काशी से गूंजा गऊ रक्षा का शंखनाद… शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले- अब धर्मयुद्ध के लिए तैयार रहो
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए वाराणसी से अभियान शुरू किया है। यह यात्रा जौनपुर, सुल्तानपुर होते हुए रायबरेली तक जाएगी और इसमें बड़ी संख्या में समर्थक शामिल हैं।
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। शनिवार सुबह वाराणसी के विद्या मठ से उन्होंने “गऊ प्रतिष्ठार्थ धर्म युद्ध” अभियान की औपचारिक शुरुआत की। इस अभियान की शुरुआत समर शंख फूंककर की गई। यह यात्रा धार्मिक होने के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसका संदेश समाज और सत्ता दोनों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
गौ पूजन और मंदिर दर्शन के साथ यात्रा का शुभारंभ
इस अभियान की शुरुआत पूरी तरह धार्मिक विधि-विधान के साथ हुई। सुबह करीब 8:30 बजे शंकराचार्य ने विद्या मठ की गौशाला में गौ पूजन किया। इसके बाद वे चिंतामणि गणेश मंदिर पहुंचे, जहां लगभग 15 मिनट तक विशेष पूजा-अर्चना की और यात्रा की अनुमति मांगी। इसके बाद उन्होंने संकट मोचन मंदिर में बजरंग बाण का पाठ किया। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद सुबह करीब 9:30 बजे उनका काफिला वाराणसी के लंका और बाबतपुर के रास्ते जौनपुर के लिए रवाना हो गया।
काशी से रायबरेली तक दिलचस्प यात्रा मार्ग
इस यात्रा का मार्ग भी काफी चर्चा में है। यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी से शुरू हुई है और अपने पहले रात्रि विश्राम के लिए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली पहुंचेगी। शंकराचार्य के साथ उनके प्रमुख शिष्य मुकुंदानंद सहित करीब 50 परिकरों का दल यात्रा में शामिल है। इसके साथ ही लगभग 25 गाड़ियों का बड़ा काफिला भी उनके साथ चल रहा है।
जिंदा हिंदू लखनऊ चलो का दिया नारा
मीडिया से बातचीत करते हुए शंकराचार्य ने इस अभियान को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि आज गाय की रक्षा के लिए धर्मयुद्ध करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अब हिंदू समाज चुप नहीं बैठेगा। इस अभियान को “जिंदा हिंदू लखनऊ चलो” का नारा दिया गया है। उनके अनुसार इस नारे का उद्देश्य समाज और सत्ता दोनों को जागरूक करना है।
जनसभाओं के जरिए लोगों से समर्थन की अपील
यात्रा के दौरान शंकराचार्य जौनपुर और सुल्तानपुर में जनसभाओं को भी संबोधित करेंगे। इसके बाद उनका काफिला रायबरेली पहुंचेगा, जहां पहला रात्रि विश्राम होगा। इस अभियान को लेकर अब सभी की नजर इस बात पर है कि आम जनता और राजनीतिक दलों से इसे कितना समर्थन मिलता है। फिलहाल यह यात्रा धार्मिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गई है।
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