2027 से पहले भाजपा ने साधा जातीय समीकरण, नई मीडिया टीम में 10 ब्राह्मण, 8 पिछड़े, 4 दलित और 3 ठाकुर चेहरे, पूर्व मंत्री के विरोधी को मिली जगह
उत्तर प्रदेश भाजपा ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अपनी नई मीडिया टीम घोषित कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की ओर से जारी सूची में 31 प्रदेश प्रवक्ता, 25 मीडिया पैनलिस्ट, दो मीडिया सह-संयोजक और पहली बार मीडिया वॉच की जिम्मेदारी तय की गई है। नई टीम में पुराने अनुभवी चेहरों के साथ कई नए नेताओं को जगह मिली है। प्रवक्ताओं की संख्या पिछली टीम के 16 से बढ़कर 31 हो गई है। टीम में अलग-अलग सामाजिक वर्गों और समुदायों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश भी दिखाई देती है।
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपनी मीडिया टीम का विस्तार कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की ओर से शनिवार को नई मीडिया टीम की घोषणा की गई। पार्टी ने इस बार 31 प्रदेश प्रवक्ता और 25 मीडिया पैनलिस्ट बनाए हैं। इसके अलावा प्रदेश मीडिया सह-संयोजक और मीडिया वॉच की जिम्मेदारी भी तय की गई है। नई व्यवस्था में पुराने अनुभवी चेहरों के साथ कई नए नेताओं को भी जगह मिली है। पिछली टीम में 16 प्रदेश प्रवक्ता थे, जबकि इस बार यह संख्या बढ़ाकर 31 कर दी गई है। भाजपा की नई व्यवस्था को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मीडिया और राजनीतिक नैरेटिव को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी ने प्रदेश के साथ-साथ पश्चिम, ब्रज, कानपुर, अवध, काशी और गोरखपुर क्षेत्र के लिए भी मीडिया संयोजक और सह-संयोजक नियुक्त किए हैं। यानी अब प्रदेश स्तर से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक पार्टी के मीडिया संवाद के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं।
हिमांशु दुबे और दीपक बघेल को मिली अहम जिम्मेदारी
नई टीम में हिमांशु दुबे और दीपक बघेल को प्रदेश मीडिया सह-संयोजक बनाया गया है। हिमांशु दुबे को मीडिया विभाग में लंबे अनुभव वाला चेहरा माना जाता है और उन्हें एक बार फिर इस जिम्मेदारी में बनाए रखा गया है। पार्टी के मीडिया प्रबंधन में उनका अनुभव विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान भी काम आया है। प्रदेश प्रवक्ताओं की सूची में डॉ. समीर सिंह, कौशलेंद्र पटेल, मनीष शुक्ला, हीरो बाजपेयी, जुगल किशोर, राकेश त्रिपाठी, लालजी निर्मल, आनंद दुबे, अवनीश त्यागी, आलोक वर्मा, अनिला सिंह, साक्षी दिवाकर, संजय चौधरी, अशोक पाण्डेय, एसएन सिंह, मनोज पोसवाल, डॉ. ऋचा सिंह, प्रशांत उमराव, दिलीप श्रीवास्तव, डॉ. अमित कुशवाहा, प्रियंक पाण्डेय, नवीन श्रीवास्तव, रामनिवास यादव, अनुभव चक, डॉ. रजनीश त्यागी, ब्रह्मप्रकाश पाल, आशीष कुमार गुप्ता, डॉ. अंकुश त्रिपाठी, अभिषेक कृष्ण दुबे, प्रताप सिंह नागर और शैलेंद्र शर्मा अटल को जगह दी गई है।
31 प्रवक्ताओं की टीम में 14 नए चेहरे
इस बार भाजपा ने सिर्फ पुराने प्रवक्ताओं पर भरोसा नहीं किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक नई टीम में 14 नए चेहरों को जगह मिली है। यानी पार्टी ने अनुभव और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। पिछली टीम में जहां 16 प्रवक्ता थे, वहीं अब यह संख्या लगभग दोगुनी होकर 31 हो गई है। चुनावी साल से पहले प्रवक्ताओं की संख्या में इतनी बड़ी बढ़ोतरी का सीधा मतलब यह है कि पार्टी अलग-अलग मुद्दों पर ज्यादा लोगों को मीडिया के सामने उतारना चाहती है। टीवी डिबेट से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पार्टी का पक्ष रखने के लिए अब पहले से ज्यादा चेहरे उपलब्ध होंगे।
जातीय समीकरण पर भी नजर
नई मीडिया टीम में अलग-अलग सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश भी दिखाई देती है। उपलब्ध सूची के जातीय विश्लेषण के मुताबिक 31 प्रवक्ताओं में ब्राह्मण, पिछड़ा वर्ग, दलित, ठाकुर और भूमिहार समाज से जुड़े चेहरे शामिल हैं। आपके उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इनमें 10 ब्राह्मण, 8 पिछड़े वर्ग, 4 दलित, 3 ठाकुर और 2 भूमिहार चेहरे हैं। दलित समाज से आने वाले प्रवक्ताओं की संख्या पिछली टीम के मुकाबले बढ़ाई गई है। अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष लालजी निर्मल को भी प्रवक्ता बनाया गया है। इसी तरह अलग-अलग पिछड़े वर्गों से जुड़े नेताओं को भी मीडिया टीम में जिम्मेदारी दी गई है।
दो मुस्लिम चेहरों को भी जगह
नई मीडिया टीम में मुस्लिम समुदाय से अमील शम्सी और जेबा यास्मीन को शामिल किए जाने की बात भी सामने आई है। इससे मीडिया टीम की सामाजिक संरचना में एक और समुदाय का प्रतिनिधित्व जुड़ता है। भाजपा लंबे समय से संगठन और चुनावी राजनीति में सामाजिक विस्तार पर जोर देती रही है। ऐसे में मीडिया टीम में अलग-अलग समुदायों से लोगों को शामिल करने का असर सिर्फ टीवी डिबेट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पार्टी के सार्वजनिक संवाद में भी दिखाई देता है।
दिलीप श्रीवास्तव की एंट्री पर भी नजर
नई टीम में दिलीप श्रीवास्तव को प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी मिलना भी चर्चा में है। आपके दिए विवरण के मुताबिक दिलीप श्रीवास्तव का पूर्व मंत्री आशुतोष टंडन के साथ राजनीतिक मतभेद रहा था और 2021 में टंडन ने उनका विरोध किया था। अब आशुतोष टंडन के निधन के बाद दिलीप श्रीवास्तव को पार्टी की मीडिया टीम में जगह मिली है। इस नियुक्ति को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा इसलिए है क्योंकि यह सिर्फ एक मीडिया पद नहीं, बल्कि संगठन के भीतर बदलते समीकरणों का संकेत भी माना जा रहा है। हालांकि किसी नेता की नियुक्ति को सीधे किसी पुराने राजनीतिक विरोध का परिणाम बताना उचित नहीं होगा। इसके पीछे संगठन की वर्तमान जरूरत और नेतृत्व का निर्णय भी हो सकता है।
रवि सोनकर को पैनलिस्ट की जिम्मेदारी
पूर्व विधायक रवि सोनकर को भी नई मीडिया टीम में जगह मिली है। उन्हें प्रदेश मीडिया पैनलिस्ट बनाया गया है। लंबे समय से संगठन में सक्रिय रवि सोनकर को प्रदेश टीम या अनुसूचित जाति मोर्चे में जिम्मेदारी मिलने की चर्चा रही थी। अब मीडिया टीम में उन्हें जगह मिलने से उन्हें पार्टी के सार्वजनिक राजनीतिक संवाद में अपनी भूमिका निभाने का मौका मिलेगा। खासकर टीवी डिबेट और अन्य मीडिया मंचों पर पैनलिस्ट के तौर पर पार्टी का पक्ष रखने की जिम्मेदारी होगी।
डिप्टी सीएम के करीबी माने जाने वाले चेहरों को भी जगह
नई टीम में ऐसे चेहरे भी शामिल हैं जिन्हें अलग-अलग भाजपा नेताओं के करीबी के तौर पर देखा जाता रहा है। कौशलेंद्र पटेल और नवीन श्रीवास्तव को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के करीबियों में गिना जाता है। कौशलेंद्र पटेल वाराणसी के पूर्व महापौर रह चुके हैं। उन्होंने 2018 में कौशाम्बी लोकसभा उपचुनाव भी लड़ा था, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद प्रदेश संगठन में उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली थी। अब उन्हें प्रदेश प्रवक्ता बनाया गया है। इसी तरह नई टीम में दूसरे वरिष्ठ नेताओं से जुड़े माने जाने वाले चेहरों को भी जगह मिली है। इससे साफ है कि मीडिया टीम बनाते समय पार्टी ने सिर्फ टीवी डिबेट में सक्रिय रहने वाले चेहरों को ही नहीं चुना, बल्कि संगठन में लंबे समय से काम कर रहे कार्यकर्ताओं को भी मौका दिया है।
धर्मपाल सिंह के संगठनात्मक प्रभाव की भी चर्चा
नई मीडिया टीम के गठन के साथ प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह की भूमिका को लेकर भी संगठन के भीतर चर्चा है। मीडिया विभाग में पहले से सक्रिय कुछ ऐसे चेहरे हैं जिन्हें धर्मपाल सिंह के भरोसेमंद लोगों में माना जाता है। राष्ट्रीय संगठन से जुड़े मनीष दीक्षित को पहले ही मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी मिल चुकी थी। अब नई मीडिया टीम में भी संगठन के पुराने और भरोसेमंद कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां मिली हैं। हालांकि यह कहना कि पूरी सूची किसी एक नेता के प्रभाव में तैयार हुई है, पार्टी की ओर से आधिकारिक रूप से नहीं कहा गया है। लेकिन संगठन में जिम्मेदारियों के बंटवारे को देखते हुए अलग-अलग नेताओं और संगठन के बीच तालमेल की चर्चा जरूर शुरू हो गई है।
भाजपा ने पहली बार बनाई मीडिया वॉच टीम
नई मीडिया व्यवस्था का सबसे अलग पहलू मीडिया वॉच टीम का गठन है। भाजपा ने इसके लिए दिवस चतुर्वेदी और मनोज त्रिवेदी को जिम्मेदारी दी है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक यह व्यवस्था पहले की मीडिया टीम से अलग है। मीडिया वॉच का काम पार्टी, सरकार और संगठन से जुड़ी खबरों पर नजर रखने, विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों और मीडिया में चल रहे नैरेटिव को ट्रैक करने तथा जरूरत के अनुसार पार्टी का पक्ष तैयार कराने से जुड़ा हो सकता है। दिवस चतुर्वेदी 2022 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान मीडिया प्रबंधन से जुड़े रहे हैं। ऐसे में इस जिम्मेदारी के लिए उनके अनुभव को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
छह क्षेत्रों में भी अलग मीडिया टीम
प्रदेश स्तर के अलावा भाजपा ने छह क्षेत्रों के लिए भी मीडिया संयोजक और सह-संयोजक नियुक्त किए हैं। पश्चिम, ब्रज, कानपुर, अवध, काशी और गोरखपुर क्षेत्र में अलग-अलग मीडिया व्यवस्था बनाई गई है। उपलब्ध सूची के मुताबिक पश्चिम क्षेत्र में गजेंद्र शर्मा, ब्रज में अंकित माहेश्वरी, कानपुर में अनूप अवस्थी, अवध में आकाश मिश्रा, काशी में मधुकर चित्रांश और गोरखपुर में राहुल तिवारी को क्षेत्रीय मीडिया संयोजक बनाया गया है। इससे क्षेत्रीय मुद्दों पर पार्टी की प्रतिक्रिया और मीडिया प्रबंधन को स्थानीय स्तर पर तेज करने की कोशिश दिखाई देती है।
पुराने चेहरों पर भी भरोसा बरकरार
नई टीम में कई ऐसे चेहरे हैं जो लंबे समय से भाजपा के मीडिया विभाग में सक्रिय रहे हैं। समीर सिंह, हीरो बाजपेयी, राकेश त्रिपाठी, मनीष शुक्ला और आनंद दुबे जैसे नेताओं को फिर से जिम्मेदारी दी गई है। खास तौर पर राकेश त्रिपाठी को दोबारा प्रवक्ता बनाए जाने से साफ है कि पार्टी ने अनुभवी और मीडिया में पहले से पहचाने जाने वाले चेहरों को पूरी तरह बाहर नहीं किया है। नई टीम में पुराने चेहरों को बनाए रखने के साथ नए लोगों को जोड़ने का मॉडल अपनाया गया है।
कुछ पुराने प्रवक्ताओं की छुट्टी
जहां कई पुराने प्रवक्ताओं को दोबारा मौका मिला है, वहीं कुछ चेहरों को इस बार सूची से बाहर भी किया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आलोक अवस्थी, प्रशांत वशिष्ठ और हरिश्चंद्र श्रीवास्तव को नई प्रवक्ता सूची में जगह नहीं मिली है। इससे पार्टी की मीडिया रणनीति में बदलाव का संकेत भी मिलता है। कुछ पुराने चेहरों को हटाकर नए और ज्यादा सक्रिय लोगों को जिम्मेदारी देना चुनाव से पहले टीम को नए सिरे से तैयार करने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। 2027 का चुनाव सिर्फ मैदान में होने वाली राजनीतिक लड़ाई नहीं होगा। टीवी चैनलों के साथ-साथ यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी राजनीतिक नैरेटिव को लेकर मुकाबला तेज रहने की संभावना है। ऐसे में भाजपा की 31 प्रवक्ताओं और 25 पैनलिस्टों वाली टीम का काम सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस या टीवी डिबेट तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार के कामकाज, विपक्ष के आरोप, कानून-व्यवस्था, विकास, रोजगार, सामाजिक मुद्दों और चुनावी राजनीति से जुड़े सवालों पर पार्टी का पक्ष रखने के लिए इन चेहरों को लगातार सक्रिय रहना होगा।
चुनाव से पहले मीडिया टीम का प्रशिक्षण भी होगा
नई टीम के गठन के बाद प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसमें भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राष्ट्रीय मीडिया टीम के पदाधिकारी शामिल हो सकते हैं। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह भी मीडिया टीम के सदस्यों को उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी देंगे। इसका मकसद अलग-अलग मीडिया मंचों पर पार्टी के पक्ष को एक समान और प्रभावी तरीके से रखने की तैयारी करना होगा। कुल मिलाकर नई मीडिया टीम के गठन से भाजपा ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अपने राजनीतिक संवाद का ढांचा काफी बड़ा कर दिया है। 16 से बढ़ाकर 31 प्रवक्ता करना, 25 पैनलिस्ट नियुक्त करना, पहली बार मीडिया वॉच टीम बनाना और छह क्षेत्रों में अलग मीडिया व्यवस्था तैयार करना इस बदलाव के सबसे बड़े संकेत हैं। अब असली परीक्षा इस बात की होगी कि यह बड़ा मीडिया ढांचा चुनावी मुद्दों और विपक्ष के हमलों के बीच पार्टी का पक्ष कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से जनता तक पहुंचा पाता है।
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