साइबर ठगों की अब खैर नहीं… लखनऊ के प्रोफेसर ने बनाया खास Detection Device, भारत सरकार ने दिया पेटेंट

ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय की टीम ने साइबर अपराध पकड़ने वाला खास डिवाइस बनाया है। भारत सरकार से पेटेंट मिलने के बाद यह तकनीक डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करेगी। यह डिवाइस ऑनलाइन फ्रॉड, डेटा चोरी और साइबर अपराधों की पहचान और रोकथाम में मदद करेगा।

Apr 24, 2026 - 09:37
Apr 24, 2026 - 11:57
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साइबर ठगों की अब खैर नहीं… लखनऊ के प्रोफेसर ने बनाया खास Detection Device, भारत सरकार ने दिया पेटेंट

Lucknow News: डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के विधि अध्ययन विभाग की टीम ने Cybercrime Detection Device नाम का एक खास उपकरण तैयार किया है, जिसे भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने आधिकारिक रूप से पंजीकृत कर लिया है। यह उपलब्धि न सिर्फ विश्वविद्यालय बल्कि पूरे देश के लिए अहम मानी जा रही है। इस डिवाइस के जरिए अब साइबर अपराधों की पहचान और रोकथाम आसान हो सकती है, जिससे आम लोगों की ऑनलाइन सुरक्षा और मजबूत होगी।

कैसे बना यह खास डिवाइस
इस डिवाइस को विभागाध्यक्ष और शिक्षाविद् डॉ. पियूष कुमार त्रिवेदी के नेतृत्व में विकसित किया गया है। उनके साथ इस शोध में प्रो. (डॉ.) के.बी. अस्थाना, स्नेहल अस्थाना और डॉ. शिवली श्रीवास्तव का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। डॉ. पीयूष त्रिवेदी इस आविष्कार के मुख्य इन्वेंटर हैं। भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा जारी Certificate of Registration of Design के अनुसार इस डिवाइस के डिज़ाइन को आधिकारिक मान्यता मिल चुकी है।

क्या है इसकी खासियत
यह Cybercrime Detection Device आधुनिक तकनीक पर आधारित है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है रियल-टाइम डिटेक्शन, यानी यह तुरंत साइबर अपराध को पहचान सकता है। इसके साथ ही इसमें रोकथाम की व्यवस्था और कानूनी नियमों का पालन भी शामिल है। इससे जांच एजेंसियों को तुरंत कार्रवाई करने में मदद मिलेगी और अपराधियों तक जल्दी पहुंच संभव होगी।

समाज और सुरक्षा के लिए क्यों है जरूरी
यह डिवाइस आम लोगों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। यह ऑनलाइन धोखाधड़ी, डेटा चोरी और डिजिटल फ्रॉड जैसे अपराधों को रोकने में मदद करेगा। साथ ही कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सबूत जुटाने और जांच मजबूत करने में भी सहायता देगा। इससे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित माहौल बनेगा और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में नई दिशा मिलेगी।

कुलपति ने क्या कहा
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने इस उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह नवाचार विश्वविद्यालय की शोध क्षमता को दर्शाता है और समाज में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।

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Ashwani Tiwari अश्वनी तिवारी, UP News Network में सब-एडिटर हैं। राजनीति, क्राइम, स्पोर्ट्स, ज्योतिष और धार्मिक विषयों से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से काम करते हैं। मीडिया जगत में 3 वर्ष का अनुभव है। रिपोर्टिंग, स्पेशल स्टोरीज़ और स्पेशल खरी-खोटी जैसे कार्यक्रमों पर काम किया है। कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वीडियो एंकरिंग का भी अनुभव है। SumanTV, Hyderabad (डिजिटल प्लेटफॉर्म) के साथ कार्य कर चुके हैं और ZEE News व India Watch जैसे प्रतिष्ठित न्यूज़ संस्थानों में इंटर्नशिप का अनुभव हासिल किया है। पिछले 1 साल से यूपी न्यूज़ नेटवर्क (डिजिटल) से जुड़ा हुआ हूं और उत्तर प्रदेश से जुड़ी अहम खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रहे हैं। एमजेएमसी की पढ़ाई कर चुके अश्वनी तिवारी की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, ज़मीनी मुद्दों और दर्शकों तक सटीक जानकारी पहुंचाने वाली पत्रकारिता से है। मेरी जन्मस्थली वाराणसी है, जबकि कार्य के दौरान मैं कई शहरों में रहकर पत्रकारिता कर चुका हूं।