गोमतीनगर में मोहम्मद तारिक हत्याकांड: दस साल बाद भी कातिलों तक नहीं पहुंच सकी पुलिस

लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में गैंगस्टर मुन्ना बजरंग के करीबी सहयोगी मोहम्मद तारिक की 2017 में हुई हत्या कई पुलिस जांचों के बावजूद वर्षों बाद भी अनसुलझी बनी हुई है।

Mar 7, 2026 - 15:35
Mar 7, 2026 - 17:54
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गोमतीनगर में मोहम्मद तारिक हत्याकांड: दस साल बाद भी कातिलों तक नहीं पहुंच सकी पुलिस

राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में हुई मोहम्मद तारिक हत्याकांड की गुत्थी करीब एक दशक बाद भी नहीं सुलझ पाई है। यह घटना 1 दिसंबर 2017, शुक्रवार की शाम करीब पांच बजे की है। उस समय नगर निकाय चुनाव की मतगणना चल रही थी और पूरा शहर सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच छावनी में तब्दील था। तभी पुलिस के वायरलेस पर सूचना प्रसारित हुई कि मुन्ना बजरंगी के करीबी माने जाने वाले मोहम्मद तारिक की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। यह खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।

शहीद पथ के पास खून से लथपथ मिला था शव
घटना ग्वारी गांव शहीद पथ के पास किनारे हुई थी। सूचना मिलते ही तत्कालीन एसएसपी समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। वहां तारिक का शव खून से लथपथ हालत में पड़ा मिला और आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे। हमलावरों ने तारिक पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं थीं, जिससे उसका शरीर गोलियों से छलनी हो गया था। इस सनसनीखेज हत्या के बाद पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की और दावा किया था कि हत्यारों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

पुलिस ने कई संदिग्धों से की पूछताछ
इस मामले की जांच के लिए तत्कालीन सीओ गोमतीनगर दीपक कुमार सिंह के नेतृत्व में कई पुलिस टीमें बनाई गईं। इन टीमों ने अलग-अलग जगहों पर जाकर हत्यारों की तलाश शुरू की। पुलिस ने शक के आधार पर कई संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर उनसे लंबी पूछताछ भी की। जांच के दौरान पुलिस ने वाराणसी, गोरखपुर और पूर्वांचल के कई जिलों में सक्रिय सूचीबद्ध बदमाशों की भी जानकारी जुटाई। जेल में बंद अपराधियों की गतिविधियों और उनके संबंधों की भी पड़ताल की गई, लेकिन कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा।

बाइक सवार बदमाशों ने बरसाई थीं गोलियां
जांच के दौरान पुलिस और उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल की टीमों ने कई बार घटनास्थल का निरीक्षण किया। स्थानीय लोगों के अनुसार, उस दिन शाम करीब पांच बजे तारिक अपनी टोयोटा फॉर्च्यूनर कार से ग्वारी फ्लाईओवर के पास पहुंचा था। तभी पीछे से आए असलहों से लैस मोटरसाइकिल सवार बदमाशों ने उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। बताया जाता है कि हमले से बचने के लिए तारिक ने गाड़ी को पुल की ओर दौड़ाने की कोशिश की, लेकिन बदमाशों ने उसे घेर लिया और गोलियों की बौछार कर उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद हमलावर कुछ ही मिनटों में मौके से फरार हो गए।

करीब एक दशक बाद भी नहीं सुलझी गुत्थी
घटना के बाद पुलिस अधिकारियों ने हत्यारों को पकड़ने के लिए कई दिशानिर्देश जारी किए और टीमें गठित कीं। पुलिस ने इस मामले में पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन समय बीतने के साथ जांच कई बार दिशा बदलती रही। करीब दस साल गुजर जाने के बाद भी पुलिस हत्यारों तक नहीं पहुंच सकी है। इससे यह माना जा रहा है कि पुलिस ने इस मामले में लगभग चुप्पी साध ली है। बताया जाता है कि गोमतीनगर क्षेत्र में यह पहला मामला नहीं है जो अब तक अनसुलझा है। मिठाईवाला चौराहा पर हुए रितेश अवस्थी हत्याकांड का भी आज तक खुलासा नहीं हो सका है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं।

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Sandeep Shukla संदीप शुक्ला UP News Network क्राइम रिपोर्टर, पिछले एक साल से UP News Network के साथ जुड़ कर कार्य कर रहा हूँ। मीडिया जगत में इससे पहले| Ex-NewsNation | Ex-We news portal |Ex Prime Tv | Ex- apnnews क्राइम रिपोर्टर रह कर कार्य कर चुका हूं। मीडिया लाइन में मुझे कार्य करते हुये 10 वर्ष हो चुके है। मैं प्रॉपर लखनऊ के निवासी हूँ।