योगी का ऐलान, कसारी-मसारी अब कहलाएगा श्रीकृष्ण पुरी, अतीक अहमद के इलाके में 602 फ्लैट बनेंगे, गरीबों को मिलेंगे 2BHK मकान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके का नाम बदलकर श्रीकृष्ण पुरी करने का ऐलान किया है। गुरुवार को प्रयागराज में उन्होंने कहा कि कसारी-मसारी नाम कसाइयों वाला लगता था। इसी दौरान सीएम ने अतीक अहमद और उसके करीबियों के कब्जे से मुक्त कराई गई सरकारी जमीन पर बनने वाली आवासीय परियोजना का भूमिपूजन किया। प्रयागराज विकास प्राधिकरण की इस योजना में 9,811 वर्गमीटर जमीन पर 14 मंजिला इमारतें बनाई जाएंगी, जिनमें 602 फ्लैट होंगे। प्रत्येक फ्लैट में दो बेडरूम, हॉल और किचन होगा।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके का नाम बदलकर श्रीकृष्ण पुरी करने का ऐलान किया है। गुरुवार को प्रयागराज में उन्होंने कहा कि कसारी-मसारी नाम कसाइयों वाला लगता था। इसी दौरान सीएम ने उस सरकारी जमीन पर बनने वाले आवासीय प्रोजेक्ट का भूमिपूजन भी किया, जिसे अतीक अहमद और उसके करीबियों के कब्जे से मुक्त कराया गया था। सरकार इस जमीन पर गरीब परिवारों के लिए फ्लैट बनवा रही है। योगी ने कहा कि कभी माफिया अतीक और अशरफ जिस जमीन पर पैर रखते थे, वह उनकी हो जाती थी और प्रदेश सरकार उनके सामने घुटने टेक देती थी। उन्होंने कहा कि अब उसी जमीन पर गरीबों के लिए आशियाने बनाए जा रहे हैं।
14 मंजिला इमारतों में बनेंगे 602 फ्लैट
प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) की इस आवासीय परियोजना के लिए 9,811 वर्गमीटर जमीन निर्धारित की गई है। यहां 14 मंजिला इमारतें बनाई जाएंगी, जिनमें कुल 602 फ्लैट होंगे। हर फ्लैट में दो बेडरूम, हॉल और किचन की सुविधा होगी। एक फ्लैट का क्षेत्रफल 56.45 वर्गमीटर रखा गया है। परियोजना में पार्किंग, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और सोलर सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा स्विमिंग पूल, कम्युनिटी हॉल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स जैसी सुविधाएं देने की योजना है। यह परियोजना उस सरकारी जमीन के इस्तेमाल से जुड़ी है, जिसे प्रशासन ने अतीक अहमद और उसके करीबियों के कब्जे से मुक्त कराने की कार्रवाई के बाद आवासीय योजना के लिए उपलब्ध कराया।
अतीक अहमद का पुराना इलाका रहा है कसारी-मसारी
कसारी-मसारी प्रयागराज के पुराने इलाकों में गिना जाता है। अतीक अहमद का इस क्षेत्र से पुराना संबंध था और उसका घर भी पहले इसी इलाके में बताया जाता है। बाद में उसके घर से जुड़ा क्षेत्र चकिया के नाम से ज्यादा पहचाना जाने लगा। अतीक अहमद, उसके भाई अशरफ और पिता को कसारी-मसारी इलाके के कब्रिस्तान में दफनाया गया था। इस क्षेत्र में अतीक की पुश्तैनी जमीनें भी थीं और उसके कई रिश्तेदार यहां रहते थे।
कसारी-मसारी को मुस्लिम गद्दी बिरादरी का प्रमुख इलाका माना जाता है। यहां पुश्तैनी जमीनों पर प्लॉटिंग भी हुई। स्थानीय स्तर पर कई लोगों ने इन प्लॉटों को खरीदकर मकान बनाए और रहने लगे। इस तरह इलाके में अलग-अलग परिवारों की रिहाइश विकसित हुई।
कसारी-मसारी नाम कैसे पड़ा?
स्थानीय बुजुर्गों के मुताबिक, कसारी और मसारी दो सगे भाई थे। उन्हें सूफी संत या फकीर माना जाता था। बताया जाता है कि दोनों मूल रूप से फैजाबाद, जिसे अब अयोध्या कहा जाता है, के रहने वाले थे और बाद में प्रयागराज आकर बस गए। स्थानीय मान्यता के अनुसार, लोगों की सेवा करने के कारण दोनों भाई इलाके में लोकप्रिय हो गए थे। उनके निधन के बाद उन्हें इसी क्षेत्र में दफनाया गया। कहा जाता है कि उनकी याद में इलाके का नाम कसारी-मसारी पड़ गया। आज भी यहां स्थित कब्रिस्तान को कसारी-मसारी कब्रिस्तान के नाम से जाना जाता है। हालांकि, नाम की उत्पत्ति से जुड़ा यह विवरण स्थानीय लोगों के बीच प्रचलित मान्यता पर आधारित है।
नाम बदलने के ऐलान के साथ विकास परियोजना भी चर्चा में
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह ऐलान दो वजहों से चर्चा में है। पहली, कसारी-मसारी का नाम बदलकर श्रीकृष्ण पुरी करने की घोषणा और दूसरी, अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर गरीब परिवारों के लिए आवासीय परियोजना का भूमिपूजन। प्रस्तावित योजना में 602 फ्लैटों के साथ कई सामुदायिक सुविधाएं भी शामिल हैं। हालांकि, फ्लैटों के आवंटन, कीमत और पात्रता से संबंधित जानकारी के लिए प्रयागराज विकास प्राधिकरण की आधिकारिक घोषणा देखना जरूरी होगा।
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