परंपरा से नहीं होगा समझौता… संभल केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त रुख, जानें पूरा मामला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल मामले में कहा कि निजी परिसर में प्रार्थना पर रोक नहीं लगाई जा सकती और विवादित स्थल को मस्जिद नहीं माना जा सकता।

Mar 19, 2026 - 09:42
 0
परंपरा से नहीं होगा समझौता… संभल केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त रुख, जानें पूरा मामला

Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि किसी भी व्यक्ति के निजी परिसर में प्रार्थना या धार्मिक आयोजन पर रोक नहीं लगाई जा सकती, चाहे वह किसी भी धर्म को मानता हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि जिस स्थान को मस्जिद बताया जा रहा है, वह वर्तमान में मस्जिद नहीं है। इस मामले में अदालत ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी भी जताई और कानून व्यवस्था बनाए रखने को लेकर सख्त टिप्पणी की। यह फैसला धार्मिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक जिम्मेदारी दोनों को लेकर अहम माना जा रहा है।

निजी परिसर में प्रार्थना का अधिकार
हाईकोर्ट की दो जजों की बेंच, जिसमें जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन शामिल थे, ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को अपने निजी परिसर में पूजा या नमाज करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि इस अधिकार पर कोई रोक नहीं लगाई जा सकती।

मस्जिद होने पर उठे सवाल
कोर्ट ने मामले में पेश की गई तस्वीरों को देखने के बाद कहा कि जिस ढांचे को मस्जिद कहा जा रहा है, वह वास्तव में एक दो मंजिला मकान है और इसे मस्जिद नहीं कहा जा सकता। हालांकि यह भी माना गया कि वहां पहले नमाज अदा की जाती रही है, इसलिए नमाज पढ़ने पर रोक नहीं होगी।

प्रशासन पर सख्त टिप्पणी
इस मामले में संभल के पुलिस अधीक्षक (SP) और जिलाधिकारी (DM) ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए नमाजियों की संख्या 20 तक सीमित कर दी थी। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि अधिकारी कानून का शासन स्थापित नहीं कर सकते तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए या ट्रांसफर करवा लेना चाहिए।

याचिकाकर्ता और सरकार का पक्ष
संभल निवासी मुनाजिर खान ने याचिका दायर कर कहा था कि रमजान के दौरान बड़ी संख्या में नमाजियों को आने से रोका गया। उन्होंने यह भी बताया कि 1995 में उनके बाबा ने इस स्थान को मस्जिद के रूप में बनवाया था। वहीं, राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि वह किसी की निजी संपत्ति में धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप नहीं करती और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा उपलब्ध कराती है।

विविधता पर कोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में भारत की विविधता की सराहना करते हुए कहा कि 1.4 अरब की आबादी वाले इस देश की खूबसूरती इसकी धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई विविधता में है, जहां सदियों से अलग-अलग धर्म और संस्कृतियां साथ-साथ रह रही हैं।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0
Ashwani Tiwari अश्वनी तिवारी, UP News Network में सब-एडिटर हैं। वे राजनीति, क्राइम, स्पोर्ट्स, ज्योतिष और धार्मिक विषयों से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से काम करते हैं। मीडिया जगत में उन्हें 2 वर्ष का अनुभव है। उन्होंने रिपोर्टिंग, स्पेशल स्टोरीज़ और स्पेशल खरी-खोटी जैसे कार्यक्रमों पर काम किया है। कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ वीडियो एंकरिंग का भी अनुभव रखते हैं। SumanTV, Hyderabad (डिजिटल प्लेटफॉर्म) के साथ कार्य कर चुके हैं और ZEE News व India Watch जैसे प्रतिष्ठित न्यूज़ संस्थानों में इंटर्नशिप का अनुभव हासिल किया है। पिछले 1 साल से वे यूपी न्यूज़ नेटवर्क (डिजिटल) से जुड़े हैं और उत्तर प्रदेश से जुड़ी अहम खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रहे हैं। एमजेएमसी की पढ़ाई कर चुके अश्वनी तिवारी की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, ज़मीनी मुद्दों और दर्शकों तक सटीक जानकारी पहुंचाने वाली पत्रकारिता से है। उनकी जन्मस्थली वाराणसी है, जबकि कार्य के दौरान वे कई शहरों में रहकर पत्रकारिता कर चुके हैं।