भाजपा नेता समिक भट्टाचार्य की मांग पर कांग्रेस ने तंज कसा है। पवन खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के लिए पद्म भूषण छोटी चीज है और उन्हें प्रधानमंत्री बना देना चाहिए। इसी बीच SIR को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की कथित 14 आपत्तियां, मतदाता डेटा और Form 6 में बदलाव से जुड़े सवाल, बंगाल की लाखों अपीलें और गोवा के 97 मतदाताओं का मामला भी चर्चा में है। ममता बनर्जी और एमए बेबी की बातचीत तथा I.N.D.I.A. ब्लॉक की संभावित बैठक ने भी इस विवाद को नया राजनीतिक संदर्भ दिया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी बयानबाजी अब सम्मान और पद्म पुरस्कार तक पहुंच गई है। पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने ज्ञानेश कुमार के काम की तारीफ करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में हिंसा मुक्त विधानसभा चुनाव कराने और मतदाता सूची को साफ करने में उनकी अहम भूमिका रही। उन्होंने कहा कि इस काम के लिए ज्ञानेश कुमार कम से कम पद्म भूषण के हकदार हैं। समिक भट्टाचार्य के इसी बयान पर कांग्रेस ने तंज कसा। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के लिए पद्म भूषण बहुत छोटी चीज है, उन्हें प्रधानमंत्री बना देना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो दूसरों को प्रधानमंत्री बना सकता है, उसे खुद प्रधानमंत्री बनना चाहिए। ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों के हमले ऐसे समय में सामने आए हैं, जब चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया और आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर राजनीतिक विवाद पहले से चल रहा है।
समिक भट्टाचार्य बोले- बंगाल में लोगों ने बिना डर वोट किया
पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने शुक्रवार को उत्तर 24 परगना के पानीहाटी में आयोजित कार्यक्रम में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका की तारीफ की। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल के लोगों ने लंबे समय बाद ऐसा विधानसभा चुनाव देखा, जिसमें डर का माहौल नहीं था। भट्टाचार्य के मुताबिक, लोगों को बिना डर मतदान करने का मौका मिला और चुनाव के दौरान हत्या की घटनाएं नहीं हुईं। उन्होंने इसके लिए चुनाव आयोग की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर भी ज्ञानेश कुमार की तारीफ की। भट्टाचार्य ने दावा किया कि सीमा से लगे पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम हटाए गए और राज्य की जनता मुख्य चुनाव आयुक्त के काम से खुश है। इसी आधार पर उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को कम से कम पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना चाहिए।
पवन खेड़ा बोले- पद्म भूषण छोटी चीज, PM बना देना चाहिए
समिक भट्टाचार्य के बयान पर कांग्रेस ने सीधे तौर पर कटाक्ष किया। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के लिए पद्म भूषण बहुत छोटी चीज है। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री बना देना चाहिए। पवन खेड़ा का यह बयान भाजपा नेता की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त की तारीफ को लेकर किया गया राजनीतिक तंज था। कांग्रेस लंबे समय से SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाती रही है। ऐसे में भाजपा के एक वरिष्ठ राज्य नेता की ओर से ज्ञानेश कुमार के लिए पुरस्कार की मांग किए जाने के बाद कांग्रेस को चुनाव आयोग पर अपने पुराने आरोपों को लेकर भाजपा पर हमला करने का नया मुद्दा मिल गया।
प्रियंका चतुर्वेदी ने भी साधा निशाना
शिवसेना यूबीटी नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी समिक भट्टाचार्य के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनसे इस तरह की टिप्पणी की उम्मीद नहीं थी। प्रियंका चतुर्वेदी ने यह भी कहा कि संभव है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की बड़ी जीत के बाद भट्टाचार्य विशेष तौर पर धन्यवाद देना चाहते हों। उनकी टिप्पणी के जरिए पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस को और हवा मिली।
मनोज झा बोले- पहले समिक को भारत रत्न मिलना चाहिए
आरजेडी सांसद मनोज झा ने भी समिक भट्टाचार्य के बयान पर तंज किया। उन्होंने कहा कि वह उनकी बुद्धिमत्ता को नमन करते हैं। मनोज झा ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जिन आरोपों और सवालों के बीच इस तरह की सोच सामने आई है, उसके लिए समिक भट्टाचार्य को पहले भारत रत्न मिलना चाहिए और उसके बाद किसी और के बारे में सोचा जाना चाहिए। इस तरह ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण दिए जाने की भाजपा नेता की मांग पर कांग्रेस, आरजेडी और शिवसेना यूबीटी नेताओं की तरफ से अलग-अलग अंदाज में प्रतिक्रिया सामने आई।
ममता बनर्जी और एमए बेबी के बीच करीब 30 साल बाद बातचीत
ज्ञानेश कुमार और SIR को लेकर जारी विवाद के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री रह चुकीं ममता बनर्जी और CPI(M) महासचिव एमए बेबी के बीच फोन पर बातचीत भी चर्चा में है। यह बातचीत इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC और CPI(M) लंबे समय से एक-दूसरे के प्रमुख राजनीतिक विरोधी रहे हैं। दोनों दल I.N.D.I.A. ब्लॉक का हिस्सा हैं, लेकिन राज्य की राजनीति में इनके बीच लंबे समय से सीधा टकराव रहा है। करीब तीन दशक बाद ममता बनर्जी और एमए बेबी के बीच सीधी बातचीत होने की बात सामने आई है।
SIR पर विपक्षी दलों की बैठक के लिए बेबी ने लिखा था पत्र
एमए बेबी ने 23 सितंबर को गैर-NDA दलों को पत्र लिखकर चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर विपक्षी दलों की बैठक बुलाने की अपील की थी। इस पत्र में उन दलों को भी शामिल करने की बात कही गई थी, जो I.N.D.I.A. ब्लॉक का हिस्सा नहीं हैं। इनमें DMK, TVK, BRS, BJD और AAP जैसे दलों के नाम शामिल बताए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी ने पहले बेबी के पत्र का जवाब दिया और इसके बाद उनसे फोन पर बातचीत की। बातचीत में राहुल गांधी के साथ हुई उनकी चर्चा का भी जिक्र होने की बात सामने आई है। ममता और बेबी के बीच हुई बातचीत को SIR के मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच समन्वय बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि विपक्ष की ओर से अभी तक कोई साझा एक्शन प्लान सामने नहीं आया है।
I.N.D.I.A. ब्लॉक की बैठक को लेकर चर्चा तेज
SIR को लेकर विपक्षी दलों के बीच बैठक बुलाने की मांग लगातार सामने आ रही है। विपक्षी खेमे के एक वर्ग का कहना है कि चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर सभी दलों को एक साथ बैठकर आगे की रणनीति तय करनी चाहिए। CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य भी राहुल गांधी से SIR के मुद्दे पर I.N.D.I.A. ब्लॉक की बैठक बुलाने की बात कह चुके हैं। वहीं, एमए बेबी के 27 सितंबर को आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल से मुलाकात करने की बात भी सामने आई है। इससे संकेत मिलता है कि SIR को लेकर अलग-अलग विपक्षी दलों के बीच संवाद का सिलसिला जारी है। हालांकि अभी तक I.N.D.I.A. ब्लॉक की ओर से इस मुद्दे पर कोई साझा कार्यक्रम या संयुक्त एक्शन प्लान घोषित नहीं किया गया है।
SIR को लेकर कांग्रेस ने देशभर में किया प्रदर्शन
ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद का एक बड़ा कारण SIR भी है। SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के तहत मतदाता सूचियों का गहन पुनरीक्षण किया जा रहा है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में कई चुनावी प्रक्रियाओं और मतदाता डेटा से जुड़े सवाल उठाए गए थे। कांग्रेस ने इन रिपोर्टों के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। पार्टी ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए शुक्रवार को देशभर में प्रदर्शन भी किया। कांग्रेस का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त आयोग के भीतर दूसरे चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज कर रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग की ओर से इन लिखित टिप्पणियों को आंतरिक निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा बताया गया है।
दो चुनाव आयुक्तों ने उठाए चार बड़े सवाल
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों में मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए।
- पहला सवाल- Form 6 में बदलाव
रिपोर्ट के अनुसार नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में कुछ बदलाव किए गए। इसमें नए मतदाताओं से पिछली SIR सूची में खुद या अपने परिवार के सदस्यों के नाम से जुड़ी जानकारी मांगे जाने को लेकर सवाल उठाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने इस बदलाव को लेकर आपत्ति जताई और इसे हटाने की मांग की। - दूसरा सवाल- वोटर डेटा का नियंत्रण
दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता डेटा के नियंत्रण को लेकर भी सवाल उठाए। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने पूछा कि मतदाता डेटाबेस पर दिल्ली से नियंत्रण क्यों बढ़ रहा है और राज्यों की पहुंच सीमित क्यों हो रही है। यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची तैयार करने और अपडेट करने की प्रक्रिया में केंद्रीय और राज्य स्तर की चुनावी मशीनरी की अलग-अलग भूमिकाएं होती हैं। - तीसरा सवाल- बंगाल की 16 लाख अपीलें
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से हटाए गए नामों को लेकर बड़ी संख्या में अपीलों का मामला भी सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, सुखबीर सिंह संधू ने करीब 16 लाख अपीलों को लेकर सवाल उठाया और पूछा कि इन्हें किसने और किसकी अनुमति से दायर किया। इस मामले को लेकर भी चुनाव आयोग की आंतरिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए। - चौथा सवाल- गोवा के 97 मतदाता
रिपोर्ट में गोवा से जुड़े एक मामले का भी उल्लेख है। इसमें जांच के दौरान योग्य पाए गए 97 मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके। इसके पीछे सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्या बताए जाने की बात सामने आई। इस मामले को लेकर भी चुनाव आयोग के भीतर सवाल उठाए गए।
चुनाव आयोग के भीतर की आपत्तियां अब राजनीतिक मुद्दा
SIR को लेकर पहले से चल रही राजनीतिक बहस के बीच दो चुनाव आयुक्तों की कथित 14 आपत्तियों ने विवाद को एक अलग दिशा दे दी है। एक तरफ कांग्रेस और विपक्षी दल इन आपत्तियों को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवालों के तौर पर उठा रहे हैं। दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि आयुक्तों के बीच लिखित टिप्पणियां, सुझाव और असहमति संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इसी विवाद के बीच भाजपा नेता समिक भट्टाचार्य की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण दिए जाने की मांग और उसके बाद कांग्रेस का प्रधानमंत्री बनाए जाने वाला तंज सामने आया है। अब मामला केवल SIR की प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा है। चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली, मतदाता डेटा के नियंत्रण, वोटर लिस्ट में बदलाव और विपक्षी दलों के बीच संभावित समन्वय को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
