अब अपना घर बनाना पड़ेगा और महंगा, मिडिल ईस्ट संकट का पड़ा सीधा असर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष का असर भारत के रियल एस्टेट सेक्टर पर दिखने लगा है। निर्माण सामग्री महंगी हो रही है और लागत बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो निर्माण लागत, प्रोजेक्ट और मुनाफे पर बड़ा असर पड़ सकता है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के रियल एस्टेट सेक्टर पर साफ दिखने लगा है। कंस्ट्रक्शन मटीरियल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और इंडस्ट्री के बड़े विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर यह स्थिति अप्रैल तक जारी रहती है, तो निर्माण लागत में करीब 5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इससे न सिर्फ प्रोजेक्ट की लागत बढ़ेगी, बल्कि निर्माण के काम में देरी की भी आशंका है।
लागत बढ़ने का खतरा क्यों
अंबुजा नियोटिया ग्रुप के चेयरमैन हर्षवर्धन नियोटिया ने इसे क्लासिक कॉस्ट-पुश साइकिल बताया है। फरवरी में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे थीं, लेकिन मार्च में यह बढ़कर 110-120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं। इसके साथ ही नेचुरल गैस की कीमतों में भी तेज उछाल आया है। इसका सीधा असर स्टील, लॉजिस्टिक्स और पेट्रोकेमिकल से जुड़े सामानों पर पड़ रहा है।
अप्रैल तक बढ़ सकता है दबाव
CREDAI पश्चिम बंगाल के अध्यक्ष और मर्लिन ग्रुप के चेयरमैन सुशील मोहता ने कहा है कि अगर अप्रैल में भी संघर्ष जारी रहा, तो निर्माण लागत तुरंत 5 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कंस्ट्रक्शन मटीरियल की कमी से प्रोजेक्ट की टाइमलाइन प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक संघर्ष जारी रहने से भारत की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
स्टील की कीमतों में तेज उछाल
जमीनी स्तर पर देखें तो स्टील की कीमतों में पहले ही बड़ा इजाफा हो चुका है। TMT स्टील की कीमत फरवरी में करीब 62,000 रुपये प्रति टन थी, जो मार्च में बढ़कर 72,000 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई। यानी कुछ बाजारों में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। पिछले 2-3 महीनों में कुल मिलाकर 18-25 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ी हैं। वहीं सीमेंट की कीमतों में अभी 0-5 प्रतिशत का ही बदलाव देखा गया है, लेकिन मांग लगातार बढ़ रही है।
मुनाफे और प्रोजेक्ट पर असर
पूर्ति रियल्टी के मैनेजिंग डायरेक्टर महेश अग्रवाल ने कहा कि अभी कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं, लेकिन हालात पर नजर रखी जा रही है। बढ़ती लागत का असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ेगा। इस बीच ICRA की रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेटिंग मार्जिन FY2025-26 में 10.3-10.8 प्रतिशत और FY2026-27 में 10.1-10.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पहले के 13-14 प्रतिशत से काफी कम है। हालांकि, रेवेन्यू ग्रोथ में सुधार की उम्मीद जताई गई है।
आगे क्या हो सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो रियल एस्टेट सेक्टर को लंबे समय तक दबाव झेलना पड़ सकता है। इससे घरों की कीमतें बढ़ सकती हैं और खरीदारों की मांग भी प्रभावित हो सकती है।
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