मासूम बन रहे आसान शिकार: अपनों के हाथों हो रही बच्चों की दर्दनाक हत्याएं
लखनऊ और सीतापुर से सामने आए चौंकाने वाले मामले उत्तर प्रदेश में माता-पिता और परिवार के सदस्यों द्वारा बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को उजागर करते हैं।
लखनऊ और आसपास के इलाकों में हाल ही में सामने आए मामलों ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। छोटे और मासूम बच्चे, जिनका शरीर कोमल और दिमाग अपरिपक्व होता है, आज अपराधियों के लिए सबसे आसान निशाना बनते जा रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई बार ये अपराधी कोई बाहरी नहीं, बल्कि खुद उनके अपने माता-पिता या परिवार के लोग ही होते हैं। सौतेला व्यवहार और पारिवारिक विवाद बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं।
अपनों से ही बढ़ता खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि पहली पत्नी के बच्चों के साथ सौतेला व्यवहार कई बार अत्यधिक क्रूरता में बदल जाता है। कुछ मामलों में पिता भी अपने बच्चों की सुरक्षा करने के बजाय उनके लिए खतरा बन जाते हैं। पारिवारिक झगड़े और नई रिश्तों की जटिलताएं बच्चों के जीवन पर भारी पड़ती हैं। ऐसे में मासूम बच्चों का जीवन सुरक्षित नहीं रह जाता।
लखनऊ में चार साल के बच्चे की हत्या
13 मार्च 2026 को लखनऊ के चौक क्षेत्र के लाजपत नगर में चार वर्षीय कर्नव की हत्या ने सभी को स्तब्ध कर दिया। इस मामले में किसी बाहरी अपराधी का नहीं, बल्कि उसके अपने पिता भीष्म खरबंदा और सौतेली मां रागिनी खरबंदा का नाम सामने आया। आरोप है कि दोनों ने बच्चे को लंबे समय तक प्रताड़ित किया और फिर बेरहमी से पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी। मासूम के शरीर पर 15 से अधिक चोट के निशान मिले थे और उसकी हड्डी टूटने से मौत की पुष्टि हुई।
सीतापुर में मां बनी बेटी की दुश्मन
14 मार्च 2026 को सीतापुर जिले के हुसैनगंज क्षेत्र में एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। यहां पति-पत्नी के बीच चल रहे विवाद के कारण मां वंदना ने अपनी छह माह की बेटी को गोद में लेकर घर से निकली और उसे नहर में फेंक दिया। इस घटना में मासूम की मौत हो गई। बताया गया कि पति विपिन कुमार और वंदना के बीच काफी समय से अनबन चल रही थी।
समाज के लिए गंभीर चेतावनी
इन दोनों घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि मासूम बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा अब कई बार उनके अपने ही बन रहे हैं। पुलिस ने दोनों मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इन घटनाओं ने समाज को गहरी सोच में डाल दिया है। जरूरत है कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाए और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
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