डीजल-ATF पर सरकार की बड़ी राहत: विंडफॉल टैक्स में भारी कटौती, एक्सपोर्ट नियमों में बदलाव
सरकार ने 1 मई, 2026 से डीजल और एटीएफ के निर्यात पर लगने वाले अप्रत्याशित लाभ कर में कमी की है। नई दरों और इस निर्णय के पीछे के कारणों के बारे में जानें।
केंद्र सरकार ने 1 मई 2026 से ईंधन के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बड़ा बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, डीजल के निर्यात पर लगने वाला टैक्स घटाकर 23 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं हवाई जहाज में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल यानी ATF पर यह टैक्स 33 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर अभी भी कोई टैक्स नहीं लगाया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है।
डीजल और ATF पर टैक्स में बड़ी कटौती
वित्त मंत्रालय ने बताया कि डीजल पर पहले 55.5 रुपये प्रति लीटर का एक्सपोर्ट टैक्स लगाया गया था, जिसे अब घटाकर 23 रुपये कर दिया गया है। इसी तरह ATF पर टैक्स 42 रुपये से घटाकर 33 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके अलावा 1 मई से अगले 15 दिनों के लिए डीजल के एक्सपोर्ट पर रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए लगाया जाने वाला सेस भी शून्य कर दिया गया है। इससे तेल कंपनियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
देश में पेट्रोल-डीजल पर टैक्स में कोई बदलाव नहीं
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश के अंदर इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी आम लोगों के लिए फिलहाल ईंधन की कीमतों पर इस फैसले का सीधा असर नहीं पड़ेगा। पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर टैक्स पहले की तरह जीरो ही रहेगा।
पहले क्यों बढ़ाया गया था टैक्स?
सरकार ने मार्च और अप्रैल में इन टैक्स दरों में बढ़ोतरी की थी। 26 मार्च को डीजल पर 21.50 रुपये और ATF पर 29.5 रुपये प्रति लीटर टैक्स लगाया गया था। बाद में 11 अप्रैल को इसे बढ़ाकर क्रमशः 55.5 रुपये और 42 रुपये कर दिया गया। यह कदम अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए उठाया गया था।
अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण बढ़ी थीं कीमतें
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और सैन्य टकराव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था। 28 फरवरी को हमलों के बाद तेल की कीमतें करीब 73 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। ऐसे में सरकार ने देश में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई बनाए रखने और कंपनियों को ज्यादा मुनाफा कमाने से रोकने के लिए यह टैक्स लगाया था।
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