ममता बनर्जी अब मुख्यमंत्री नहीं… विधानसभा भंग होने के बाद पश्चिम बंगाल में बड़ा संवैधानिक संकट, आखिर किसके हाथ में है राज्य की कमान?

West Bengal Political: पश्चिम बंगाल में विधानसभा भंग होने के बाद ममता बनर्जी की संवैधानिक स्थिति बदल गई है। नई सरकार के शपथ से पहले राज्यपाल की निगरानी में प्रशासन चल रहा है। यह राष्ट्रपति शासन नहीं है, बल्कि एक अंतरिम संवैधानिक स्थिति है।

May 8, 2026 - 14:08
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ममता बनर्जी अब मुख्यमंत्री नहीं… विधानसभा भंग होने के बाद पश्चिम बंगाल में बड़ा संवैधानिक संकट, आखिर किसके हाथ में है राज्य की कमान?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय एक बड़ा संवैधानिक सवाल खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन राज्यपाल द्वारा विधानसभा भंग किए जाने के बाद उनकी स्थिति बदल गई है। अब वे संवैधानिक रूप से मुख्यमंत्री नहीं मानी जा रही हैं। इसी बीच भाजपा की नई सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई को प्रस्तावित है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पुरानी सरकार प्रभावी नहीं रही और नई सरकार ने अभी शपथ नहीं ली, तो राज्य की कमान आखिर किसके पास है और फैसले कौन ले रहा है?

विधानसभा भंग होने का मतलब क्या है
कानूनी विशेषज्ञ अश्वनी कुमार दुबे के अनुसार, किसी भी राज्य विधानसभा का कार्यकाल पहली बैठक से पांच साल तक होता है, जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 172 में लिखा है। जब विधानसभा भंग हो जाती है, तो उसके प्रति जवाबदेह मंत्रिपरिषद का आधार भी खत्म हो जाता है। यानी सरकार की वैधानिक स्थिति कमजोर हो जाती है।

क्या इस्तीफा न देने से CM बने रह सकते हैं?
सीधे शब्दों में जवाब नहीं है। मुख्यमंत्री का पद संविधान और बहुमत पर आधारित होता है। अनुच्छेद 164 के अनुसार, मुख्यमंत्री तभी तक पद पर रहता है, जब तक उसे सदन का समर्थन हासिल हो। जब सदन ही नहीं है या बहुमत की स्थिति बदल गई है, तो सिर्फ इस्तीफा न देने से पद पर बने रहना संभव नहीं होता।

इस बीच राज्य की कमान किसके पास होती है
जब पुरानी सरकार समाप्त हो जाती है और नई सरकार ने शपथ नहीं ली होती, तब एक अंतरिम स्थिति बनती है। इस दौरान प्रशासन पूरी तरह बंद नहीं होता। सरकारी दफ्तर चलते रहते हैं, अधिकारी काम करते हैं और कानून-व्यवस्था बनी रहती है। इस समय राज्यपाल की भूमिका बढ़ जाती है, जो प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखते हैं।

क्या यह राष्ट्रपति शासन है?
नहीं, यह राष्ट्रपति शासन नहीं है। राष्ट्रपति शासन अनुच्छेद 356 के तहत लागू होता है, जिसके लिए अलग प्रक्रिया होती है। यहां मामला केवल सरकार बदलने के बीच का छोटा अंतराल है, जिसे सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया माना जाता है।

संक्रमण काल में क्या फैसले नहीं लिए जाते
इस दौरान बड़े फैसले नहीं लिए जाते। जैसे नई नीतियां, बड़ी नियुक्तियां या भारी खर्च के फैसले टाले जाते हैं। केवल जरूरी काम जैसे कानून-व्यवस्था, अस्पताल, बिजली-पानी और वेतन-पेंशन जैसे कार्य ही जारी रहते हैं।

राज्यपाल की अहम भूमिका
इस स्थिति में राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख के रूप में काम करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि नई सरकार का गठन सही तरीके से हो और प्रशासन में कोई रुकावट न आए। वे बहुमत वाले दल के नेता को सरकार बनाने के लिए बुलाते हैं और शपथ ग्रहण तक व्यवस्था संभालते हैं।

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Ashwani Tiwari अश्वनी तिवारी भारतीय पत्रकार, कंटेंट राइटर, एंकर और मीडिया प्रोफेशनल हैं। वे डिजिटल पत्रकारिता, ग्राउंड रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग और न्यूज़ प्रोडक्शन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने Zee News, Suman TV और UP News Network जैसे मीडिया संस्थानों के साथ कार्य किया है। वे राजनीतिक, सामाजिक और समसामयिक विषयों पर आधारित डिजिटल कंटेंट और ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा अश्वनी तिवारी का जन्म 4 फरवरी 1997 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज, भेलूपुर, वाराणसी से प्राप्त की। हाई स्कूल तथा इंटरमीडिएट की परीक्षाएं उन्होंने प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कीं। इसके बाद उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी से स्नातक (B.A.) की डिग्री प्राप्त की तथा आगे चलकर मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई पूरी की। अश्वनी तिवारी ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कंटेंट राइटिंग और डिजिटल मीडिया से की। उन्होंने 10 दिसंबर 2023 से 15 मार्च 2024 तक India Watch, लखनऊ में कंटेंट राइटर के रूप में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने समाचार लेखन और डिजिटल मीडिया कंटेंट पर कार्य किया। इसके बाद उन्होंने 7 मई 2024 से 9 जुलाई 2024 तक Zee News, नोएडा में कंटेंट राइटर के रूप में इंटर्नशिप की। इस दौरान वे न्यूज़ स्क्रिप्ट, डिजिटल कंटेंट और मीडिया रिसर्च से जुड़े रहे। अक्टूबर 2024 से अप्रैल 2025 तक उन्होंने Suman TV, हैदराबाद में कंटेंट राइटर के रूप में कार्य किया। यहां उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर आधारित समाचार एवं डिजिटल कंटेंट तैयार किए। वर्तमान में UP News Network से सब एडिटर के रूप में जुड़े, जहां उन्होंने कंटेंट राइटिंग, एंकरिंग और ग्राउंड रिपोर्टिंग का कार्य किया। इस दौरान वे ‘खरी खोटी’ नामक विशेष शो का भी हिस्सा रहे। उन्होंने कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग तथा वीडियो प्रस्तुति की। वर्तमान में अश्वनी तिवारी मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। अश्वनी तिवारी डिजिटल पत्रकारिता और न्यूज़ प्रोडक्शन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उनकी विशेषज्ञता कंटेंट राइटिंग, एंकरिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया आधारित न्यूज़ प्रस्तुति में मानी जाती है।