कौशांबी में विधिक जागरूकता की पहल: अधिकार मित्रों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण, उत्कृष्ट कार्यकर्ताओं का सम्मान
कौशांबी में विभिन्न जिलों के अर्ध-कानूनी स्वयंसेवकों की कानूनी जागरूकता और कौशल को बढ़ाने के लिए क्लस्टर-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कौशांबी में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पराविधिक स्वयंसेवकों (अधिकार मित्रों) के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह एक दिवसीय क्लस्टर आधारित ‘संवर्धन’ कार्यक्रम का दूसरा चरण था, जिसमें कई जिलों के स्वयंसेवकों ने भाग लिया। यह कार्यक्रम सम्राट उदयन सभागार, कलेक्ट्रेट कौशांबी में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकार मित्रों को विधिक सेवा कानूनों के प्रति और अधिक जागरूक और संवेदनशील बनाना था। कार्यक्रम में कौशांबी के साथ-साथ फतेहपुर, प्रतापगढ़, बांदा और चित्रकूट के प्रतिभागी शामिल हुए।
जनपद न्यायाधीश ने किया शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जे. पी. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी मंझनपुर, तहसीलदार मंझनपुर, क्षेत्राधिकारी चायल और नायब तहसीलदार चायल भी उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र में सभी अतिथियों ने कार्यक्रम की सराहना की और इसे उपयोगी बताया।
उत्कृष्ट स्वयंसेवकों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान प्रत्येक जिले से दो-दो पराविधिक स्वयंसेवकों को सर्वश्रेष्ठ कार्य के लिए सम्मानित किया गया। कौशांबी से ममता दिवाकर और अमरदीप दिवाकर को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान अन्य जिलों के सचिवों की उपस्थिति में प्रदान किया गया।
प्रशिक्षण का उद्देश्य और महत्व
जनपद एवं सत्र न्यायाधीश जे. पी. यादव ने बताया कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य पीएलवी को कानूनी सेवाओं के प्रति जागरूक बनाना है। इससे वे आम जनता तक न्याय पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव प्रिया सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अभ्यास, भूमिका अभिनय और कानूनी मामलों पर चर्चा भी शामिल की गई।
विभिन्न कानूनों और योजनाओं की दी गई जानकारी
कार्यक्रम में स्वयंसेवकों को बाल कल्याण योजनाएं 2024, यौन शोषण और मानव तस्करी से संबंधित कानून, एसिड अटैक पीड़ितों के लिए योजना 2016, लीगल एड क्लीनिक रेगुलेशन 2011 और अन्य सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। इसके अलावा किशोर न्याय अधिनियम, महिलाओं के सुरक्षा कानून, कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम 2013 और पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने दी अहम जानकारी
कार्यक्रम में कई विशेषज्ञों ने रिसोर्स पर्सन के रूप में भाग लिया, जिनमें देवेंद्र कुमार, आनंद केसरवानी, रवि प्रकाश मौर्य, मो. रेहान, रामा मिश्रा, कमलेश चंद्र, बेबी नाज, उपनिरीक्षक अर्चना चौबे और विंध्यवासिनी शामिल रहे। अपर जिला जज पूर्णिमा प्रांजल ने पॉक्सो एक्ट 2012 पर जानकारी देते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम पीएलवी को मजबूत बनाते हैं।
कार्यक्रम का समापन और धन्यवाद
कार्यक्रम का संचालन अमित कुमार और मो. अख्तर खान ने किया। अंत में सचिव प्रिया सिंह ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कानूनी साक्षरता और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी बढ़ाने में काफी उपयोगी साबित हुआ।
(रिपोर्टः राम किशन, कौशांबी)
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