PM को समन की धमकी, 60 मिनट में जज का ट्रांसफर… पाकिस्तान में लोकतंत्र पर उठे सवाल

Shehbaz Sharif: पाकिस्तान में जज मोहसिन कयानी का तबादला विवादों में है। पीएम को तलब करने की बात के बाद उन्हें हटाया गया। सरकार इसे सामान्य बता रही है, लेकिन न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले ने सियासी और न्यायिक बहस को और तेज कर दिया है।

Apr 29, 2026 - 10:42
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PM को समन की धमकी, 60 मिनट में जज का ट्रांसफर… पाकिस्तान में लोकतंत्र पर उठे सवाल

पाकिस्तान में एक बड़ा न्यायिक विवाद सामने आया है, जिसने सियासी माहौल को गरमा दिया है। इस्लामाबाद हाईकोर्ट के जज मोहसिन अख्तर कयानी को अचानक उनके पद से हटा दिया गया। खास बात यह है कि उन्होंने एक केस की सुनवाई के दौरान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को तलब करने की बात कही थी। इसके ठीक एक घंटे बाद उनका तबादला कर दिया गया। हालांकि सरकार इसे सामान्य प्रक्रिया बता रही है, लेकिन इस फैसले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। इस घटना के बाद पाकिस्तान में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और सरकार के दबाव को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी में वित्तीय सदस्यों की नियुक्ति से जुड़े मामले की सुनवाई हो रही थी। इस दौरान जज कयानी ने सरकार के वकील से कहा कि अगर 18 मई तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो वह प्रधानमंत्री को तलब कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस मामले को लंबे समय से टाल रही है और उसकी नीयत सही नहीं लगती।

एक घंटे में बदल गया सब कुछ
रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई खत्म होने के करीब एक घंटे बाद ही जज कयानी को इस्लामाबाद हाईकोर्ट से हटा दिया गया। उन्हें लाहौर हाईकोर्ट भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि ज्यूडिशियल कमीशन के कुछ सदस्य इस फैसले से सहमत नहीं थे, लेकिन बहुमत के आधार पर प्रस्ताव पास कर दिया गया।

अन्य जजों का भी हुआ तबादला
सरकार ने सिर्फ कयानी ही नहीं, बल्कि जस्टिस बाबर सत्तार और जस्टिस रफत इम्तियाज का भी तबादला किया है। बाबर सत्तार को लाहौर से पेशावर हाईकोर्ट भेजा गया, जबकि रफत इम्तियाज को सिंध हाईकोर्ट में नियुक्त किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, इन जजों ने भी अपने फैसलों में सरकार की आलोचना की थी।

न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल
इस घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान में न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठने लगे हैं। जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पहले ही न्यायपालिका पर सरकार के प्रभाव का आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि जज स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पा रहे हैं।

संविधान में बदलाव और बढ़ती चिंता
एमनेस्टी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पाकिस्तान में सरकार और सेना ने न्यायपालिका पर नियंत्रण के लिए संविधान में 27वां संशोधन किया है। इसके तहत सरकार को जजों के तबादले और हटाने का अधिकार मिल गया है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर बहस तेज कर दी है।

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Ashwani Tiwari अश्वनी तिवारी, UP News Network में सब-एडिटर हैं। राजनीति, क्राइम, स्पोर्ट्स, ज्योतिष और धार्मिक विषयों से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से काम करते हैं। मीडिया जगत में 3 वर्ष का अनुभव है। रिपोर्टिंग, स्पेशल स्टोरीज़ और स्पेशल खरी-खोटी जैसे कार्यक्रमों पर काम किया है। कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वीडियो एंकरिंग का भी अनुभव है। SumanTV, Hyderabad (डिजिटल प्लेटफॉर्म) के साथ कार्य कर चुके हैं और ZEE News व India Watch जैसे प्रतिष्ठित न्यूज़ संस्थानों में इंटर्नशिप का अनुभव हासिल किया है। पिछले 1 साल से यूपी न्यूज़ नेटवर्क (डिजिटल) से जुड़ा हुआ हूं और उत्तर प्रदेश से जुड़ी अहम खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रहे हैं। एमजेएमसी की पढ़ाई कर चुके अश्वनी तिवारी की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, ज़मीनी मुद्दों और दर्शकों तक सटीक जानकारी पहुंचाने वाली पत्रकारिता से है। मेरी जन्मस्थली वाराणसी है, जबकि कार्य के दौरान मैं कई शहरों में रहकर पत्रकारिता कर चुका हूं।