अयोध्या में मऊशिवाला एमआरएफ सेंटर शुरू, अब रोजाना 10 टन कूड़े का होगा निस्तारण
अयोध्या के मौ शिवाला में स्थापित नई सामग्री पुनर्प्राप्ति सुविधा प्रतिदिन 10 टन कचरे का प्रसंस्करण करेगी, जिससे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और पुनर्चक्रण प्रयासों में सुधार होगा।
अयोध्या में नगर को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए नगर निगम ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मऊशिवाला में मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर का पुनर्विकास कर उसे शुरू किया गया है। इस केंद्र के माध्यम से ठोस कचरे के बेहतर प्रबंधन की व्यवस्था की गई है। इस परियोजना का संचालन स्वयंसेवी संस्था चिंतन पर्यावरण अनुसंधान और कार्य समूह करेगी। इस एमआरएफ सेंटर का उद्घाटन अयोध्या के महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने समारोहपूर्वक किया। इस पहल का उद्देश्य शहर में कूड़ा प्रबंधन को बेहतर बनाना और स्वच्छता को बढ़ावा देना है।
कई अधिकारी और संस्थाओं के प्रतिनिधि रहे मौजूद
इस अवसर पर नगर निगम और अन्य संस्थाओं के कई अधिकारी और प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में अपर नगर आयुक्त भारत भार्गव, सहायक नगर आयुक्त गुरु प्रसाद पांडेय, एसबीआई फाउंडेशन के प्रबंध निदेशक स्वप्न धर, रितेश सेन और मुस्कान शर्मा भी उपस्थित थे। इसके अलावा चिंतन संस्था की संस्थापक और निदेशक भारती चतुर्वेदी के साथ अपूर्व अग्रवाल, मोहित गर्ग, आलोक सिंह राणा, एकता भटनागर, विमल कुमार और विनय कुमार भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
चार वार्डों के कचरे का होगा प्रबंधन
नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश पांडेय ने बताया कि मऊशिवाला में स्थापित यह एमआरएफ सेंटर शहर के चार वार्डों से आने वाले कचरे का प्रबंधन करेगा। इनमें शिवनगर, चित्रगुप्तनगर, कृष्णानगर और लाला लाजपत राय नगर शामिल हैं। इन क्षेत्रों से एकत्रित कचरे को इस केंद्र पर लाकर अलग-अलग किया जाएगा। प्लास्टिक, कागज और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा।
गीले कचरे से बनेगी जैविक खाद
इस केंद्र में घरों से आने वाले गीले कचरे को कम्पोस्टिंग प्रक्रिया के जरिए जैविक खाद में बदला जाएगा। तैयार होने वाली यह खाद पौधारोपण और शहर में हरियाली बढ़ाने के काम आएगी। इस तरह कचरे का सही उपयोग भी हो सकेगा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
प्रतिदिन 10 टन कूड़ा निस्तारण की क्षमता
नगर निगम के अनुसार इस केंद्र के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 10 टन कूड़े का निस्तारण किया जा सकेगा। इस काम के लिए चिंतन संस्था ने 14 कर्मचारियों की तैनाती की है। अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना की मदद से हर साल लगभग साढ़े आठ लाख किलोग्राम कचरे को लैंडफिल में जाने से रोका जा सकेगा।
स्वच्छता रैंकिंग में सुधार की उम्मीद
महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने कहा कि इस पहल से शहर के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूती मिलेगी और अयोध्या स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर स्थान हासिल कर सकेगा। उन्होंने एसबीआई फाउंडेशन के अभियान “वेस्ट नो मोर इन अयोध्या” को सफल बनाने के लिए जनता के सहयोग की भी अपील की। उनका कहना है कि भविष्य में यह केंद्र अन्य शहरों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकता है।
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