37 साल से बिना सोए साधना, 16 साल तक अन्न का त्याग… बागपत के इस महंत की कठोर तपस्या ने दुनिया को किया हैरान
बागपत के डूंडाहेड़ा स्थित श्री बालाजी धाम इन दिनों आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है। यहां के संस्थापक भैया दास जी महाराज पिछले 37 वर्षों से कठोर तपस्या कर रहे हैं। 21 दिन की परिक्रमा और सेवा कार्यों के कारण यहां देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले का डूंडाहेड़ा गांव इन दिनों देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है। यहां स्थित श्री बालाजी धाम की ख्याति सात समंदर पार तक पहुंच चुकी है। इस धाम की विशेष पहचान इसके संस्थापक महामंडलेश्वर भैया दास जी महाराज की 37 वर्षों से जारी कठिन तपस्या है। महाराज जी का दावा है कि उन्होंने इतने लंबे समय में कभी लेटकर विश्राम नहीं किया। उनकी साधना, सेवा कार्य और 21 दिन की परिक्रमा की मान्यता ने इस स्थान को श्रद्धालुओं के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं।
37 वर्षों की कठोर तपस्या ने बढ़ाई ख्याति
धाम के संस्थापक महामंडलेश्वर भैया दास जी महाराज पिछले 37 वर्षों से राष्ट्र कल्याण और विश्व शांति के लिए तपस्या में लीन हैं। उनका कहना है कि उन्होंने इन वर्षों में कभी लेटकर आराम नहीं किया। वे या तो बैठकर साधना करते हैं या खड़े रहकर भगवान हनुमान का स्मरण करते हैं। उनका मानना है कि प्रभु का नाम ही उनके लिए विश्राम के समान है। उनकी तपस्या के कई पड़ाव भक्तों को चौंकाते हैं।
अन्न त्याग, मौन व्रत और लंबी यात्राएं
बताया जाता है कि महाराज जी ने 16 वर्षों तक अन्न त्याग कर केवल फलाहार और तरल पदार्थों पर जीवन बिताया। इसके अलावा उन्होंने साढ़े तीन साल तक मौन व्रत रखा। उन्होंने करीब 45 हजार किलोमीटर की यात्रा भी की। उनकी साधना में 21 दिन की विशेष परिक्रमा और ‘सीताराम’ नाम का जाप भी शामिल है, जिसे भक्त बेहद श्रद्धा से करते हैं।
21 दिन की परिक्रमा की विशेष मान्यता
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि श्री बालाजी धाम में आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। यहां 21 दिन तक लगातार ‘सीताराम’ नाम का जाप करते हुए परिक्रमा करने की परंपरा है। भक्तों का मानना है कि इससे बड़ी से बड़ी मनोकामना पूरी हो जाती है।
सेवा कार्यों से भी जुड़ा है धाम
करीब 18 साल पहले स्थापित इस धाम में पूजा-पाठ के साथ सेवा कार्य भी किए जाते हैं। यहां एक विशाल गौशाला है, जहां सैकड़ों गायों की सेवा होती है। प्रतिदिन अखंड भंडारे का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। अब यहां विदेशों से भी लोग दर्शन करने पहुंच रहे हैं।
राष्ट्र और विश्व शांति के लिए साधना
महाराज जी का कहना है कि उनकी तपस्या व्यक्तिगत नहीं, बल्कि देश की उन्नति और विश्व शांति के लिए है। उनका विश्वास है कि आश्रम में होने वाले चमत्कार भगवान हनुमान की कृपा से ही संभव हैं।
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