69000 शिक्षक भर्ती विवाद: आरक्षण घोटाले के खिलाफ अभ्यर्थियों का लखनऊ में प्रदर्शन, विधानसभा घेराव का ऐलान
लखनऊ में आरक्षण से प्रभावित उम्मीदवारों ने 69,000 शिक्षकों की भर्ती में कथित घोटाले के विरोध में प्रदर्शन किया। उन्होंने न्याय और अदालती आदेशों के कार्यान्वयन की मांग की।
उत्तर प्रदेश में 69000 सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़ा आरक्षण विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। आरक्षण से प्रभावित अभ्यर्थी आज लखनऊ में धरना प्रदर्शन करने जा रहे हैं। अभ्यर्थियों ने सुबह 10:00 से 10:30 बजे के बीच विधानसभा का घेराव करने का ऐलान किया है। लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे इन अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है, जिससे उनमें भारी नाराजगी है।
सरकार पर सुप्रीम कोर्ट में पेश न होने का आरोप
अभ्यर्थियों का आरोप है कि पिछले 18 महीनों से उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं हो रही है। उनका कहना है कि इससे मामले के निस्तारण में लगातार देरी हो रही है। अभ्यर्थियों ने मांग की है कि सरकार जल्द से जल्द कोर्ट में अपनी बात रखे और मामले का समाधान निकाले।
आरक्षण में गड़बड़ी के गंभीर आरोप
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का दावा है कि इस भर्ती में करीब 19,000 सीटों पर आरक्षण में गड़बड़ी हुई है। उनके अनुसार, ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत की जगह केवल 3.86 प्रतिशत आरक्षण दिया गया, जबकि एससी वर्ग को 21 प्रतिशत के बजाय 16.2 प्रतिशत आरक्षण मिला। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया आरक्षण नियमों के खिलाफ है।
नियमावली के उल्लंघन का आरोप
अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि शिक्षक भर्ती में बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 और आरक्षण नियमावली 1994 का खुलकर उल्लंघन किया गया है। उनका कहना है कि इस कारण हजारों अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ है और उनका भविष्य प्रभावित हुआ है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं बनी नई सूची
अभ्यर्थियों ने बताया कि 13 अगस्त 2024 को लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने इस भर्ती की पूरी सूची को घोटाला मानते हुए रद्द कर दिया था। कोर्ट ने तीन महीने के भीतर आरक्षण नियमों के अनुसार नई चयन सूची तैयार करने का आदेश दिया था, लेकिन अब तक इस आदेश का पालन नहीं किया गया है।
याची लाभ देकर जल्द समाधान की मांग
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की मांग है कि वर्ष 2020 से अब तक कोर्ट में लंबित इस मामले में सभी आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों को याची लाभ देकर जल्द निस्तारण किया जाए। उनका कहना है कि यह मामला पिछले 6 वर्षों से लंबित है, जिससे उनकी नौकरी और भविष्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
(रिपोर्टः संदीप शुक्ला, लखनऊ)
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