प्यार की अनोखी जीत… 9 महीने की बच्ची की मौजूदगी में हुई मां-बाप की शादी, कहानी कर देगी भावुक
औरंगाबाद की युवती ने समाज के विरोध के बावजूद बच्चे को जन्म दिया और कोर्ट की मदद से अपने प्रेमी से शादी कर अपने हक की लड़ाई जीत ली।
बिहार के औरंगाबाद जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने प्रेम, संघर्ष और एक मां के साहस को नई पहचान दी है। एक युवती ने समाज के तानों और मुश्किल हालातों के बावजूद अपने प्यार और अपने बच्चे के हक के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। करीब एक साल के इंतजार के बाद आखिरकार उसे उसका प्यार मिल गया। कोर्ट के हस्तक्षेप से युवक को जमानत मिली और दोनों की शादी भी हो गई। यह मामला अब सिर्फ प्रेम कहानी नहीं, बल्कि एक मां के हौसले और अधिकार की लड़ाई बन गया है।
छिप-छिपकर शुरू हुआ प्यार
युवती और पास के गांव के एक युवक के बीच प्रेम संबंध था। दोनों चोरी-छिपे मिलते और फोन पर बात करते थे। लेकिन परिवार वालों को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। इसी दौरान नाबालिग युवक अपनी प्रेमिका को लेकर दिल्ली भाग गया।
पुलिस कार्रवाई और अलगाव
युवती के परिजनों ने युवक पर अपहरण का मामला दर्ज कराया। पुलिस ने जांच शुरू की और महज 8 दिन में दोनों को दिल्ली से बरामद कर लिया। इसके बाद युवक को जेल भेज दिया गया, जबकि युवती को उसके घर वापस भेज दिया गया।
गर्भावस्था और बड़ा फैसला
घर लौटने के कुछ दिनों बाद युवती को पता चला कि वह गर्भवती है। समाज के तानों और दबाव के बावजूद उसने बच्चे को जन्म देने का फैसला किया। उसने एक बेटी को जन्म दिया और अपने प्यार को पाने के लिए कोर्ट में गुहार लगाई।
कोर्ट का मानवीय रुख
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अगर दोनों परिवार शादी के लिए तैयार होकर लिखित समझौता देते हैं, तो युवक को जमानत दी जा सकती है। इस फैसले से युवती को नई उम्मीद मिली। करीब 8 महीने बाद युवक को जेल से रिहा कर दिया गया।
बेटी बनी शादी की गवाह
रिहाई के बाद दोनों की शादी कोर्ट परिसर के मंदिर में कराई गई। 9 महीने की मासूम बेटी इस शादी की गवाह बनी। यह सिर्फ एक शादी नहीं, बल्कि एक मां के संघर्ष और उसके हौसले की जीत की कहानी है।
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