लखनऊ में दिनदहाड़े माफिया मुन्ना बजरंगी के करीबी की हत्या, 10 साल बाद भी पुलिस के हाथ खाली
लखनऊ में 2017 में मुन्ना बजरंगी के करीबी मोहम्मद तारिक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। करीब एक दशक बीतने के बाद भी पुलिस हत्यारों तक नहीं पहुंच सकी है।
Uttar Pradesh News: लखनऊ में वर्ष 2017 में हुई एक सनसनीखेज हत्या आज भी पुलिस के लिए पहेली बनी हुई है। एक दिसंबर 2017 दिन शुक्रवार को शाम करीब पांच बजे निकाय चुनाव की मतगणना चल रही थी। उसी दौरान पुलिस वायरलेस पर सूचना प्रसारित हुई कि बनारस निवासी और माफिया मुन्ना बजरंगी के करीबी माने जाने वाले मोहम्मद तारिक की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। यह वारदात गोमतीनगर क्षेत्र के ग्वारी गांव के पास शहीद पथ पर हुई थी। उस समय राजधानी लखनऊ चुनाव के कारण पूरी तरह छावनी में तब्दील थी, लेकिन इसके बावजूद बदमाशों ने सरेआम इस घटना को अंजाम दे दिया।
शहीद पथ पर गोलियों से भून दिया गया था तारिक
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। तत्कालीन एसएसपी सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंच गए। शहीद पथ के किनारे तारिक का खून से लथपथ शव पड़ा हुआ था और वहां बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे। बताया गया कि अज्ञात शूटरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर तारिक को मौत के घाट उतार दिया था। पुलिस ने तुरंत आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की और दावा किया कि जल्द ही हत्यारों को पकड़ लिया जाएगा।
पुलिस ने कई संदिग्धों से की पूछताछ
इस मामले में पुलिस ने शक के आधार पर कई संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ भी की। कातिलों की तलाश के लिए तत्कालीन सीओ गोमतीनगर दीपक कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस की टीमें बनाई गईं। इन टीमों को अलग-अलग दिशाओं में भेजकर हत्यारों की तलाश शुरू की गई। पुलिस ने वाराणसी, गोरखपुर सहित पूर्वांचल के कई जिलों के सूचीबद्ध अपराधियों की जानकारी भी खंगाली। इसके अलावा जेलों में बंद अपराधियों के रिकॉर्ड भी जांचे गए, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका।
मोटरसाइकिल सवार बदमाशों ने की थी ताबड़तोड़ फायरिंग
जांच के दौरान स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार घटना वाले दिन शाम करीब पांच बजे तारिक अपनी फॉर्च्यूनर गाड़ी से ग्वारी फ्लाईओवर की ओर पहुंचा था। तभी पीछे से आए असलहों से लैस मोटरसाइकिल सवार बदमाशों ने उस पर अचानक ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। बताया जाता है कि जान बचाने के लिए तारिक ने अपनी गाड़ी पुल की ओर दौड़ा दी, लेकिन बदमाशों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और गोलियों की बौछार कर दी। कुछ ही पलों में तारिक की मौके पर ही मौत हो गई।
एक दशक बाद भी नहीं पकड़े जा सके हत्यारे
घटना के बाद पुलिस अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से पूछताछ की, लेकिन हमलावर कुछ ही मिनटों में मौके से फरार हो गए थे। उस समय तत्कालीन एसएसपी सहित कई अधिकारियों ने हत्यारों को पकड़ने के लिए विशेष टीमें गठित की थीं और सख्त निर्देश दिए थे कि जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए। हालांकि पुलिस ने इस मामले में काफी प्रयास किए, लेकिन करीब एक दशक बीत जाने के बाद भी हत्यारों तक पहुंचने में सफलता नहीं मिल सकी। जानकारों का कहना है कि पुलिस की जांच कई बार दिशा बदलती रही, लेकिन कोई नतीजा सामने नहीं आया। इससे ऐसा लगता है कि यह मामला अब लगभग ठंडे बस्ते में चला गया है। बताया जाता है कि गोमतीनगर पुलिस की यह पहली नाकामी नहीं है। इससे पहले मिठाई वाला चौराहे पर हुए रितेश अवस्थी हत्याकांड का भी आज तक खुलासा नहीं हो सका है।
(रिपोर्टः संदीप शुक्ला, लखनऊ)
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