ज्यादा स्क्रीन टाइम से बढ़ रहा हार्ट डिजीज का खतरा, नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा
अध्ययन से पता चलता है कि 6 घंटे से अधिक स्क्रीन टाइम युवाओं में हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के जोखिम को बढ़ाता है।
आज के डिजिटल दौर में मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। खासकर युवा दिन के कई घंटे स्क्रीन के सामने बिताते हैं। लेकिन अब एक नई स्टडी ने इसे लेकर गंभीर चेतावनी दी है। रिसर्च के अनुसार, ज्यादा स्क्रीन टाइम का सीधा असर दिल की सेहत पर पड़ रहा है। इससे हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और मोटापे जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते इस आदत को नहीं बदला गया, तो आने वाले समय में हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है।
स्टडी में क्या सामने आया
यह रिसर्च American College of Cardiology के साइंटिफिक सेशन में पेश की गई। इसमें 18 से 40 साल के 382 युवाओं को शामिल किया गया। अध्ययन में पाया गया कि जो लोग दिन में 6 घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम बिताते हैं, उनका ब्लड प्रेशर कम स्क्रीन टाइम वाले लोगों की तुलना में 17.9 mmHg तक ज्यादा था। इसके अलावा, उनका बैड कोलेस्ट्रॉल करीब 28.5 mg/dL ज्यादा और BMI भी लगभग 2.9 तक बढ़ा हुआ पाया गया।
कैसे बढ़ता है बीमारी का खतरा
रिसर्च में यह साफ हुआ कि ज्यादा स्क्रीन टाइम के कारण लोग लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहते हैं। इससे शरीर की एक्टिविटी कम हो जाती है, जो मोटापे का कारण बनती है। मोटापा बढ़ने से कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर भी बढ़ता है। यही समस्याएं आगे चलकर हार्ट डिजीज का कारण बनती हैं।
निकोटीन का बढ़ता इस्तेमाल भी चिंता का विषय
स्टडी के लीड रिसर्चर Zain Islam के अनुसार, ज्यादा स्क्रीन टाइम अब लोगों की आदत बन चुकी है। कई लोग बिना किसी जरूरी काम के भी घंटों फोन का इस्तेमाल करते हैं। रिसर्च में यह भी पाया गया कि जिन लोगों का स्क्रीन टाइम ज्यादा था, उनमें निकोटीन का इस्तेमाल भी दोगुना था। यानी यह आदत कई तरह से सेहत को नुकसान पहुंचा रही है।
किन लोगों को ज्यादा खतरा
रिसर्च के अनुसार, सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों को है जो दिन में 6 घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम बिताते हैं और साथ ही कोई फिजिकल एक्टिविटी नहीं करते। विशेषज्ञों का कहना है कि हफ्ते में कम से कम 4 दिन एक्सरसाइज करना जरूरी है। जो लोग एक्सरसाइज नहीं करते, उनमें हाई बीपी और कोलेस्ट्रॉल का खतरा सबसे ज्यादा पाया गया है।
डिजिटल वेलनेस पर ध्यान जरूरी
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब डॉक्टरों को मरीजों की जांच के दौरान उनके स्क्रीन टाइम के बारे में भी पूछना चाहिए। जिन लोगों का स्क्रीन टाइम ज्यादा है, उन्हें इसे कम करने और एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाने की सलाह दी जानी चाहिए।
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