चश्मे से UPI पेमेंट तो 1 मिनट में दांतों की होगी जांच, IMC 2026 में दिखे AI के 6 कमाल, फोन से लेकर हेल्थ चेकअप तक बदल सकती है जिंदगी
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में AI स्मार्टग्लास से लेकर हेल्थ कियोस्क और डेंटिस्ट रोबोट तक कई ऐसी तकनीकें प्रदर्शित की गईं, जो आम लोगों की जिंदगी आसान बना सकती हैं। रिलायंस जियो के AI स्मार्टग्लास में UPI पेमेंट और लाइव वॉइस ट्रांसलेशन जैसी सुविधाएं दिखाई गईं। क्योरबे का केयर कियोस्क कई तरह की स्वास्थ्य जांच को एक जगह उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखता है, जबकि AI डेंटल कियोस्क करीब एक मिनट में दांतों और मसूड़ों की शुरुआती जांच की रिपोर्ट देने के लिए बनाया गया है। इसके अलावा क्वालकॉम का रोबोटिक आर्म खतरनाक जगहों पर काम करने में मदद कर सकता है और PATANG ड्रोन आपदा के समय संचार व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 में ऐसी कई तकनीकें पेश की गईं, जो आने वाले समय में लोगों के रोजमर्रा के काम करने का तरीका बदल सकती हैं। अब पेमेंट करने के लिए हर बार फोन निकालने की जरूरत कम हो सकती है, तो दूसरी तरफ दांतों की शुरुआती जांच के लिए AI रोबोट मदद कर सकता है। हेल्थ चेकअप के लिए स्मार्ट कियोस्क और आवाज से काम करने वाले AI डिवाइस भी चर्चा में रहे। नई दिल्ली में 7 से 10 अक्टूबर तक आयोजित इस कार्यक्रम में कंपनियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्मार्ट वियरेबल्स और हेल्थ टेक्नोलॉजी से जुड़े कई इनोवेशन दिखाए। इनमें रिलायंस जियो के AI स्मार्टग्लास, क्योरबे का केयर कियोस्क और एक मिनट में ओरल हेल्थ रिपोर्ट देने वाला डेंटिस्ट रोबोट खास रहे। हालांकि, इनमें से कुछ तकनीकें अभी प्रदर्शन के स्तर पर हैं और उनकी कीमत व आम लोगों के लिए उपलब्धता की पूरी जानकारी सामने आना बाकी है।
जियो के AI स्मार्टग्लास से हो सकेगा UPI पेमेंट
रिलायंस जियो ने ऐसे AI स्मार्टग्लास प्रदर्शित किए, जिनमें आवाज के जरिए डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करने की सुविधा दिखाई गई। इनमें कैमरा और ऑडियो वाले अलग-अलग विकल्प शामिल हैं। कैमरा मॉडल की मदद से दुकानदार के QR कोड को स्कैन कर UPI पेमेंट शुरू करने का डेमो भी दिखाया गया। इस तकनीक का मकसद स्मार्टफोन पर निर्भरता कम करना है। यूजर आवाज के जरिए AI असिस्टेंट को निर्देश दे सकता है। स्मार्टग्लास में लाइव वॉइस ट्रांसलेशन जैसी सुविधा भी दिखाई गई, जो अलग-अलग भाषाएं समझने और संवाद करने में मदद कर सकती है। हालांकि, कंपनी ने इसकी पूरी कीमत, उपलब्धता और पेमेंट की सुरक्षा से जुड़े सभी तकनीकी विवरण सार्वजनिक नहीं किए हैं। इसलिए इसे फिलहाल प्रदर्शित की गई तकनीक के रूप में देखना चाहिए, न कि हर ग्राहक के लिए उपलब्ध सेवा के रूप में।
केयर कियोस्क से एक जगह पर 80 से ज्यादा जांच
हेल्थ टेक कंपनी क्योरबे ने केयर कियोस्क नाम का स्मार्ट हेल्थ सिस्टम दिखाया। इसे हेल्थ ATM की तरह समझा जा सकता है, जहां एक ही जगह पर कई तरह की स्वास्थ्य जांच कराने की सुविधा देने का लक्ष्य है। दिए गए विवरण के मुताबिक, इसमें ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन और लिवर प्रोफाइल सहित 80 से ज्यादा तरह की जांचों का विकल्प है। AI और सेंसर की मदद से डेटा का विश्लेषण कर डिजिटल रिपोर्ट फोन पर भेजने की व्यवस्था बताई गई है। रिपोर्ट मिलने में करीब 30 मिनट लग सकते हैं। ऐसी तकनीक अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में शुरुआती जांच को आसान बना सकती है। हालांकि, हर टेस्ट की उपलब्धता, उसकी सटीकता और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह की भूमिका को अलग-अलग समझना जरूरी होगा।
डेंटिस्ट रोबोट एक मिनट में बताएगा दांतों की स्थिति
IMC 2026 में AI आधारित डेंटल कियोस्क भी प्रदर्शित किया गया। इसका उद्देश्य दांतों और मसूड़ों की शुरुआती जांच को तेज और आसान बनाना है। इस सिस्टम में कैमरा, स्कैनिंग सेंसर और AI तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। दावा है कि रोबोटिक आर्म और कैमरा मुंह के अंदर की तस्वीरें लेकर 360 डिग्री स्कैनिंग कर सकते हैं। इसके बाद सिस्टम दांतों की सड़न, प्लाक और मसूड़ों में सूजन जैसे संकेतों का विश्लेषण करता है। इसकी खास बात जांच की रफ्तार है। प्रदर्शित तकनीक के अनुसार, करीब 60 सेकंड में रिपोर्ट स्क्रीन पर दिखाई जा सकती है और उसे वॉट्सऐप पर भी भेजा जा सकता है। इससे लोगों को दांतों से जुड़ी संभावित समस्याओं के शुरुआती संकेत मिल सकते हैं। लेकिन AI रिपोर्ट को डॉक्टर की जांच का विकल्प नहीं मानना चाहिए। बीमारी की पुष्टि और इलाज के लिए डेंटिस्ट की सलाह जरूरी रहेगी।
AI स्मार्टग्लास में लाइव ट्रांसलेशन और वॉइस असिस्टेंट
स्मार्टग्लास का इस्तेमाल सिर्फ पेमेंट तक सीमित नहीं है। इनमें AI असिस्टेंट के जरिए सवालों के जवाब लेने, आवाज के माध्यम से निर्देश देने और दूसरी भाषा में बातचीत समझने जैसी सुविधाओं पर भी काम हो रहा है। लाइव ट्रांसलेशन यात्रियों, छात्रों और अलग-अलग भाषा बोलने वाले लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है। वहीं, बिना फोन हाथ में लिए आवाज से निर्देश देने की सुविधा उन परिस्थितियों में मदद कर सकती है, जहां बार-बार स्क्रीन देखना मुश्किल होता है। फिर भी, इन सुविधाओं का वास्तविक अनुभव डिवाइस की उपलब्धता, इंटरनेट कनेक्टिविटी, भाषा समर्थन और बैटरी पर निर्भर करेगा।
ओपन आर्म रोबोट खतरनाक जगहों पर करेगा काम
क्वालकॉम ने ऐसा रोबोटिक आर्म दिखाया, जो इंसानी हाथ और बाजू की गतिविधियों की नकल करने के लिए बनाया गया है। यह कंपनी के चिपसेट और AI प्लेटफॉर्म पर आधारित है। इस तरह के रोबोट का इस्तेमाल उन जगहों पर किया जा सकता है, जहां इंसानों के लिए काम करना जोखिम भरा हो। उदाहरण के लिए, खतरनाक औद्योगिक क्षेत्रों, आपदा प्रभावित इलाकों या ऐसी जगहों पर जहां किसी वस्तु को दूर से पकड़ना और संभालना जरूरी हो। रोबोटिक आर्म की उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कितनी सटीकता से काम कर सकता है, उसे कैसे नियंत्रित किया जाता है और अलग-अलग परिस्थितियों में उसकी सुरक्षा व्यवस्था कैसी है।
PATANG ड्रोन आपदा के समय देगा नेटवर्क
रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनी एस्टेरिया एयरोस्पेस का PATANG ड्रोन आपदा के समय संचार व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैयार किया गया है। बाढ़, भूकंप या तूफान जैसी आपदाओं में मोबाइल टावरों को नुकसान पहुंचने से संपर्क टूट सकता है। ऐसी स्थिति में हवा में लंबे समय तक टिकने वाला ड्रोन अस्थायी संचार नेटवर्क उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है। इसमें संचार उपकरणों के साथ 4K कैमरा भी दिया गया है। कैमरे की मदद से प्रभावित इलाके पर नजर रखने और राहत कार्यों में सहायता मिलने की संभावना है। ड्रोन का इस्तेमाल कहां और किस नेटवर्क तकनीक के साथ किया जा सकेगा, यह उसकी तैनाती और उपलब्ध व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
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