सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कक्षा 8 की नई एनसीईआरटी सोशल साइंस पुस्तक पर रोक, स्कूलों को तुरंत उपयोग बंद करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यूपी सरकार ने स्कूलों में एनसीईआरटी की 8वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की किताब 'समाज की खोज: भारत और उसके पार पार्ट 2' का इस्तेमाल बंद कर दिया है।
भारत का सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने कक्षा 8 की एनसीईआरटी की नई सोशल साइंस पुस्तक ‘समाज की खोज: भारत और उससे परे–भाग दो’ के उपयोग पर तत्काल रोक लगा दी है। राज्य के बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों को निर्देश दिया है कि इस पुस्तक का इस्तेमाल तुरंत बंद किया जाए। जहां भी यह पुस्तक उपलब्ध है, वहां से इसकी प्रतियां जब्त कर सील करने के निर्देश दिए गए हैं। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका पर 26 फरवरी को दिए गए आदेश के आधार पर लिया गया है, जिसके बाद केंद्र सरकार ने भी सभी राज्यों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लिया गया फैसला
दरअसल, एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सोशल साइंस की नई पुस्तक ‘समाज की खोज: भारत और उससे परे–भाग दो’ को लेकर विवाद सामने आया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। अदालत ने 26 फरवरी को आदेश जारी करते हुए इस पुस्तक के प्रकाशन, वितरण और डिजिटल माध्यम से प्रसार पर रोक लगाने को कहा। इसके बाद 27 फरवरी को केंद्र सरकार ने भी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस संबंध में जरूरी निर्देश जारी किए। उसी के आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार ने यह निर्णय लिया है।
न्यायपालिका से जुड़े अध्याय पर जताई गई आपत्ति
इस पुस्तक के एक अध्याय ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ में न्यायपालिका की व्यवस्था से जुड़ी कुछ समस्याओं का उल्लेख किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस सामग्री पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे न्यायपालिका की छवि प्रभावित हो सकती है। अदालत ने माना कि इस तरह की सामग्री छात्रों पर गलत प्रभाव डाल सकती है। इसी कारण अदालत ने पुस्तक के उपयोग और प्रसार पर रोक लगाने का आदेश दिया।
राज्यों से मांगी गई अनुपालन रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा विभागों के प्रमुख सचिवों को निर्देश दिया है कि वे अदालत के आदेश का पालन सुनिश्चित करें। इसके साथ ही अदालत ने कहा है कि दो सप्ताह के भीतर शपथपत्र के माध्यम से अनुपालन रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए। इसी प्रक्रिया के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने भी सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी है।
शिक्षा विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश
उत्तर प्रदेश में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव Parth Sarathi Sen Sharma ने इस मामले में सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने महानिदेशक स्कूल शिक्षा, बेसिक और माध्यमिक शिक्षा निदेशकों, सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों, सहायक मंडलीय शिक्षा निदेशकों, जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) और बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को आदेश दिया है कि निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाए।
स्कूलों में किसी भी स्थिति में नहीं होगी पढ़ाई
सरकार ने साफ कहा है कि फरवरी में प्रकाशित यह पुस्तक किसी भी स्कूल में पढ़ाई के लिए उपयोग में नहीं लाई जाएगी। यदि कहीं इस पुस्तक का वितरण हो चुका है, तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार उसकी प्रतियां तुरंत जब्त की जाएंगी और उन्हें सील किया जाएगा। सभी जिलों से प्राप्त जानकारी संबंधित निदेशकों के माध्यम से महानिदेशक स्कूल शिक्षा को भेजी जाएगी। इसके बाद महानिदेशक को यह समेकित रिपोर्ट 9 मार्च तक शासन को सौंपनी होगी।
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