बंगाल में 6 दिन बाद से क्यों मचेगी नवरात्रि की धूम, 11 अक्टूबर से शुरुआत लेकिन 17 से सजेगी दुर्गा पूजा की रौनक, जानिए क्यों है तारीखों में अंतर

शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है, जबकि पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा का प्रमुख सार्वजनिक उत्सव 17 अक्टूबर से शुरू होगा। दोनों तारीखों में अंतर की वजह पूजा की अलग-अलग परंपराएं और अनुष्ठान हैं। नवरात्रि के पहले दिन देश के कई हिस्सों में कलश स्थापना, व्रत और मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। पश्चिम बंगाल सरकार के कैलेंडर में 16 अक्टूबर को महापंचमी और 17 अक्टूबर को महाषष्ठी दर्ज है, जबकि जयरामबाटी मातृ मंदिर के कार्यक्रम में 16 अक्टूबर को षष्ठी और कल्पारंभ का उल्लेख मिलता है। बेलूर मठ में प्रतिपदा से षष्ठी तक आगमनी गीत गाने की परंपरा भी इस बात को दिखाती है कि बंगाल में धार्मिक गतिविधियां पहले से शुरू हो सकती हैं। घर में पूजा करने वाले श्रद्धालुओं और बंगाल में दुर्गा पूजा देखने जाने वाले लोगों के लिए स्थानीय पंचांग और आधिकारिक कार्यक्रम की तारीखों की पुष्टि करना जरूरी है।

Oct 9, 2026 - 15:30
Oct 9, 2026 - 15:31
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बंगाल में 6 दिन बाद से क्यों मचेगी नवरात्रि की धूम, 11 अक्टूबर से  शुरुआत लेकिन 17 से सजेगी दुर्गा पूजा की रौनक, जानिए क्यों है तारीखों में अंतर

शारदीय नवरात्रि 2026 में 11 अक्टूबर से शुरू हो रही है, जबकि पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के बड़े सार्वजनिक उत्सव की शुरुआत 17 अक्टूबर से होगी। ऐसे में कैलेंडर में दोनों तारीखें देखकर लोगों के मन में सवाल उठ सकता है कि जब पूजा मां दुर्गा की ही है, तो तारीखों में इतना अंतर क्यों है? इसकी वजह पूजा की परंपराओं और अलग-अलग चरणों में है। देश के अधिकतर हिस्सों में नवरात्रि की शुरुआत आश्विन शुक्ल प्रतिपदा पर कलश स्थापना के साथ होती है। बंगाल में भी इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान होते हैं, लेकिन दुर्गा पूजा के प्रमुख पंडाल, सार्वजनिक आयोजन और उत्सव महाषष्ठी से रफ्तार पकड़ते हैं। साल 2026 में पश्चिम बंगाल सरकार के पूजा कैलेंडर में 16 अक्टूबर को महापंचमी और 17 अक्टूबर को महाषष्ठी दर्ज है।

11 अक्टूबर से शुरू होगी शारदीय नवरात्रि
पंचांग के अनुसार, 11 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल प्रतिपदा के साथ शारदीय नवरात्रि शुरू होगी। इसी दिन देश के अनेक हिस्सों में शुभ मुहूर्त में घटस्थापना या कलश स्थापना की जाएगी। श्रद्धालु घरों और मंदिरों में पूजा शुरू करेंगे, अखंड ज्योति जलाएंगे और अपनी परंपरा के अनुसार व्रत का संकल्प लेंगे। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। कलश स्थापना के साथ नौ दिनों की उपासना, दुर्गा सप्तशती का पाठ, आरती और अन्य धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो जाते हैं। इसलिए घर में नवरात्रि का व्रत रखने या पूजा करने वाले श्रद्धालुओं को बंगाल के सार्वजनिक दुर्गा पूजा कार्यक्रमों की शुरुआत का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। उनकी पूजा प्रतिपदा से ही शुरू हो सकती है। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार जांचना चाहिए। 

बंगाल में 16 और 17 अक्टूबर की तारीख क्यों महत्वपूर्ण है?
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा का उत्सव कई दिनों तक चलता है। इस दौरान पूजा के अलग-अलग चरण होते हैं और महाषष्ठी से पंडालों में उत्सव का माहौल खास तौर पर दिखाई देने लगता है। लोग सजाए गए पंडालों में मां दुर्गा के दर्शन करने पहुंचते हैं, सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं और ढाक की थाप के साथ उत्सव की रौनक बढ़ती है। हालांकि, तारीखों को लेकर एक जरूरी अंतर समझना चाहिए। पश्चिम बंगाल सरकार के आधिकारिक पूजा कैलेंडर में 16 अक्टूबर को महापंचमी और 17 अक्टूबर को महाषष्ठी बताया गया है। वहीं, जयरामबाटी के श्री श्री मातृ मंदिर के 2026 के कार्यक्रम में 16 अक्टूबर को षष्ठी और कल्पारंभ का उल्लेख है। अलग-अलग पंचांगों और पूजा कार्यक्रमों में तिथि के उल्लेख में अंतर दिख सकता है, इसलिए यात्रा या किसी खास मंदिर के दर्शन की योजना बनाते समय उसी स्थान का आधिकारिक कार्यक्रम देखना बेहतर है।

कल्पारंभ, बोधन और अधिवास का क्या अर्थ है?
बंगाल की दुर्गा पूजा में कई पारंपरिक अनुष्ठान किए जाते हैं। कल्पारंभ पूजा के संकल्प और विधिवत शुरुआत से जुड़ा है। बोधन का अर्थ देवी का जागरण या आह्वान करना है। आमंत्रण और अधिवास भी पूजा की परंपरा के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। इन अनुष्ठानों के समय और क्रम का पालन स्थानीय परंपरा और पंचांग के अनुसार किया जाता है। जयरामबाटी स्थित श्री श्री मातृ मंदिर के 2026 के कार्यक्रम में 16 अक्टूबर को कल्पारंभ और शाम को बोधन का उल्लेख है। 17 अक्टूबर को पूजा के साथ आमंत्रण और अधिवास का कार्यक्रम दिया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि अलग-अलग धार्मिक संस्थानों की अपनी घोषित पूजा-सारणी हो सकती है। इसलिए केवल एक कैलेंडर की तारीख देखकर पूरे बंगाल की पूजा-विधि के बारे में निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।

क्या बंगाल में 11 अक्टूबर से पूजा नहीं होती?
ऐसा मानना सही नहीं होगा कि बंगाल में मां दुर्गा की उपासना 11 अक्टूबर से शुरू ही नहीं होती। बेलूर मठ में महालया के बाद प्रतिपदा से षष्ठी तक आगमनी गीत गाने की परंपरा है। इन गीतों में मां उमा के अपने मायके आने की भावना व्यक्त होती है। बेलूर मठ के अनुसार, साधु और ब्रह्मचारी प्रतिपदा से षष्ठी तक सुबह एकत्र होकर आगमनी गीत गाते हैं। इसलिए बंगाल में भी प्रतिपदा से धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां शुरू हो सकती हैं। फर्क मुख्य रूप से दुर्गा पूजा के सार्वजनिक उत्सव, पंडालों की रौनक और प्रमुख अनुष्ठानों के समय का है। 

अकाल बोधन की परंपरा और मां दुर्गा के मायके आने की मान्यता
बंगाल की दुर्गा पूजा से अकाल बोधन की धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। परंपरागत कथा के अनुसार, भगवान राम ने रावण से युद्ध के दौरान विजय प्राप्त करने के लिए शरद ऋतु में मां दुर्गा की विशेष आराधना की थी। इसे अकाल बोधन कहा जाता है, यानी परंपरागत समय से अलग देवी का आह्वान करना। बंगाल में दुर्गा पूजा का भाव मां के अपने मायके आने की कल्पना से भी जुड़ा है। मां दुर्गा को बेटी के रूप में देखा जाता है, जो अपने बच्चों के साथ मायके आती हैं। इसी वजह से आगमनी गीतों में बेटी के आगमन, मां के स्नेह और परिवार के मिलन का भाव दिखाई देता है। कोलकाता की दुर्गा पूजा को यूनेस्को ने 2021 में मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया था। इस मान्यता में पूजा से जुड़े सामुदायिक जीवन, कला और सांस्कृतिक भागीदारी का महत्व भी शामिल है।

बंगाल में दुर्गा पूजा देखने जा रहे हैं तो तारीखें जरूर जांचें
2026 में नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी, जबकि पश्चिम बंगाल सरकार के कैलेंडर के अनुसार दुर्गा पूजा की प्रमुख तिथियां 17 से 21 अक्टूबर तक हैं। महाषष्ठी 17 अक्टूबर, महासप्तमी 18 अक्टूबर, महाअष्टमी 19 अक्टूबर, महानवमी 20 अक्टूबर और विजयादशमी 21 अक्टूबर को दर्ज हैं। अगर आप घर में कलश स्थापना और व्रत की तैयारी कर रहे हैं, तो 11 अक्टूबर की तारीख महत्वपूर्ण है। वहीं, कोलकाता जाकर पंडाल घूमने, मंदिरों में दर्शन करने या किसी खास अनुष्ठान में शामिल होने की योजना बना रहे हैं, तो संबंधित पंडाल या मंदिर का आधिकारिक कार्यक्रम जरूर देख लें। इससे तारीखों को लेकर भ्रम नहीं रहेगा और यात्रा की योजना भी बेहतर तरीके से बनाई जा सकेगी।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content