UP में प्रोटेस्ट करने पर नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी? योगी सरकार ने सख्त किए नियम, जानें क्या है नई प्रक्रिया 

उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए चरित्र सत्यापन के नियम सख्त किए गए हैं। नए निर्देशों के तहत हिंसक गतिविधियों में शामिल होने और हिंसक तरीके से मौजूदा व्यवस्था बदलने के उद्देश्य वाले संगठनों से जुड़े अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रभावित हो सकती है। हालांकि, केवल राजनीतिक विचारधारा, शांतिपूर्ण प्रदर्शन या एफआईआर दर्ज होने के आधार पर किसी को स्वतः अयोग्य नहीं माना जाएगा। 

Oct 29, 2026 - 15:39
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UP में प्रोटेस्ट करने पर नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी? योगी सरकार ने सख्त किए नियम, जानें क्या है नई प्रक्रिया 

उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए चरित्र सत्यापन से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है। नए निर्देशों के तहत हिंसक गतिविधियों में शामिल होने और हिंसक तरीके से मौजूदा व्यवस्था बदलने के उद्देश्य वाले संगठनों से जुड़े अभ्यर्थियों की सरकारी नियुक्ति पर रोक लग सकती है। नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज की ओर से जारी निर्देशों में राजनीतिक विचारधारा और हिंसक गतिविधियों के बीच अंतर स्पष्ट किया गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि किसी भी प्रदर्शन में शामिल होने वाले हर युवा को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। नियमों में केवल एफआईआर दर्ज होने या जांच लंबित रहने पर अभ्यर्थी को स्वतः अयोग्य नहीं मानने का प्रावधान भी है।

हिंसक प्रदर्शन में शामिल होने पर क्या कहता है नियम?
सरकारी आदेश के मुताबिक, किसी व्यक्ति को केवल उसकी राजनीतिक विचारधारा के कारण सरकारी नियुक्ति के लिए अनुपयुक्त नहीं माना जाएगा। लेकिन ऐसे संगठनों के सदस्य, जिनका घोषित उद्देश्य हिंसक तरीकों से समाज की मौजूदा व्यवस्था को बदलना है, सरकारी सेवा में नियुक्ति के लिए अपात्र माने जा सकते हैं। आदेश में 21 वर्ष की आयु पूरी कर चुके व्यक्ति के सत्यापन की तारीख से पहले के तीन वर्षों के दौरान ऐसी गतिविधियों में भाग लेने का भी उल्लेख है। इस अवधि में ऐसी गतिविधियों में शामिल होने को व्यक्ति के सक्रिय रूप से उनसे जुड़े रहने का प्रमाण माना जा सकता है। हालांकि, यदि इस दौरान उसके व्यवहार में बदलाव के सकारात्मक और ठोस प्रमाण उपलब्ध हों, तो उन पर भी विचार किया जा सकता है।

क्या किसी भी प्रदर्शन में शामिल होने पर नहीं मिलेगी नौकरी?
नए नियमों को लेकर सबसे अहम बात यह है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होना और हिंसक गतिविधियों में संलिप्त होना एक जैसी स्थिति नहीं है। आदेश में राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी अभ्यर्थी को अयोग्य नहीं मानने की बात कही गई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि किसी भी धरने, प्रदर्शन या आंदोलन में शामिल होने मात्र से सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। नियुक्ति का फैसला चरित्र सत्यापन और संबंधित नियमों के आधार पर किया जाएगा। हिंसक गतिविधियों में संलिप्तता या हिंसक उद्देश्य वाले संगठनों से जुड़ाव सामने आने पर अभ्यर्थी की पात्रता प्रभावित हो सकती है।

केवल FIR दर्ज होने पर नहीं रुक जाएगी नौकरी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी अभ्यर्थी के खिलाफ केवल एफआईआर दर्ज होने या जांच लंबित रहने से उसे स्वतः सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं माना जाएगा। यानी पुलिस रिकॉर्ड में मामला दर्ज होना अपने आप नियुक्ति रोकने का अंतिम आधार नहीं होगा। चरित्र सत्यापन में मामले की प्रकृति और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। 

किन सरकारी भर्तियों पर लागू होंगे नियम?
यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों, निगमों, परिषदों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती के तहत होने वाली नियुक्तियों के चरित्र सत्यापन पर लागू होगी। इसका उद्देश्य नियुक्ति से पहले अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड और पृष्ठभूमि की जांच की प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के तहत पूरा करना है। पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का नए निर्देशों के तहत दोबारा चरित्र सत्यापन नहीं कराया जाएगा। हालांकि, आवश्यकता पड़ने पर संबंधित कर्मचारी के पिछले विभाग से उसके बारे में जानकारी ली जा सकती है।

पुलिस को 30 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
नए निर्देशों के तहत पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई (LIU) को चरित्र सत्यापन के लिए अनुरोध मिलने के 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट देनी होगी। इससे भर्ती प्रक्रिया के दौरान सत्यापन में होने वाली देरी को कम करने का प्रयास किया गया है। यदि किसी अभ्यर्थी की सत्यापन रिपोर्ट प्रतिकूल आती है, तो जिलाधिकारी को अपनी संस्तुति भेजने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर देना होगा। यह प्रक्रिया ऑनलाइन या व्यक्तिगत रूप से पूरी की जा सकती है। इस तरह उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया में हिंसक गतिविधियों और संबंधित संगठनों से जुड़ाव को लेकर सख्ती की गई है। वहीं, राजनीतिक विचारधारा, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और केवल एफआईआर दर्ज होने को अपने आप अयोग्यता का आधार नहीं माना गया है।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content