सिलेंडर नहीं तो चूल्हा सही… LPG संकट में बदला रामनवमी का रंग, भंडारे पर पड़ा इसका बड़ा असर
मिडिल ईस्ट संकट के कारण भारत में LPG और ईंधन की कमी हो गई है। इसका असर रामनवमी के भंडारों और मंदिरों के प्रसाद पर पड़ा है। गैस की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण कई जगह भंडारे कम या बंद कर दिए गए हैं।
मिडिल ईस्ट में चल रही जंग का असर अब भारत में साफ दिखाई दे रहा है। देश के कई हिस्सों में LPG और पेट्रोल-डीजल की भारी कमी हो गई है, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गैस सिलेंडर के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं, लेकिन कई जगह लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। कहीं बुकिंग नहीं हो रही तो कहीं सिलेंडर आते ही खत्म हो जा रहे हैं। इस स्थिति में कुछ लोग कालाबाजारी कर भारी मुनाफा भी कमा रहे हैं।
रामनवमी पर भंडारों पर पड़ा असर
इस ईंधन संकट का असर धार्मिक आयोजनों पर भी पड़ा है। रामनवमी के मौके पर हर साल बड़े पैमाने पर भंडारे होते हैं, लेकिन इस बार कई जगह प्रसाद कम बनाया गया। दिल्ली के करोल बाग स्थित हनुमान मंदिर करोल बाग में भी हर साल की तुलना में इस बार कम लोगों के लिए भंडारा तैयार किया गया।
गैस नहीं, इसलिए कम बना प्रसाद
भंडारे के आयोजकों ने बताया कि उनके पास प्रसाद बनाने की सामग्री पूरी थी, लेकिन गैस सिलेंडर की कमी के कारण वे पर्याप्त खाना नहीं बना सके। आयोजक विनोद ने बताया कि पहले 500 श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद बनता था, लेकिन इस बार सिर्फ 200 लोगों के लिए ही बनाया जा सका। उन्होंने बताया कि सिलेंडर ब्लैक में 4400 रुपये तक मिल रहा है, जबकि पहले इसकी कीमत करीब 900 रुपये थी।
लकड़ी के चूल्हे पर बन रहा प्रसाद
गैस की कमी के चलते कई जगह लोगों को लकड़ी के चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मां काली मंदिर में करीब 10,000 लोगों के लिए भंडारा आयोजित किया जा रहा है, लेकिन वहां भी पहले चूल्हे पर प्रसाद तैयार किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, उन्हें 12 सिलेंडर की जरूरत होती है, लेकिन सिर्फ 8 ही मिल पाए हैं।
कई राज्यों में भंडारों की संख्या घटी
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भी यही हाल देखने को मिला, जहां LPG संकट के कारण भंडारों की संख्या 50 से 60 प्रतिशत तक घट गई है। पहले जहां हजारों लोगों के लिए प्रसाद बनता था, अब केवल 500 से 1000 लोगों के लिए ही भंडारा किया जा रहा है।
मंदिरों में भोग-प्रसाद पर भी संकट
LPG संकट का असर देश के प्रमुख मंदिरों पर भी पड़ा है। अयोध्या, काशी, शिरडी और दक्षिण भारत के कई मंदिरों में भंडारे बंद हो गए हैं और सिर्फ भगवान के लिए प्रसाद बनाया जा रहा है। कर्नाटक के बनशंकरी मंदिर में अन्नप्रसादम बंद हो चुका है, जबकि शिरडी और पंढरपुर में खाद्य स्टॉल भी प्रभावित हुए हैं।
स्थिति बनी चिंता का कारण
इस पूरी स्थिति ने आम लोगों के साथ-साथ धार्मिक आयोजनों को भी प्रभावित किया है। अगर जल्द ही ईंधन की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले समय में और ज्यादा दिक्कतें बढ़ सकती हैं। फिलहाल लोग महंगे सिलेंडर और सीमित संसाधनों के साथ किसी तरह काम चला रहे हैं।
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