बुंदेलखंड के कुंडौरा गांव की अनोखी होली, जहां महिलाओं की चलती है हुकूमत और पुरुष रहते हैं घरों में कैद

हमीरपुर के कुंडौरा गांव में करीब 500 साल पुरानी परंपरा के तहत होली के दिन सिर्फ महिलाएं ही बाहर निकलकर रंग खेलती हैं, जबकि पुरुषों को घरों में रहना पड़ता है। गलती से भी कोई पुरुष बाहर आ जाए तो महिलाएं उसे सजा के तौर पर नचाती हैं।

Mar 5, 2026 - 10:54
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बुंदेलखंड के कुंडौरा गांव की अनोखी होली, जहां महिलाओं की चलती है हुकूमत और पुरुष रहते हैं घरों में कैद

Uttar Pradesh News: बुंदेलखंड क्षेत्र में होली का त्योहार हमेशा से खास उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जाता है। यहां अबीर, गुलाल और रंगों के बीच फाग के गीतों की गूंज पूरे माहौल को रंगीन बना देती है। लेकिन हमीरपुर जिले के कुंडौरा गांव में होली मनाने की परंपरा पूरे इलाके से अलग और अनोखी है। इस गांव में होली के दिन पुरुषों का बाहर निकलना पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है। गांव की महिलाएं ही पूरे गांव में घूमकर रंग खेलती हैं और त्योहार का आनंद उठाती हैं। इस दौरान पुरुषों को अपने घरों में ही रहना पड़ता है, जबकि महिलाएं ढोलक और मजीरों की धुन पर फाग गाते हुए नाचती-गाती हैं।

लाठी-डंडों के साथ गांव में पहरा देती हैं महिलाएं
होली के दिन कुंडौरा गांव में सैकड़ों महिलाएं रंगों से सराबोर होकर टोलियों में निकलती हैं। कुछ महिलाएं गांव के मुख्य रास्तों पर लाठी-डंडों के साथ पहरा देती हैं, ताकि कोई पुरुष बाहर न निकल सके। वहीं बाकी महिलाएं पूरे गांव में घूम-घूमकर रंग खेलती हैं और फाग के गीत गाते हुए नृत्य करती हैं। साल भर घूंघट में रहने वाली महिलाएं इस दिन पूरी आजादी के साथ त्योहार का आनंद लेती हैं और गांव में उनकी ही हुकूमत चलती है।

पुरुष दिखे तो पहनाए जाते हैं महिलाओं के कपड़े
गांव की परंपरा के अनुसार यदि कोई पुरुष गलती से भी महिलाओं के बीच पहुंच जाता है, तो उसे सजा के तौर पर महिलाओं के कपड़े पहनाए जाते हैं और उसके साथ मजाक करते हुए नचाया जाता है। अगर कोई विरोध करता है तो महिलाएं उसकी पिटाई भी कर देती हैं। यही वजह है कि इस दिन गांव के पुरुष घरों में ही रहते हैं और बाहर निकलने से बचते हैं।

500 साल पुरानी बताई जाती है परंपरा
कुंडौरा गांव में महिलाओं की इस खास होली का इतिहास करीब 500 साल पुराना बताया जाता है। गांव की बहुएं और बेटियां फाग निकालते समय गीत गाती हैं और नृत्य करती हैं। इस दौरान किसी भी पुरुष को उन्हें देखने की अनुमति नहीं होती। अगर कोई चोरी-छिपे देखने की कोशिश करता है तो उसे गांव से लट्ठ लेकर खदेड़ दिया जाता है। इतना ही नहीं, इस आयोजन की फोटो या वीडियो बनाना भी पूरी तरह प्रतिबंधित है।

बेटियां भी मायके आकर मनाती हैं खास होली
गांव की बुजुर्ग महिला सीता देवी के अनुसार यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है। साल में एक बार होली के दिन ही महिलाओं को घर और घूंघट से बाहर निकलकर खुलकर जश्न मनाने का मौका मिलता है। इस खास परंपरा में शामिल होने के लिए गांव की बेटियां भी अपनी ससुराल से मायके लौट आती हैं। वे भी अन्य महिलाओं के साथ पूरे उत्साह के साथ रंग खेलती हैं और फाग के गीतों पर नृत्य करती हैं।

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Ashwani Tiwari अश्वनी तिवारी, UP News Network में सब-एडिटर हैं। वे राजनीति, क्राइम, स्पोर्ट्स, ज्योतिष और धार्मिक विषयों से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से काम करते हैं। मीडिया जगत में उन्हें 2 वर्ष का अनुभव है। उन्होंने रिपोर्टिंग, स्पेशल स्टोरीज़ और स्पेशल खरी-खोटी जैसे कार्यक्रमों पर काम किया है। कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वीडियो एंकरिंग का भी अनुभव रखते हैं। SumanTV, Hyderabad (डिजिटल प्लेटफॉर्म) के साथ कार्य कर चुके हैं और ZEE News व India Watch जैसे प्रतिष्ठित न्यूज़ संस्थानों में इंटर्नशिप का अनुभव हासिल किया है। पिछले 1 साल से वे यूपी न्यूज़ नेटवर्क (डिजिटल) से जुड़े हैं और उत्तर प्रदेश से जुड़ी अहम खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रहे हैं। एमजेएमसी की पढ़ाई कर चुके अश्वनी तिवारी की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, ज़मीनी मुद्दों और दर्शकों तक सटीक जानकारी पहुंचाने वाली पत्रकारिता से है। उनकी जन्मस्थली वाराणसी है, जबकि कार्य के दौरान वे कई शहरों में रहकर पत्रकारिता कर चुके हैं।